शंकर जी के मंदिर जाबे गौर मैया देही वरदान रानी के सोहगवा...
ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट ग्रामवासी महिलाओं से एक सुहगवा गीत सुन रहे हैं:
शंकर जी के मंदिर जाबे गौरा मैया देही वरदान-
पहले मागब अपने मांग के सेदुरा-
सेंदुरा अमर हो जाए –
दूसरा मागब अपने माथे की बिंदिया-
बिंदिया अमर हो जाए-
शंकर जी के मंदिर जाबे गौरा मैया देही वरदान
रानी के सोहगवा... कन्हैया लाल केवट@8225027272
Posted on: Sep 02, 2017. Tags: KANHAIYALAL KEWAT SONG VICTIMS REGISTER
जंगल खोजो झाड़ी खोजो, खोज के हैरान हो गए हो...गीत
ग्राम-उदारी परसापरा, तहसील-वाड्रफनगर, थाना-चलगली, जिला- बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से चंदरसाय एक गीत सुना रहे हैं :
जंगल खोजो झाड़ी खोजो-
खोज के हैरान हो गए हो-
मोर शिवा गुरु आ जाना-
मन के मंदिर में-
जंगल खोजो झाड़ी खोजो, खोज के हैरान हो गए हो-
मोर शिवा गुरु आ जाना मन के मंदिर में...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: CHANDAR SAI SONG VICTIMS REGISTER
लंका मा मचे है लड़ाई आवाज आवय बंधो मा रे...गीत
ग्राम-पंडरीपानी, विकासखंड-गोरेला, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से सुनीता धुर्वे एक गीत सुना रहे हैं :
लंका मा मचे है लड़ाई आवाज आवय बंधो मा रे-
कई लाख तोप चले हैं कई लाख जंजीर गा कई लाख जंजीर-
कई लाख तलवार चले है लंका मा यार आवाज आवय बंधो मा रे-
एक लाख तोप चले हैं दुई लाख जंजीर गा कैलाख जंजीर-
तीन लाख तलवार चलय लंका मा राम आवाज आवय बंधो मा रे...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: SONG SUNITA DHURWE VICTIMS REGISTER
एक दिन मटिया में सभही के सिंगार होई, जब पिजड़ा से पंछी फरार होई...लोकगीत-
ग्राम बभनतलाव पोस्ट, थाना तहसील, जिला-रोहतास( बिहार) से सुरेंद्र उरांव एक लोकगीत सुना रहे है:-
अरे एक दिन मटिया में सभही के सिंगार होई-
जब पिजड़ा से पंछी फरार होई, जब पिजड़ा से पंछी फरार होई-
नाती नातेदार काम नही अएहे, नाती नातेदार काम नही अएहे-
गाँव के लोगवा सब खडी रही जयेहें, गाँव के लोगवा सब खडी रही जयेहें-
हो केवल भाई भततीजे सबका हार होई, हो केवल भाई भततीजे सबका हार होई-
जब पिजड़ा से पंछी फरार होई, जब पिजड़ा से पंछी फरार होई...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: SONG SURENDRA ORAON VICTIMS REGISTER
बचना नीचे से कोयल निकरी गोठ, कावा पाले उसके अंडे वह मस्ती में डोले...बाल कविता
ग्राम-त्रिकुंदा से मंगेश यादव एक बाल कविता सुना रहे है-
बचना नीचे से कोयल निकरी गोठ-
कावा पाले उसके अंडे वह मस्ती में डोले-
मानव राम-राम अंधे चादर-
पानी है धूनी रे माई सीष बिचारी-
मछली बगुले मोर उड़ाई-
गिर गिट रंग बदले अपना देह-
फूल के पास झट पकडे उन्हें...
