आमा तरिक डोकरी बहेरा तरिक भुतवा ओ...लोक गीत -
ग्राम-छुल्कारी, पोस्ट-फुनगा, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से सोनू केवट एक लोक गीत सुना रहे हैं :
आमा तरिक डोकरी बहेरा तरिक भुतवा ओ – का लेके तै आये माता का लेके तै जाबे ओ –
बैगा ला बुलवायों दाई ओहू आ के चिल्लाईस ओ – पंडा ला बुलवाए माता ओहू आ के चिल्लाईस दाई – का लेबे ता जाबे माता माहू ला बता दे ओ – जउन लबे त देहूं तै यहां से जबे...
Posted on: Dec 11, 2017. Tags: SONG SONU KEWAT VICTIMS REGISTER
सेवा-सेवा इन्दाना रो सजुर पेन ता...गोंडी आरती गीत -
ग्राम-हंडियामाल, थाना+विकासखंड -मोहगाँव, जिला-मंडला (म.प्र.) से विजय कुमार मरकाम एक गोंडी गीत सुना रहे है:
सेवा-सेवा इन्दाना रो सजुर पेन ता-
जयदेवा इन्दाना रो सेवा सजुर पेन ता-
सेवा-सेवा इन्दाना रो सजुर पेन ता-
सेवा-सेवा इन्दाना रो-
साज मडा देवतन सुमरी कियाना-
जय देवा इन्दा को वर्जी नवा नावा-
सेवा-सेवा इन्दाना रो सजुर पेन ता...
Posted on: Dec 11, 2017. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VIJAY KUMAR MARKAM
आज के युवा हमारी रीति नीति, देवी देवता को नहीं मानते, इसका क्या करें कुछ समझ नहीं आता...
ग्राम-वटीन टोला, तहसील-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से उत्तम अटाला के साथ में प्रभुराम मंडावी हैं जो बता रहे है कि पहले बुजुर्ग लोग के पीछे हम लोग जुड़े थे उनकी बात मानते थे लेकिन आजकल गाँव में गली का साफ सफाई भी नहीं है उसी तरह से देवी देवता की जगह भी गंदी है सफाई कर देंगे तो उससे देवी देवता भी खुश हो जायेंगे और आशीर्वाद देंगे। आदिवासियों के तो देवता धामी ही असली सहयोग करने वाला है. माता पिता ने जन्म दिया है और वे बुजुर्ग इस व्यवस्था को बताते है लेकिन आज की युवा पीढ़ी यह सब मानती नहीं है वे कहते है कि मैं उस देवता को नहीं जानता, मानता तो इसके लिए क्या करना चाहिए समझ में नहीं आता. उत्तम@7354620356.
Posted on: Dec 11, 2017. Tags: PRABHURAM MANDAVI SONG VICTIMS REGISTER
री री लोयो री री लो री री लोयो रीलो रीलो...गोंडी विवाह गीत -
ग्राम-सुखय, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से रायसिंह दुगा और लखन सिंह उइका एक गोंडी विवाह गीत सुना रहे है:
री री लोयो री री लो री री लोयो रीलो रीलो-
विलोड वालोड सिंगारी-
विलोड वालोड सिंगा डोसेड-
जल्दी सिंगाड़ कोटा हे-
जल्दी सिंगाड़ कोटा दोसेड-
री री लोयो री री लो री री लोयो रीलो रीलो...
Posted on: Dec 11, 2017. Tags: RAISINGH DUGGA LAKHN SINGH UIKA SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर: किसान लाख छोटे व्यापारियों को बेचते हैं फिर हम उसे बड़े व्यापारियों को बेचते हैं...
दुर्गुकोंदल बाजार, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल केवट व्यापारी चेतराम जैन से चर्चा कर रहे है वे ग्राम-जातावडा, भानुप्रतापपुर के रहने वाले हैं, वे किसानी करते हैं और साथ में गल्ला का व्यापार भी करते हैं जिसमे वे लाख खरीदते हैं. लाख का उपज कुसुम, बेर, पीपल, पलसा के पेड़ो में होता है साल में दो बार इसकी कटाई होती है पहली कटाई जनवरी, फरवरी में होती है फरवरी में लाख के कीड़े निकलकर पेड़ की डालियों में चढ़ जाते हैं जिसे जून, जुलाई में काटी जाती है लाख को किसान लाते हैं और हम जैसे छोटे व्यापारियों के पास बेच देते हैं जिसे वे बड़े व्यापारियों को बेचते हैं यदि किसान स्व-सहायता समूह बनाएं तो बड़े व्यापारी उनके पास आ सकते हैं और उन्हें अधिक दाम मिल सकता है



