छिप-छिप अश्रु बहाने वालो, मोती व्यर्थ लुटाने वालो...कविता
ग्राम-बसंतनगर, भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से काशीराम सिन्हा एक कविता सुना रहें है :
छिप-छिप अश्रु बहाने वालो, मोती व्यर्थ लुटाने वालो-
कुछ सपनो के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है-
सपना क्या है नैन सेज पर सोया हुआ आंख का पानी-
और टूटना है उसका ज्यों जागे कच्ची नीद जवानी-
गीली उमर बनाने वालो दोबे बिना नहाने वालो-
कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है...
Posted on: Aug 31, 2017. Tags: KASHIRAM SINHA SONG VICTIMS REGISTER
जगह-जगह तोर ज्योति जले हे जय हो गजानन स्वामी...भजन गीत
ग्राम-छुल्कारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट अपने साथियों के सांथ एक भजन सुना रहे हैं :
जगह-जगह तोर ज्योति जले हे जय हो गजानन स्वामी-
चला चली पूजा करे ला मिल जुल के संगवारी-
माता तोर पार्वती पिता महादेवा-
लड्डूवन के भोग लगे संतकर देवा-
भादो के महिना तोर पूजा होय जय हो गजानन स्वामी-
पान चढ़े फुल चढ़े और चढ़े मेवा...
Posted on: Aug 31, 2017. Tags: KANHAIYALAL KEWAT SONG VICTIMS REGISTER
मजबूरी का मजदूर, मजदूर की जिंदगानी...कविता
कानपुर (उत्तरप्रदेश) से के.एम. भाई एक कविता सुना रहे हैं :
मजबूरी का मजदूर-
कभी अन्न तो कभी तन-
कभी भूख तो कभी दर्द-
कभी दवा तो कभी नशा-
कभी लाज तो कभी हया-
कभी सांस तो कभी जुआ-
मजबूरी का नाम मजदूर हुआ-
कभी गरीबी तो कभी बिमारी-
कभी बेबसी तो कभी लाचारी-
हर मजदूर की यही कहानी-
मजबूरी ही है हर-
मजदूर की जिंदगानी-
मजदूर की जिंदगानी ...
Posted on: Aug 30, 2017. Tags: K.M BHAI SONG VICTIMS REGISTER
मनमोहन मुरली वाले मुरली बजाना, मथुरा में जा के कही भूल न जाना...गीत
ग्राम-सलेय्या कला, पोस्ट-सावरी बाज़ार, तहसील-मोहखेड़, जिला-छिन्दवाडा (मध्यप्रदेश) से सविता धुर्वे कान्हा गीत सुना रही हैं :
ओ कान्हा ओ कान्हा जाना नहीं ब्रज छोड़ के – मनमोहन मुरली वाले मुरली बजाना-
मथुरा में जा के कही भूल न जाना – हमने ओ निर्वाहा तुमको जान लिया – कैसे हो मन के ये पहचान लिया-
मीठी बाते कर के दिल बहलाते हो...
Posted on: Aug 30, 2017. Tags: SAVITA DHURVE SONG VICTIMS REGISTER
गोंडवाना राज्य मांगने के लिए पहली बैठक 1917 में हुई तब से यह आंदोलन लगातार चल रहा है...
जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से बालकेन के साथ आज उत्तम अटला जुड़े हैं जो गोंडी और हिंदी मिश्रित भाषा में गोंडवाना राज्य के लिए हो रहे आंदोलन का इतिहास बता रहे हैं वे बता रहे हैं कि गोंडवाना राज्य के लिए पहली बैठक सन 1917 में हरई में हुई सन 1927 और 1930 में भी बैठक हुई, 1933 में राजा द्वारसिंह ने इस मांग के लिए 18 हजार का एक कोष की स्थापना की, नारायण सिंह उइके, हरी सिंह देव कंगाली माझी ,राजा नरेश सिंह, शीतल मरकाम इस तरह के महापुरुष इस कोष के सहभागी बने और 1959 में कांग्रेस के नेताओं ने भी गोंडवाना राज्य गठन का समर्थन किया था नारायण सिंह उइके इस मंडल के अध्यक्ष रहे और 1975 से गोंडवाना अलग राज्य की मांग कर आन्दोलन कर रहे है...
