वनांचल स्वर : बांस की लकड़ी और सन की रस्सी से बना कांवड़ आदिवासी का पिक अप वैन है...
सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज ग्राम-अमोड़ी, ब्लाक-अंतागढ़, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां से बाबूलाल नेटी गाँव के रामप्रसाद जी से कांवड़ बनाने के बारे में बात कर रहे है वे बता रहे हैं कि कांवड़ को बांस की लकड़ी और सन की रस्सी से बनाया जाता है और उसके बीच में टोकनी रखी जाती है और वो गाँव के लोगों के बहुत काम में आता है जैसे इसकी मदद से मिटटी, पत्थर, अनाज ये सब लम्बी दूरी तक इसमें ढो सकते है और इसको महिला पुरुष दोनों इस्तेमाल में ला सकते है यह व्यक्ति की क्षमता पर निर्भर है पर इसमें 40-50 किलोग्राम तक सामान आराम से ढो सकते है आदिवासी इलाकों में ग्रामीण अक्सर इसको बाजार भी लेकर जाते है. बाबूलाल नेटी@9713997981.
Posted on: Dec 15, 2017. Tags: RAMPRASAD ANTAGADH SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
लाज बचाओ कृष्ण मुरारी...भजन गीत -
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता तबला वादन के साथ क्लासिकल भजन सुना रहे है:
लाज बचाओ कृष्ण मुरारी-
तुम बिन औरन दूजा-
बीच भंवर में आन पड़ी है-
मैया मोरी डगमग डोले-
लाज बचाओ कृष्ण मुरारी...
Posted on: Dec 15, 2017. Tags: RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
झूला झूलन आई हो जगदंबा भवानी...देवी गीत -
ग्राम-छुल्कारी, पोस्ट-फुनगा, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से सोनू केवट एक गीत सुना रहे हैं :
झूला झूलन आई हो जगदंबा भवानी – पहला झूला मैहर झूली
शारदा नार कहाई हो जगदंबे भवानी – दूसर झूला अवधपुर झूली – राम की नार कहाई हो जगदंबा भवानी – तीसर झूला माँ कुदरगढ़ झूली...
Posted on: Dec 15, 2017. Tags: SONG SONU KEWAT VICTIMS REGISTER
ओ-ओ-ओ हाय मैं तो गावत हूँ गा...सीजीनेट गीत -
ग्राम-धुमाधाड़ (भगतपारा) जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रूपलाल एक गीत सुना रहे है:
ओ-ओ-ओ हाय मैं तो गावत हूँ गा-
गाय के ददरिया सुनावत हूँ रे-
सीजीनेट स्वर निकाले-
मोबाइल रेडियो शुभ्रांशु सर रे भैया-
गोंडवाना क्रान्ति लाने-
हीरा सिंह मरकाम रे भैया-
सीजीनेट में रिकॉर्ड करा-
सीजीनेट में रिकॉर्ड...
Posted on: Dec 15, 2017. Tags: RUPLAL MARAVI SONG VICTIMS REGISTER
इत शिव रे हमरे शिव रे आवेला...शिव भजन
अनूप राम ग्राम-डूमरखोरका, पंचायत-भेलवाडीह, जिला-बलरामपुर, छत्तीसगढ़ से एक शिव भजन सुना रहे हैं:
इत शिव रे हमरे शिव रे आवेला-
आज तो शिव हमर घरे-
बैठ जा शिव मोरे जिव्हा में-
झिमिर तहर जाव्ते शिव ता आवेला-
सगर बजारों हमर शिव आइग आवेला-
नाहाते धुआते होइया शिवा ते आवेला-
इत शिव रे हमरे शिव रे...

