आ गए यहां जवां कदम जिन्दगी को ढूंढते हुए...
आ गए यहां जवां कदम जिन्दगी को ढूंढते हुए
गीत गा रहे हैं आज हम रागिनी को ढूंढते हुए.
अब दिलों में ये उमंग है, ये जहां नया बसायेंगे
जिन्दगी का दौर आज से दोस्तों को हम सिखायेंगे
फूल हम नए खिलायेंगे ताजगी को ढूंढते हुए
कोढ की तरह दहेज है आज देश के समाज में
है तबाह आज आदमी लूट पर टिके समाज में
हम समाज भी बनायेंगे आदमी को ढूंढते हुए
फिर न रो सके कोई दुल्हन जोर जुल्म का न हो निशां
मुस्करा उठे धरा गगन हम रचेंगे ऐसी दास्तां
यूं सजाएंगे वतन को हम हर खुशी को ढूंढते हुए
गीत गा रहे हैं आज हम जिंदगी को ढूंढते हुए.
Posted on: Sep 26, 2013. Tags: Bunty Jhansi
है तबाह आज आदमी, लूट पर टिके समाज में...
गीत गा रहे हैं आज हम रागिनी को ढूंढते हुए
आ गए यहाँ जवां कदम, मंजिलों को ढूंढते हुए
इन दिलों में उमंग है,जहाँ नया बसायेंगे
फूल हम नया खिलाएंगे ताजगी को ढूंढते हुए
बुरा दहेज़ का रिवाज है आज देश और समाज में
है तबाह आज आदमी, लूट पर टिके समाज में
Posted on: Aug 26, 2013. Tags: Bunty Jhansi
इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमज़ोर हो न...
इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमज़ोर हो न
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूल कर भी कोई भूल हो न..
हम न सोचें हमें क्या मिला है, हम ये सोचें किया क्या है अर्पण
फूल खुशियों के बाँटें सभी को, सबका जीवन ही बन जाये मधुबन
अपनी करुणा का जल तू बहाकर, करदे पावन हरेक मनका कोना
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूल कर भी कोई भूल हो न..
