भारत का पहला अंतर्राष्ट्रीय अभिनेता: ओम पुरी की पहली पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि...
18 अक्टूबर 1950 को अभिनेता ओम पुरी का जन्म हरियाणा के अंबाला में एक पंजाबी परिवार में हुआ था।ओम पुरी का दिल का दौरा पड़ने से शुक्रवार 6 जनवरी को निधन हो गया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1976 में मराठी फिल्म घासीराम कोतवाल से की थी।उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।पुरी पुणे के फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के छात्र थे। पुरी ने भारतीय फिल्मों के साथ ही पाकिस्तानी, ब्रिटिश और हॉलीवुड फिल्मों में काम किया था। उनके खाते में स्वतंत्र फिल्मों के साथ ही आर्ट फिल्में भी दर्ज हैं। उन्होंने अमेरिकन फिल्मों में भी काम किया |अपने पसंदीदा अभिनेता को हार्दिक श्रद्धांजलि:सुनील कुमार@9308571702
Posted on: Jan 07, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
यदि समय को पहचान लिया आपने...कविता -
बडवानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार नववर्ष की शुभकामनाओं के सांथ एक कविता सुना रहे हैं :
यदि समय को पहचान लिया आपने – महकती हुई सुबह होगी खुशियों भरी रात होगी – वर्ष के प्रत्येक दिन किस्मत आपके सांथ होगी – जब सफलताओं का दौर चलेगा जीत आपके सांथ होगी – नाम और शोहरत आपकी जिंदगी की सौगात होगी – हर दौर के महफिल में पहले आपकी बात होगी...
Posted on: Jan 06, 2018. Tags: RAKESH KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
Vananchal Bultoo(Bluetooth) Radio from Kanker Chhattisgarh: 6th Jan 18...
Today Rakesh Kumar is presenting a Vananchal Bultoo Radio Program from North Bastar area of Chhattisgarh in Hindi language in this latest edition of Bultoo radio programs. Villagers use their mobile phones to record these songs and reports. They call 08050068000 to record. Now this program can be downloaded by people from their Gram Panchayat office if it has Broadband or from a download center nearby. They can also get it from someone nearby with smartphone and internet and then via Bluetooth.
Posted on: Jan 06, 2018. Tags: CHHATTISGARH RAKESH KUMAR SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
हमलोगो ने आवास के लिए पंचायत की ओर से स्वीकृति के लिए आवेदन किया, सभी का नहीं हुआ...
ग्राम-करिया, ब्लाक-चारामा, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) के रामकुमार सिन्हा बता रहे है कि ग्राम पंचायत के द्वारा आवास के लिए स्वीकृति के लिए प्रस्ताव बनाकर 50 लोगो का नाम भेजा था 40 लोगो का स्वीकृति हो गया है बाकि लोगो का नहीं हुआ है उसके लिए उन्होंने पंचायत सचिव के पास भी शिकायत किये तो बोलते है अभी आया नहीं है और जो 40 लोगो का स्वीकृति हुआ है उनका पैसा भी आ गया और घर भी बनने लगे है उनका कहना है कि जिन लोगो का सूची में नाम है और स्वीकृति नहीं हुआ है उनका जल्दी स्वीकृति हो इसलिए साथी सीजीनेट सुनने वाले साथियों से मदद की अपील कर रहे है कि इन अधिकारियो से बात कर स्वीकृति दिलवाने में मदद करें: सरपंच@9340243236, C.E.O.@8770708980. भान साहू@7999954438.
Posted on: Jan 05, 2018. Tags: RAMKUMAR SINHA SONG VICTIMS REGISTER
सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस पर: विधवा-विवाह, फुले दम्पति और डा. यशवंत की सेवा, शहादत...
सुबह-सुबह एक सुन्दर युवती नदी में कूद पड़ी. फुले तट पर टहल रहे थे. नदी की तेज धारा में डूबती-उतराती उस युवती को फुले ने देख लिया बचाने के लिए फ़ौरन नदी में कूदकर उसे किनारे पर ले आये. सर मुड़ाई उस युवती को देखकर फुले समझ चुके थे कि वह विधवा है. पूछने पर पता चला कि वह पास ही के गांव की एक ब्राह्मणी है, उसके पेट में छ: महीने का बच्चा पल रहा है. लोग उसे मार देना चाहते हैं, इसलिए वह अब जीना नहीं चाहती. फुले ने उसे समझाया, ढाढस दिया और जबरन घर ले आए. रोती हुई उस स्त्री को सावित्रीबाई ने गले लगा लिया. फुले दम्पति ने उसी समय निर्णय ले लिया कि वे न केवल विधवा आश्रम खोलेंगे, बल्कि गर्भवती विधवाओं के प्रसव भी कराएँगे. जिस पर पूरे महाराष्ट्र में उनका विरोध हुआ, मगर कम्पनी सरकार की मदद से फुले का बाल बांका नहीं हुआ. उसी युवती की देख-रेख में फुले ने देश का पहला विधवा आश्रम खोला, जिसमें आस-पास की पीड़ित बाल-विधवाएं रहने लगीं. फिर पूणे सहित पूरे महाराष्ट्र में अनेक विधवा आश्रम खुले. अन्यों सहित ब्राह्मणों का भी साथ मिलने लगा.
कुछ दिनों बाद उस विधवा युवती से एक प्यारा-सा बच्चा पैदा हुआ. जिसे फुले दम्पती ने बड़े प्यार से पाला-पोसा. उसे पढ़ा-लिखाकर डाक्टर बनाया. संयोग से फुले दम्पती को कोई संतान नहीं हुई. इसलिए फुले ने उसी लड़के को अपना धर्म-पुत्र माना. यही बालक प्रसिद्ध चिकित्सक डा. यशवंत बना, जिसे फुले दम्पती ने अपनी पूरी सम्पति दे दी, सावित्रीबाई फुले के बाद फुले ट्रस्ट के मालिक डा. यशवंत ही हुए. फुले के भतीजों की एक न चली. ब्रिटिश सरकार में डा. यशवंत की बड़ी इज्जत थी. यशवंत प्लेग रोगियों की सेवा करते-करते चल बसे |


