कहां के पहुना कहां चली आया हाय रे कहां के पहुना...डोमकच गीत -
ग्राम-बरपटिया, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रामचरन जगत, राम सुभाष चटर्जी, सुखराम आयाम एक पारंपरिक डोमकच गीत सुना रहे हैं :
कहां के पहुना कहां चली आया हाय रे कहां के पहुना – कहां चली आया रे कहां जग लोलो हमर गोडो ला धोवाय – खेला-खेला भले ले ले गोडो ला धोवाय लेरे गोडो ला धोवाय – गोविदपुर कर पहुना बरा पाटिया आया हाय रे गोविदपुर के पहुना – पारा पाटिया रे माझे खोर लोलो हमर गोडो ला धोवाय – खेला-खेला भले ले ले गोडो ला धोवाय लेरे गोडो ला धोवाय...
Posted on: Dec 15, 2017. Tags: DHANSAY MARAVI SONG VICTIMS REGISTER
कागज के ये नोट है बाबू कागज के ही नोट...गीत -
तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता एक गीत सुना रहे हैं :
कागज के ये नोट है बाबू कागज के ही नोट – कागज की ये माया इनके नियत में है खोट जी – चले गाँव की ओर जी – अजी सांचे के ये रंग अनेक जी सांचे के ही ढंग – अरे बाबू जैसी करनी वैसी भरनी चले शहर की ओर...
Posted on: Dec 15, 2017. Tags: RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
सीखकर अपनी दुकान खुद बना रहा हूँ, बड़े घर भी बना सकता हूँ, ऐसा और युवा भी कर सकते हैं...
सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-अमोड़ी, विकासखंड-अंतागढ़, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां बाबूलाल नेटी गाँव के युवा दुर्गाप्रसाद सलाम से बात कर रहे हैं जो बता रहे हैं कि उन्होंने अलग-अलग जगहों में काम कर कारीगरी सीखी और बिना किसी कारीगर की मदद से अपना दुकान बना रहे हैं. वे कह रहे हैं कि बगैर किसी बाहरी मदद के वे ऐसे ही और बड़े घर भी बना सकते हैं आगे अगर ज़रुरत पड़े. गांव में 300 की जनसंख्या है दुकान के लिए दुर्गुकोंदल से सामान लाते है स्वयं अपनी पूंजी लगाकर रोजगार कर आज के युवाओ को आत्मनिर्भर होने का संदेश दे रहे हैं इस प्रकार से हम देश की बढ़ती बरोजगारी को कम कर सकते हैं | बाबूलाल नेटी@9713997981
Posted on: Dec 15, 2017. Tags: BABULAL NETI SONG VICTIMS REGISTER
निमय अमोल निमय बाबोल...गोंडी गीत -
ग्राम-आमापारा सिवनी, पोस्ट-रायगोटिया, तहसील-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से जयबती मतलामी एक गोंडी गीत सुना रही है:
निमय अमोल निमय बाबोल-
निमय बापी निमय तादों-
मातल जंगो पेन लिंगो-
अकाल बुध गुरु ज्ञान-
गुरून मेवा वायो ज्ञान...
Posted on: Dec 15, 2017. Tags: JAIBATI MATLAMI SONG VICTIMS REGISTER
हमारे गाँव में बहुत सी महिलाएं चरखे से कपड़े बनाती हैं और अपना नियमित रोज़गार प्राप्त करती हैं...
ग्राम हथौद जिला बालोद छत्तीसगढ़ से राम सिंह देवांगन बता रहे है कि खादी ग्रामोद्योग विभाग की मदद से उनके गाँव में 30-35 महिलाये चरखे से कपड़ा बना रही हैं और उनको लगातार रोज़गार मिल रहा है. ऐसे ही आप भी अपने गाँव में कर सकते हैं इसके लिए राज्य शासन के खाड़ी ग्रामोद्योग विभाग से मदद मिलती है. ये महिलाएं कई प्रकार के कपडे बना सकते है उसमे चादर, लुंगी, टॉवेल, पेंट कपडा, शर्ट कपडा इत्यादि शामिल है| इससे हमारी मजदूरी और रोजगार मिलता है इसमें एक समस्या है जो कि भुनकरो के लिए जो वर्कशेड बनाया गया था इस वर्ष 2017 में किसी बुनकर के लिए वर्कसेट नहीं बना है तो वे बोल रहे है कि बुनकर का वर्कशेड का निर्माण हो ऐसा वे शासन से मांग कर रहे है |



