छत्तीसगढ़ का प्रयाग : राजिम की कहानी...
राजिम का प्रचीन नाम कमलक्षेत्र पदमावतीपुरी था वहां पर मंदिरों का समूह है उसे छत्तीसगढ़ का कुम्भ भी कहा जाता है राजिम रायपुर से 45 दूर महानदी संगम स्थल पर स्थित है राजिम का नाम एक महिला के नाम पर पड़ा है प्राचीन मान्यता के अनुसार एक महिला प्रतिदिन उस रास्ते से होकर तेल बेचने जाया करती थी एक दिन अचानक एक शिलाखण्ड से महिला का पैर टकरा गया जिससे सर पर रखी तेल की हांड़ी गिर गई जिस पर वह दुखी होकर रोने लगी तभी तेल की हांड़ी एकाएक भर जाती है, तब से उसका पात्र कभी खाली नही हुवा। इस घटना की जानकारी जा के पास पहुंची जिस पर राजा ने उस जगह की खुदाई कराई जिसमे विष्णु जी की चतुर्भुजी प्रतिमा निकली, इस तरह से इस जगह का नाम राजिम पड़ा| राकेश कुमार@9617339569.
Posted on: Dec 07, 2017. Tags: RAKESH KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : महुए के फल और फूल से वनवासी को भोजन, दवा, तेल,आय सब कुछ मिलता है...
भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से राकेश कुमार दोहरे वनोपज देने वाले एक पेड़ के विषय में बता रहे हैं वे बता रहे हैं महुवा एक ऐसा पेड़ है जिसके फूल और फल दोनों का उपयोग किया जा सकता है, वनों में निवास करने वाले आदिवासी उस पेड़ के फूल का उपयोग शराब बनाकर दवा के रूप में प्रयोग करते है लेकिन इसका ज़्यादा सेवन करने से इसके दुष्परिणाम भी होते है. महुवे को चने के सांथ फरा बनाकर खा भी सकते हैं. उसके फल से तेल निकाला जाता है जिसे सर्दी के मौसम में शरीर को कोमल रखने के लिए उपयोग में लिया जाता है. इसके खली से मुह के छाले का इलाज किया जाता है सांथ ही तेल का उपयोग दिये जलाने में कर सकते है गाँव के निवासियों का ये आय का एक अच्छा साधन है |राकेश कुमार@9617339569.
Posted on: Dec 06, 2017. Tags: RAKESH KUMAR SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
गर्भहीं अधमोख झूले मल मूत्र भारेल हो...सोहर गीत -
ग्राम-रामनगर, पोस्ट-महेवा, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से कुमारी शांति एक सोहर गीत सुना रही हैं. यह गीत बच्चे के जन्म के समय पर गाया जाता है :
गर्भहीं अधमोख झूले मल मूत्र भारेल हो – संतो जठर गेनी बहु संसावे संकट गर्भ होवेल हो – तलफी तड़प जीव मारेल मुख बोल ना पावेल हो – संतो करुणा करिके पछताता अरुचि स्वांस ना आवेली हो – कास दुःख यह का हो मित्र संगिन देखेन हो – संतो पिछला जनम सुधि आवे समुझी मन विवेकन हो...
Posted on: Dec 03, 2017. Tags: KUMARI SHANTI SONG VICTIMS REGISTER
मनुष्य जनम धनवारु रे रुहा माचू डूब रे...भीली गीत -
जिला-बडवानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक भीली गीत सुना रहे है:
मनुष्य जनम धनवारु रे रुहा माचू डूब रे-
निमी जड़रियो जो अल्प निजोड़े-
कूदी कूदी नीर कूदी नीर रे-
तू सत्संग में जाया कर-
इत भगवान् न गाया कर-
संत संदारे बोसिन बैसो रे-
देव ध्यान लगाया कर-
मनुष्य जनम धनवारु रे रुहा माचू डूब रे...
Posted on: Dec 01, 2017. Tags: SONG SURESH KUMAR VICTIMS REGISTER
लोक लुकड़ी लोकड़ खोरसा ककईया गुथली दीदी के देवरा लुकड़ी...छेरता गीत -
ग्राम-पाली, विकासखंड-पोड़ी उपरोड़ा, जिला-कोरबा (छत्तीसगढ़) से सुरेश कुमार मरावी एक पारंपरिक त्योहार छेरता के विषय में बता रहे हैं. छेरता पूस (जनवरी) के महीने में मनाया जाता है जिसमे लड़कियां, बच्चे टोली बनाकर मोहल्ले मे छेरता (भिक्षा) मांगने जाते है वे उसी त्योहार से संबंधित एक गीत सुना रहे हैं :
लोक लुकड़ी लोकड़ खोरसा ककईया गुथली दीदी के देवरा लुकड़ी – भाटा टोरुं हो देवर भाटा टोरू ना – हांथ लगे कंटा झिलमिलिक सेरिक भंटा लुकड़ी – आंगन मा मेड खुटा मेड खुटा हमला दैहा डेढ़ सुपा...


