नशाखोरी हमारे देश को खोखला कर रही है, इस समस्या से हमारे देश का भविष्य बर्बाद हो रहा है...
नशा एक सामाजिक बुराई है जो व्यक्ति को धीरे-धीरे अपने शिकंजे में जकड़ लेता है और शारीरिक रूप से बीमार और मानसिक रूप से भिखारी बना देता है| नशा करने वाले व्यक्ति का पूरा परिवार बिखर जाता है | नशाखोरी हमारे देश की प्रमुख चुनौती बन गई है| जब मनुष्य अत्यधिक आनंद प्राप्त के लिए कुछ पदार्थो का सेवन करने का आदि हो जाता है तब उसे नशाखोरी कहते है| नशाखोरी हमारे देश को खोखला कर रही है और इस समस्या से हमारे देश का भविष्य बर्बाद हो रहा है | शिक्षा पर भी उसका बुरा असर पड़ रहा है| देश में प्रत्येक व्यक्ति अगर संकल्प ले कि धूम्र पदार्थो का सेवन नहीं करेगा तभी ही हम नशाखोरी को जड़ से नष्ट कर पायेंगे| प्रीतमलाल प्रजापति@9522824525
Posted on: Nov 10, 2017. Tags: PRITAMLAL PRAJAPATI SONG VICTIMS REGISTER
आओ मिलकर पेड़ लगाये हरा भरा ये देश बनाये...पर्यावरण गीत
जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से प्रीतमलाल प्रजापति एक कविता सुना रहे है:
आओ मिलकर पेड़ लगाये-
हराभरा ये देश बनाये-
वातावरण को स्वच्छ बनाकर-
इस जीवन को स्वास्थ बनाये-
पेड़ न कोई कटने पायें-
मिलकर हम ये सब कसम खाएं-
पेड़ देते है वायु जीवन इसमें हो दीर्घायु – खुद समझे ओरो को बताये-
आओ मिलकर पेड़ लगाये-
हरा भरा ये देश बनाये...
Posted on: Nov 09, 2017. Tags: PRITAMLAL PRAJAPATI SONG VICTIMS REGISTER
एक कभी शब्द सुना था सगरो सुबह शाम दोपहर में...गीत
जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से प्रीतमलाल प्रजापति के साथ में मनीष कुमार है जो एक गीत सुना रहे हैं :
एक कभी शब्द सुना था सगरो सुबह शाम दोपहर में-
जय भीम गूंजता महू घर में भीम बाबा के शहर में-
गली-गली चौक चौराहा गूजे सबके नजर में-
हर जुबा पे भीम के नाम हवे एक ही मंजिल पैगाम हवे-
भीम नाम कि शक्ति बढ़ जाई मंजिल हमेश न छुट पाई-
एक कभी शब्द सुना था सगरो सुबह शाम दोपहर में...
Posted on: Nov 04, 2017. Tags: PRITAMLAL PRAJAPATI SONG VICTIMS REGISTER
संस्कार वह मोहर (गहना) है जो जीवन के सिक्के को बहुमूल्य बना देती है...सुविचार -
प्रीतमलाल संस्कारो का जीवन में महत्व को बताते हुए कह रहे हैं, संस्कार वह मोहर (गहना) है जो जीवन के सिक्के को बहुमूल्य बना देती है. यहाँ तो वही मिलता है जो हम लुटाते हैं। ज्ञान के अनुरूप आचरण होने से जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव होता है आदर्शों की प्रशंसा तो सभी कर सकते है लेकिन इन्हें अपने जीवन में उतरना कठिन होता है. ये कह रहे हैं धन से केवल सुविधा प्राप्त की जा सकती है सुख नही. बुद्धि से नही ह्रदय से जीएं क्योंकि बुद्धि में विचार होते है विवेक नही साथ ही प्रशंसा को कुवारी कन्या कहते हुए कहते हैं इसे सज्जन पसंद नही करते और ये दुर्जनों को पसंद नही करती, प्रशंसा एक मदिरा भी है जिसे कानो से पीया जाता है. दीर्घ जीवन स्मरणीय हो ना हो लेकिन स्मरणीय जीवन दीर्घ होता है | प्रीतमलाल@9522824525
Posted on: Oct 18, 2017. Tags: PRITAMLAL PRAJAPATI SONG VICTIMS REGISTER
शिक्षा हमें परिस्थितियों को अनुकूल बनाने और अपनी संभावनाओं को पूरा करने में मदद करती है...
शिक्षा के माध्यम से हम अपना और अपने परिवार के विकास के साथ राष्ट्र के निर्माण में भी अपना योगदान दे सकते हैं, वर्तमान में शिक्षा के प्रति हमारे सोच में परिवर्तन हो गया हैं, आज के समय में युवक युवतियां शिक्षा को सिर्फ रोजगार से जोड़ते हैं, विद्यार्थी आज तकनीकि शिक्षा की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, तकनीकि शिक्षा ने परंपरागत शिक्षा प्रणाली को पीछे धकेल दिया है इसके परिणाम ये हुआ है कि मानवों में नैतिकता, मानवीयता, सदाचार का अभाव होते जा रहा है जो चिंता का विषय है, शिक्षा हमारी मानवीय और शारीरिक क्षमताओं के अनुरूप होना चाहिए लेकिन आज के विद्यार्थी पैसे की भागमभाग में नैतिक शिक्षा को पीछे छोड़ चुके हैं जो जीवन का आधार है | प्रीतमलाल प्रजापति@9522824525.
