मिलजुल के बाधाओं को पार करो...गीत-

वीरेंद्र गंधर्व राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से दिव्यागों के लिए एक गीत प्रस्तुत कर रहे हैं
दिव्यांगता चुनौती है स्वीकार करो, मिलजुल के बाधाओं को पार करो-
एक दूजे का सदा सत्कार करो मिलजुल के बाधाओं को पार करो-
एकता में बाल है ये सदा याद रहे सच्ची लग्न हौसला साथ रहे-
साथियों की टोली एक तैयार करो मिलजुल के बाधाओं को पार करो-
आगे बड़ों और औरों को बदने दो उनको भी आसमान पर चढ़ने दो-
प्रेरणा देनी है लेनी है संघर्ष अपनी तो पुश्तैनी है मिलजुल के बाधाओं को पार करो...
संपर्क नंबर@8962001946.

Posted on: Jan 11, 2022. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VIRENDRA GANDHARV

चिरइया ला कय गोटी मारो सनन जाएँ...छत्तीसगढ़ी गीत-

ग्राम-खैरागढ़, जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से जया मुंडे एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
चिरइया ला कय गोटी मारो सनन जाएँ-
दुसरिया गोटी मारो रे धनी ला पड़ी जाए-
चिरइया ला कय गोटी मारो भाजी फूल-
मोर चढ़ती जवानी गिने चिरइया ला कय गोटी मारो-
करे मुखारी जामुन डारा वो तोला बैठे ला बुलाये वो...

Posted on: Dec 08, 2021. Tags: CG CG JYA MUNDE RAJNANDGANV SONG

हमें बनाया ईश्वर ने इक दूजे का श्रृंगार...गीत-

राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र गंधर्व अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर संदेश देते हुये एक गीत सुना रहे हैं, “हमें बनाया ईश्वर ने इक दूजे का श्रृंगार” | अपना संदेश रिकॉर्ड करने के लिये 08050068000 पर मिस्ड कॉल कर सकते हैं|

Posted on: Nov 07, 2021. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VIRENDRA GANDHARV

तै शादी करे बर करबे भोला...भक्ति गीत

ग्राम-खैरागढ़ , जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से जया मुंडे एक भक्ति गीत सुना रही हैं:
तै शादी करे बर करबे भोला-
का मडवा गाड़ियाबे गा-
तै मोला बता दे न-
तोर देश मा बांस अऊ लकड़ी-
मोर देश ला कछु नही हो तोला काला बताओं ओ...

Posted on: Nov 06, 2021. Tags: CG JAYA MUNDE RAJNANDGAON SONG

देश विदेश आदिवासियों को रायपुर में बुलाया हैं...कविता

जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
देश विदेश आदिवासियों को रायपुर में बुलाया हैं-
यथा नाम तथा गुण तेरे छतीसगढ़ का नाम बढाया हैं-
भूपेश का अर्थ राजा होता हैं, राजा जैसा ठाठ बाट हैं-
तेरे ही कारण छत्तीसगढ़ का ऊचा हुआ ललाठ हैं-
गांव-गांव का उन्ती का जमा पुने पहनाया हैं...GT

Posted on: Nov 02, 2021. Tags: CG POEM RAJNANDGANV VIRENDRA GANDHARV

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