पढ़ा दे ना दाई मोला पढ़ा दे ना गा...सरगुजिया गीत -
हिरवाडांड, ग्राम, पोस्ट-लांजीत, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से जुगलसिंह मरकाम एक सरगुजिया गीत सुना रहे हैं :
पढ़ा दे ना दाई मोला पढ़ा दे ना गा – तोर हांथ जोरत हों मै तोर पांव परत हों मै – छोटे-छोटे लडीका मन स्कूल जाथे – पढ़ लिख के वो मन 4 बजे आथे – क ख ग घ ड पढ़ के सुनाथे – हिंदी अंग्रजी मोला पढ़ के सुनाथे...
Posted on: Dec 17, 2017. Tags: JUGALSINGH MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
छोटी सी उमर मा मारी शादी कराय दी...बारेली भाषा में गीत -
जिला-बडवानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार बारेली भाषा में एक आदिवासी गीत सुना रहे हैं:
छोटी सी उमर मा मारी शादी कराय दी-
नई मानयो दादा मारी शादी कराय दी-
शादी कराय दिन बड़ी धूम मचाय दी-
हंसने कूदन उमर पे रोक लगाय दी-
नई मानयो दादा मारी शादी कराय दी...
Posted on: Dec 17, 2017. Tags: SONG SURESH KUMAR VICTIMS REGISTER
आपका स्वास्थ्य आपके मोबाईल में : लहसुन के औषधीय गुण -
भोरमदेव वनांचल, ग्राम-रौचंद, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अमित साहू आज हमें आम उपयोग की लहसुन के औषधीय गुणों को बता रहे हैं. वे बता रहे हैं कि लहसुन को सब्जी में उपयोग करने और इसकी कली को प्रतिदिन खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है. लहसुन खांसी, श्वांस, पेट दर्द, गैस अपच जैसी समस्याओं में लाभकारी है. आज के समय में किसान ज़्यादा लाभ पाने के उद्देश्य से कई तरह के रासायनिक खाद का प्रयोग करते है जिससे मनुष्य को सही पोषक तत्व युक्त भोजन नही मिल पाता इसलिए खेती में जैविक खाद, गोबर खाद आदि का उपयोग करना चाहिए जिससे उचित पोषक तत्व युक्त भोजन मिले और हम बीमारी से बच सके | अमित साहू@8964931287.
Posted on: Dec 17, 2017. Tags: AMIT SAHU SONG VICTIMS REGISTER
आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : नीम के पत्तो से बुखार का उपचार -
सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज पद्दापारा, ग्राम-कराटी, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां से बाबूलाल नेटी की मुलाक़ात गाँव के वैद्य सोमनाथ दुग्गा से हुई है जो बता रहे है कि वे सामान्य बीमारियों का इलाज करते है जैसे बुखार, उसके लिए कडवी नीम की पत्ती को उबालकर कम से कम तीन दिन तक खाली पेट में खाने से बुखार ठीक हो जाता है और वैसे ही बोईनीम है उसको भी पीने से बीमारी ठीक हो जाता है. पहले ज्यादातर उन्ही से बीमारियों को ठीक किया जाता था, अब लोग गोली भी लेते हैं. उसको बड़े लोगो को एक गिलास और छोटे बच्चो को आधा गिलास पिलाना है और उसको खाली पेट दिन में 2 बार पीना है : अधिक जानकारी के लिए संपर्क@9407975847.
Posted on: Dec 17, 2017. Tags: SOMNATH DUGGA SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : यहां ग्रामवासी तेंदूपत्ता, चार, महुआ, हर्रा, बेहडा बेचकर अपना जीवन यापन करते है...
ग्राम-घोडाखुर्री, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से अगनुराम खड़हे स्थानीय माध्यमिक शाला के प्रधान अध्यापक है. वे बता रहे हैं कि स्कूल की शुरुवात उनके ही द्वारा 1983 में हुई. घोडाकुर्री गाँव का नाम क्यों पड़ा उसके बारे में जानकारी दे रहे है. बुजुर्ग लोगो के अनुसार यहाँ पर घोडा के पैर का एक चिन्ह था उसके कारण इस गाँव का नाम घोडाकुर्री नाम पड़ा है अभी वर्तमान में वो चिन्ह नहीं है मिट गया है. गाँव की जनसँख्या लगभग 350 है. पूरा गोंड आदिवासी गाँव है और उनका जीवन यापन का साधन खेती बाड़ी और वनोपज है | वनोपज में तेंदूपत्ता, चार, महुआ, हर्रा, बेहडा, इस सबको समय-समय पर सीजन के आधार पर एकत्रित करते है उसको बेचकर अपना जीवन यापन करते है
