अगहन महीने के गुरुवार के दिन होता है अगहन पूजा...उड़ीसा का पारंपरिक त्यौहार छत्तीसगढ़ में भी-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता आज अपने सांथी शुभद्रा के सांथ आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 4 घोडीदीपा में हैं और अगहन गुरुवार पूजा के विषय में चर्चा कर रहे हैं ये बता रहे हैं कि अगहन पूजा उड़ीसा से प्रारंभ हुआ था ये पूजा अगहन के महीने में गुरुवार के दिन मनाया जाता है इसकी तैयारी एक दिन पहले से शुरू हो जाती हैं घर की सफाई करते है गोबर से लिपाई की जाती है चावल को पीसक्रर इसकी झूंटी बनाते हैं रंगोली बनाई जाती है सुबह चार बजे भोर में लक्ष्मी जी स्थापना की जाती है चावल का मांद बनाकर कलश रखते है चावल के आटे का मडा और खीर बनाते हैं दिन में तीन बार भोग लगता है कथा सुनने का कार्यक्रम भी होता है | राजेंद्र गुप्ता@9993891275
Posted on: Nov 07, 2017. Tags: RAJENDRA GUPATA SONG VICTIMS REGISTER
सभी ग्रामीण श्रमिक भाई बहनों को श्रम मित्र की मदद से श्रमिक पंजीयन कार्ड बनवा लेना चाहिए...
ग्राम-भोगाम, नयापारा जिला-दन्तेवाड़ा (छत्तीसगढ़) से उर्मिला नाग बता रही हैं वे एक श्रममित्र हैं अपने काम के लिए ये गाँव में महिलाओं को बैठक में बुलाती हैं और उन्हें अनिवार्य रूप से श्रमिक पंजीयन कार्ड बनाने की सलाह देती है जिससे लोग इनके पास पंजीयन कराने के लिए आते हैं पंजीयन करने के लिए राशन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटोकापी और ओरिजनल दोनों पत्र के सांथ 3 फोटो लाने को कहती हैं इन सभी पेपर को ये श्रमिक कार्यालय में जमा करती हैं इसके 3 महीने बाद इन्हें श्रमिक पंजीयन कार्ड प्राप्त हो जाता है इस तरह से ये लोगो को जागरूक कर उनकी मदद करती हैं | सभी अगर श्रमिक पंजीयन कार्ड बना लें तो उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है | उर्मिला नाग@9424157830
Posted on: Nov 07, 2017. Tags: SONG URMILA NAG DANTEWADA VICTIMS REGISTER
जय हो गवाठनिन जय हो तोर...लुक्कड़ नाटक गीत -
ग्राम-माझीपदर, जिला-दन्तेवाड़ा (छत्तीसगढ़) से सरला श्रीवास लुक्कड़ नाटक में गया जाने वाला एक एक गीत सुना रही हैं :
जय हो गवाठनिन जय हो तोर – ना होओं लबरा लफंगा चोर
पोक्खा पोक्खा सेमी टोर आधा ला मोर खाय बर जोर जय गंगा –
तहीं गवाठनिन तहीं सियान साधू संत के कहना ला मान – दुहाटी बैला देवे दान, बेटवा जोड़ा देहि भगवान – जय गंगा...
Posted on: Nov 07, 2017. Tags: SARLA SHRIVAS SONG VICTIMS REGISTER
हमारे गाँव के तुड़पा जाति के लोग दंतेश्वरी माँ का भोग बनाते थे इसलिए गाँव का नाम भोगाम पड़ा...
ग्राम-टेकनार, जिला-दन्तेवाड़ा (छत्तीसगढ़) से श्यामलाल ग्राम भोगाम जिला-दन्तेवाड़ा के निवासी रेनू नाग के साथ में इस गाँव का नाम भोगाम कैसे पड़ा इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं वे बता रही हैं कि दन्तेवाडा शहर से 6 किलोमीटर दूर एक गाँव है भोगाम इस गाँव में वे रहती हैं, इनके गाँव में पहले तुडपा जाति के लोग रहते थे ये लोग माता दन्तेश्वरी का भोग (प्रसाद) बनाया करते थे इस भोग को बोना भात भी कहते हैं. माता का पहला भोग तुडपा लोग ही दिया करते हैं इसी भोग के बाद ही आगे का कार्य पूजा पाठ किया जाता है इसी भोग के नाम से ही इस गाँव का नाम भोगाम पड़ा, इस प्रकार गाँव का नाम यहां की एक प्राचीन एक परंपरा से जुड़ा हुआ है | श्यामलाल@8889513307
Posted on: Nov 07, 2017. Tags: SHYAMLAL DANTEWADA SONG VICTIMS REGISTER
स्वागत है पहुना मन के, स्वागत है पहुना मन के...बुल्टू रेडियो स्वागत गीत
आदिवासी बहुल क्षेत्र भोरमदेव वनांचल ग्राम-रौचंद, विकासखंड-बोडला, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अमित साहू एक सीजीनेट बुल्टू रेडियो स्वागत गीत सुना रहे हैं :
स्वागत है पहुना मन के, स्वागत है पहुना मन के – होवत है स्वागत सबो जनता बुल्टू रेडियो सुनईया मन के – गाँव गली सब लोगन के होवत है तरक्की – सब जघा बुल्टू रेडियो आ गए रे भैया मोर विकास के गंगा मोहागे – दिन बहुर गए सबो झन के खुशी छा गए बुल्टू रेडियो के – जागो गा हरम भाग जागथे भैया जागथे हमर भाग जागथे ना...


