सांस्कृतिक नीति बनाने, लोक कलाकारों की मदद की माँग को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन...
सुनील कुमार बता रहे हैं मुजफ्फरपुर बिहार में 10 जनवरी 2018 को राज्य की सांस्कृतिक नीति बनाने के माँग को लेकर एक दिवसीय धरना का आयोजन किया गया है जिसमे प्रत्येक विद्यालय में कला शिक्षक नियुक्ति की मांग, कला प्रदर्शन करने के लिए औडिटोरियम भवन फ्री करने की मांग, लोककला और लोक कलाकारो के लिए आयोग गठन, उनके लिए आर्थिक मदद, पेंशन, सरकारी प्रचार प्रसार के लिए लोक कलाकारो को जोड़ने आदि को लेकर एक दिवसीय धरना आयोजन किया गया है जिसमे वे सीजीनेट के सभी सुनने वाले सभी साथियों को वहां पर धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, कला और संस्कृति को बचाने के लिए ऐसे प्रयास और जगह भी किये जाने चाहिए | सुनील@9308571702
Posted on: Jan 04, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
हरी भजन ला तै नई जाने भईया रे...छत्तीसगढ़ी भजन -
ग्राम-छुलकारी, पोस्ट-पसला, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से लालू केवट अपने सांथी बेसाहूलाल केवट, गजरूप सिंह, मनबहोर केवट के सांथ एक भजन सुना रहे हैं :
हरी भजन ला तै नई जाने भईया रे – राम भजन ला तै नही जाने – ये जीवन नई आय कौनो काम के – सोंन नदी के तीरे हवए हमर गाँव गा – जिला अनूपपुर छुलकारी मोर गाँव गा – भजन गवैया और बैठे भजन सुनैया रे – हरी भजन ला तै नई जाने...
Posted on: Jan 04, 2018. Tags: LALLU KEWAT SONG VICTIMS REGISTER
माँ है तो ममता है, माँ नहीं तो वीरान...माँ पर कविता -
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी माँ से सम्बंधित एक कविता सुना रहे है:
माँ है तो ममता है माँ नहीं तो वीरान-
माँ में ममता न होता तो कैसे पलता संतान-
माँ प्रेम की दूकान है माँ ममता खान है-
माँ है तो संसार है नहीं तो सब शमशान है-
माँ का कोई पूजा करता माँ को कोई देता दुतकार-
माँ को जो पूजा करे उसका करता हूँ सत्कार-
जो माँ को माँ न समझे वही दुनिया में सबसे बड़ा बेकार...
Posted on: Jan 04, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
अरे गाँव छुल्कारी के रहया...छत्तीसगढ़ी भजन-
ग्राम-छुल्कारी, पोस्ट-पसला, जिला-अनुपपुर (म.प्र.) से लल्लूलाल केवट के साथ में भानुलाल केवट, वैभव सिंह एक छत्तीसगढ़ी भजन गीत सुना रहे है:
अरे गाँव छुल्कारी के रहया-
मानस रामायण के पढ़ेया भैया-
आये हन गा तुम्हारे गाँव म-
अरे हे भैया आये हन गा तुम्हारे गाँव मे-
नए पद जियत भर पुरसत काम के-
मर जा बे एक दिन गा ले हरी नाम के-
तर जाई तोला तोरे अपार-
अरे गाँव छुल्कारी के रहया...
Posted on: Jan 04, 2018. Tags: LALLULAL KEWAT SONG VICTIMS REGISTER
जब सावित्रीबाई फुले कन्याओं को पढ़ाने जाती थीं तो कट्टरपंथी हिन्दू उन पर गंदगी फैंका करते थे...
सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। महात्मा ज्योतिबा को महाराष्ट्र में सामाजिक सुधार आंदोलन में सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। ज्योतिराव, जो बाद में में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछात मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। वे एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदि कवियत्री के रूप में भी जाना जाता था। 1848 में पुणे में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की नौ छात्राओं के साथ उन्होंने एक विद्यालय की स्थापना की। एक वर्ष में सावित्रीबाई और महात्मा फुले पाँच नये विद्यालय खोलने में सफल हुए। तत्कालीन सरकार ने इन्हे सम्मानित भी किया। एक महिला प्रिंसिपल के लिये सन् 1848 में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना शायद आज भी नहीं की जा सकती। लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी। सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं, बल्कि दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया, वह भी पुणे जैसे शहर में। जब सावित्रीबाई कन्याओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में कट्टरपंथी हिन्दू उन पर गंदगी, कीचड़, गोबर, विष्ठा तक फैंका करते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साड़ी बदल लेती थीं।


