रे रे रेला रेला रे रे रेला रे रे रेला रे रेला...गोंडी विवाह गीत -
ग्राम-कुकड़ेल, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से शिवलाल तुलावी के साथ में सदरू पुरेटी, जलारु बाई तुलावी एक विवाह गोंडी गीत सुना रहे है:
रे रे रेला रेला रे रे रेला रे रे रेला रे रेला-
ताना हरा हरा गोता बतावा हरो हरो गोता-
डोबल मांडो रे सामनो मंडा ते सांगो-
सोबय मिर्री ता हरा हरा गोता मिर्री ता...
Posted on: Dec 01, 2017. Tags: SHIVLAL TULAVI SONG VICTIMS REGISTER
लोक लुकड़ी लोकड़ खोरसा ककईया गुथली दीदी के देवरा लुकड़ी...छेरता गीत -
ग्राम-पाली, विकासखंड-पोड़ी उपरोड़ा, जिला-कोरबा (छत्तीसगढ़) से सुरेश कुमार मरावी एक पारंपरिक त्योहार छेरता के विषय में बता रहे हैं. छेरता पूस (जनवरी) के महीने में मनाया जाता है जिसमे लड़कियां, बच्चे टोली बनाकर मोहल्ले मे छेरता (भिक्षा) मांगने जाते है वे उसी त्योहार से संबंधित एक गीत सुना रहे हैं :
लोक लुकड़ी लोकड़ खोरसा ककईया गुथली दीदी के देवरा लुकड़ी – भाटा टोरुं हो देवर भाटा टोरू ना – हांथ लगे कंटा झिलमिलिक सेरिक भंटा लुकड़ी – आंगन मा मेड खुटा मेड खुटा हमला दैहा डेढ़ सुपा...
Posted on: Dec 01, 2017. Tags: SONG SURESH KUMAR MARAVI VICTIMS REGISTER
राधे का नाम है अनमोल, बन्दे राधे-राधे...भजन गीत -
कन्हारगांव, भानुप्रतापपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मुकेश कुमार गावडे एक भजन गीत सुना रहे है:
राधे का नाम है अनमोल बन्दे राधे-राधे-
प्रेम से बोलो राधे-राधे सारे बोलो राधे-राधे-
मिलकर बोलो राधे-राधे-
ब्रम्हा जी बोले राधे विष्णु जी बोले राधे-
शंकर की डमरू से आवाज आई राधे-राधे...
Posted on: Dec 01, 2017. Tags: KANHAIYALAL KEWAT SONG VICTIMS REGISTER
जब ले लगे सरकारी सुविधा के आस रे...छत्तीसगढ़ी गीत
नरेश बुनकर ब्लॉक-पंडरिया,जिला-कबीरधाम, छत्तीसगढ़ से एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
जब ले लगे सरकारी सुविधा के आस रे-
मोरे गावं के धरती हा मर गे पियास रे-
बाँध नहर बनगे खेती में नहीं है पानी-
ईटा पथरा बन गे बिन सिंमेट बिन पानी-
होए नइ हे उदघाटन बाँध हा दरग गे रे-
जब ले लगे सरकारी सुविधा के आस रे...
Posted on: Dec 01, 2017. Tags: NARESH BUNKAR SONG VICTIMS REGISTER
पूरब पच्छुनवा से झुकये अन्धिरिया...बघेली सावन गीत
अशोक कुमार कोरी, ग्राम- हरदौहां, पंचायत-तेंदुनी, जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से एक सावन गीत गा रहे हैं:
पूरब पच्छुनवा से झुकये अन्धिरिया-
रसये लागी न-
उहये नान्ही-नान्ही बुंदिया बरसय लागी न-
अपने महलिया से ससुरु निहारे जी-
पतली पतोहुआ भिजत होहिहे न-
पूरब पच्छुनवा से झुकये अन्धियरिया...


