सुमिरन कर ले मेरे मना तोरि, बीती उमर हरी नाम बिना...भक्ति गीत
ग्राम-बिजुरी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से राज कुमार एक भक्ति गीत सुना रहे हैं:
सुमिरन कर ले मेरे मना तोरि, बीती उमर हरी नाम बिना-
पंछी पंख बिनो, हस्ती दन्त बिनो – नारी पुरुष बिना – जैसे पुत्र पिता बिन हिना, वैसे पुरुष हरी नाम बिना-
कूप नीर बिनो धेनु छीर बिनो-
धरती मेघ बिना...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: RAKESH KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
नशा न करना नशा जहर है नशा से डर है, जीते जी मर जायेंगे भैया नशा न करना...नशा मुक्त गीत
ग्राम-अकरारी कालोनी खाझा,पोस्ट-खाझा तहसील-त्यौथर, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से तुमन किशोर आदिवासी नशा नहीं करने का सन्देश गीत सुना रहे है:
नशा न करना नशा जहर है नशा से डर है-
जीते जी मर जायेंगे भैया नशा न करना-
गंजा न पीना भैया कलेजा जलेगा बातो बात में-
दारु न पीना भैया पागल फिरोगे तुम बाजार में-
भूखे मरेंगे बच्चे बीवी रहेगी इन्तजार में...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: SONG TUMAN KISHOR VICTIMS REGISTER
ग्राम सभा में सब बोले, बन्द जबानो को खोले...कविता
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया ग्राम सभा को लेकर एक कविता सुना रहे है:
ग्राम सभा में सब बोले, बन्द जबानो को खोले-
साफ रहेगा जल जीवन, स्वस्थ रहेगा जन-जन उतना-
एक आदमी एक औरत को, हमने तो जाना-
एक चादर का ताना पूजा है, चादर का बाना...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
विकास, रफ़्तार, तरक्की चीख रहा है, पुकार रहा है पानी पानी...कविता
आम गोला, जिला-मुजफ्फपुर (बिहार) से कलाकार साहित्यक दिनेश प्रसाद देश में हो रहे जल सकंट को लेकर बात कर रहे है:
विकास,रफ़्तार, तरक्की चीख रहा है, पुकार रहा है पानी पानी-
गोया हुकूमत निज़ाम, श्रम की आचल ओढे, हुआ जा रहा है पानी, पानी-
यु तो कुदरती हक़ है, दरकार भी है, तभी तो अवाम मांग रहा है पानी,पानी-
गोया चुल्लू भर पानी ही तो चाहिए, डूबने इतराने खातिर-
सुख रही है द्र्बेमान की जड़े, हर तरफ धूल धूसर है, बस हज़ार बरस की दुआ ना देना दादी नानी...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
पानी बरसे अषाढ़ हरा हरा दिखथे पहाड़...गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक गीत सुना रहे हैं :
पानी बरसे अषाढ़ हरा हरा दिखथे पहाड़-
नार बेवार जमे जमथे गाय के अहार-
जंगल झाड़ दिखे, दिखथे फहाड़-
देखके सगा जन पर्वत के झाड़-
जंगल में गाय भैस चरथे असाड-
हमार जीव हरियर दिखथे पहाड़...
