मजबूरी का मजदूर, मजदूर की जिंदगानी...कविता
कानपुर (उत्तरप्रदेश) से के.एम. भाई एक कविता सुना रहे हैं :
मजबूरी का मजदूर-
कभी अन्न तो कभी तन-
कभी भूख तो कभी दर्द-
कभी दवा तो कभी नशा-
कभी लाज तो कभी हया-
कभी सांस तो कभी जुआ-
मजबूरी का नाम मजदूर हुआ-
कभी गरीबी तो कभी बिमारी-
कभी बेबसी तो कभी लाचारी-
हर मजदूर की यही कहानी-
मजबूरी ही है हर-
मजदूर की जिंदगानी-
मजदूर की जिंदगानी ...
Posted on: Aug 30, 2017. Tags: K.M BHAI SONG VICTIMS REGISTER
मनमोहन मुरली वाले मुरली बजाना, मथुरा में जा के कही भूल न जाना...गीत
ग्राम-सलेय्या कला, पोस्ट-सावरी बाज़ार, तहसील-मोहखेड़, जिला-छिन्दवाडा (मध्यप्रदेश) से सविता धुर्वे कान्हा गीत सुना रही हैं :
ओ कान्हा ओ कान्हा जाना नहीं ब्रज छोड़ के – मनमोहन मुरली वाले मुरली बजाना-
मथुरा में जा के कही भूल न जाना – हमने ओ निर्वाहा तुमको जान लिया – कैसे हो मन के ये पहचान लिया-
मीठी बाते कर के दिल बहलाते हो...
Posted on: Aug 30, 2017. Tags: SAVITA DHURVE SONG VICTIMS REGISTER
गोंडवाना राज्य मांगने के लिए पहली बैठक 1917 में हुई तब से यह आंदोलन लगातार चल रहा है...
जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से बालकेन के साथ आज उत्तम अटला जुड़े हैं जो गोंडी और हिंदी मिश्रित भाषा में गोंडवाना राज्य के लिए हो रहे आंदोलन का इतिहास बता रहे हैं वे बता रहे हैं कि गोंडवाना राज्य के लिए पहली बैठक सन 1917 में हरई में हुई सन 1927 और 1930 में भी बैठक हुई, 1933 में राजा द्वारसिंह ने इस मांग के लिए 18 हजार का एक कोष की स्थापना की, नारायण सिंह उइके, हरी सिंह देव कंगाली माझी ,राजा नरेश सिंह, शीतल मरकाम इस तरह के महापुरुष इस कोष के सहभागी बने और 1959 में कांग्रेस के नेताओं ने भी गोंडवाना राज्य गठन का समर्थन किया था नारायण सिंह उइके इस मंडल के अध्यक्ष रहे और 1975 से गोंडवाना अलग राज्य की मांग कर आन्दोलन कर रहे है...
Posted on: Aug 30, 2017. Tags: BAALKEN SONG VICTIMS REGISTER
पानी का संकट : यदि समाज पूर्वजों द्वारा दिखाए रास्ते पर चले तो स्थितियां सम्भाली जा सकती हैं...
ग्राम-मालीघाट,जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार अनुपम मिश्र के पानी पर किए गए कार्य के महत्व को बता रहे हैं. प्रसिद्ध जल वैज्ञानिक अनुपम मिश्र जीवन भर जल संरक्षण के लिए प्रयत्नशील रहे हैं. मिश्र ने बड़ते जल संकट को देखते हुए कहा था कि अगर जल संचित करने में ध्यान नहीं दिया गया तो अगली लड़ाई पानी के लिए ही होगी इससे मानव सभ्यता का विनाश संभव है यदि समाज पूर्वजो द्वारा दिखाए रास्ते पर चले तो स्थितियां सम्भाली जा सकती हैं. वे इस माह प्रकाशित एक पत्रिका के विशेषांक के बारे में बता रहे हैं जिसमे अनुपम मिश्र के कार्य पर लेख लिखे गए हैं. वे सभी सीजीनेट श्रोताओं से यह आग्रह कर रहे हैं कि आप अपने अच्छे पुस्तकालय विकसित करें और ऐसी पुस्तकों का संग्रह करें...सुनील@9308571702
Posted on: Aug 30, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
कोयलिया बोली रे अम्बुआ के डाल मा, कोयलिया बोली रे...करमा गीत -
ग्राम-ताराडांड, जिला-अनूपपुर, (मध्यप्रदेश) से गायक राजूराम पटेल एवं मुन्नीलाल ढीमर बांसुरी बजा रहे हैं और एक कर्मा गीत सुना रहे है:
कोयलिया बोली रे अम्बुआ के डाल मा, कोयलिया बोली रे-
महुआ बिनत वा श्याम मिलकर बैर बिनत वा राम-
कोयलिया बोली रे अम्बुआ के डाल मा, कोयलिया बोली रे-
का बची का जंगल झाड़ी, का नदिया पहाड़-
तौर मौर मन हवी तो का करी सरकार-
कोयलिया बोली रे अम्बुआ के डाल मा, कोयलिया बोली रे...
