हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए...कविता एवं गीत -
दुष्यंत कुमार और भोजपुरी के राष्ट्रीय गीत के रचयिता बाबु रघुवीर नारायण जी की पुण्य तिथि के अवसर में एक कविता एवं गीत:
हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए-
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए-
आज यह दीवार परदों की तरह हिलने लगी-
शर्ते लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए-
हर सडक पर हर गली में हर नगर हर गाँव में-
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए-
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं-
मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए...
बाबु नारायण जी का गीत-
सुंदर सुभूमि भैया भारत के देशवा से-
मोरा प्राण बसे ही म कहे रे बटोहीया-
एक द्वार घेरे रामा हिमा कोतो वलवा से-
तीन द्वार सिन्धु गह रवे रे बटोहीया...
Posted on: Dec 31, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
नशा न करना मान लो कहना मेरे प्यारे भाई होगी बड़ी खराबी...गीत
जिला-मुजफ्फरपुर बिहार से अादित्य कुमार नशा मुक्ति पर एक गीत सुना रहे हैं :
नशा न करना मान लो कहना मेरे प्यारे भाई होगी बड़ी खराबी-
दारू न पीना भैया पागल फिरोगे तुम बाजार में-
भूखे रहेंगे बच्चे बीवी रहेगी इंतजार में-
बिकेंगे गहना फिर क्या कहना दर-दर टोकर खाना – होगी बड़ी खराबी, होगी बड़ी खराबी-
खैनी न खाना बंधू छाले पड़ेंगे तेरे होठ में-
भरी जवानी चौपट होंगी हजम न होगा खाना – होगी बड़ी खराबी, होगी बड़ी खराबी...
Posted on: Dec 30, 2017. Tags: Aditya Kumar SONG VICTIMS REGISTER
भोपाल में अपनी मांगो को लेकर दृष्टिबाधित साथी 12 दिन से हड़ताल पर हैं, पर कोई सुन नहीं रहा...
भोपाल (मध्यप्रदेश) से शिव कुमार बता रहे हैं भोपाल में उनकी विभिन्न मांगों को लेकर दृष्टिबाधित साथियों की हड़ताल विगत 12 दिन से चल रही है कुछ साथी भूख हड़ताल पर बैठे हैं कुछ साथी आमरण अनशन करने का भी सोच रहे हैं जन सत्याग्रह भी किये लेकिन उनकी मांगो को लेकर कोई सुनवाई नही हो रही है वे कह रहे है वे सब गरीब है इसलिए उनकी बात को सुना नही जा रहा है. जब सरकार ने बैठे लोगों की समस्या होती है तो वे एक दिन में बिल पास कर उसका निवारण कर लेते हैं. वे इस समस्या को सरकार तक पहुचाने के लिए प्रयास कर रहे है और आप सभी सुनने वालों से मदद मांग रहे हैं जिससे उनकी मांग को सुना जाए और पूरा किया जाए शिव कुमार@9713884284.
Posted on: Dec 30, 2017. Tags: SHIV KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
जीवन को सीमित मत रखना, खाने और पाखाने तक...कविता -
मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार महेश ठाकुर चकोर की एक रचना सुना रहे हैं:
जीवन को सीमित मत रखना-
खाने और पाखाने तक-
जात-धर्म के दुश्चिंतन तक-
छल प्रपंच बहाने तक-
सड़ी-गली जो परम्पराएं-
चल उनको दफनाएं हम-
विषमता पाखण्ड अभाव-
को चल दूर भगाएं हम-
करते हम संघर्ष रहेंगे-
हर लब के मुस्काने तक-
जीवन को सीमित मत रखना-
खाने और पाखाने तक-
आज धर्म के नाम अमानुष-
ने कोहराम मचाया है-
सारे इंसां हैं दहशत में-
ऐसा रूप बनाया है-
दम ना लेंगे खाओ क़समें-
नामो-निशां मिटाने तक-
जीवन को सीमित मत रखना-
खाने और पाखाने तक-
दहशतगर्दों के आगे हम-
अपना शीश झुकाते हैं-
उन्हें नष्ट करने की सोचो-
तलवे हम सहलाते हैं-
चलो लड़ाई लड़ें मिलकर-
भय जग से भग जाने तक-
जीवन को सीमित मत रखना-
खाने और पाखाने तक-
जात-पात में बंटकर हम ने-
मानवता का नाश किया-
हैवानियत मिटे ऐसा-
कभी नहीं प्रयास किया-
क़फ़न बांधकर सर में निकलो-
आदमियत के आने तक-
जीवन को सीमित मत रखना-
खाने और पाखाने तक...
Posted on: Dec 30, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
हमसे पूछेला चूड़ी कंगनवा, कबले अईहे सजनवा की मनवा लागत नईखे...भोजपुरी गीत -
मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक भोजपुरी गीत सुना रहे हैं :
हमसे पूछेला चूड़ी कंगनवा, कबले अईहे सजनवा की मनवा लागत नईखे – दम तोड़ेला दिल के सपनवा झर -झर बहे नयनवां की मनवा लागत नईखे – चिट्ठी न पाती भेजला जब से गईल परदेश हो – कवना करनवां से सजना तू हु भूलवल अपना देश हो – कजरा सूखल गजरा टूटल काँट भईल सूखी तनवा – बड़ा निरमोही बाड़े आवेले न रात के सपनवां – अखियाँ से बहतारे लोड़बा रे बन के अरमनवा – परदेश राजा अभियो से आजा साल भर भईले गवनवा...


