बेटा न होते बेटी मोरे अंगना में रहते वो...विवाह गीत -
ग्राम-हटका चारामा, ब्लाक-नरहरपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से शांति सोडी एक विवाह गीत सुना रही है:
बेटा न होते बेटी मोरे अंगना में रहते वो-
आज न ताऊ बेटी हो गए परदेशनन हो-
दाई दादा के नोनी बेटी कहलाये हो-
सास ससुर के नोनी बहु कहलादे हो-
जनर हो जनर वो मोरा नोनी दुलोहरिन-
शंकर हावे पारबती तोला मिले सुन्दर पति...
Posted on: Jan 05, 2018. Tags: SHANTI SODI SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : कौउहा और मदुरा के छाल के रस से घाव का इलाज -
सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-हटका चारामा, ब्लाक-नरहरपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां बाबूलाल नेटी की मुलाक़ात गांव के वैद्य से हुई है मनसा जी बता उन्हें रहे हैं किसी हथियार जैसे टंगिया या बसूला जिसका गाँव के लोग रोज़ अपने काम के लिए उपयोग करते हैं उससे कट जाने पर या किसी से भी चोट लगने पर कउहा की छाली या मदुरा की छाली को कुचल कर उसके रस को घाव पर 4 दिन तक लगातार लगाने से घाव ठीक हो सकता है, इसके लिए किसी दवाई की ज़रुरत नहीं है. इस तरह से वे बता रहे हैं कि वनो में निवास करने वाले आदिवासी अलग-अलग तरीके से वन की मदद से ही अपना इलाज करते आ रहे हैं |
Posted on: Jan 05, 2018. Tags: BABULAL NETI SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
सरहद पर शहीद होने वालो के नाम...देशभक्ति कविता -
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे है:
सरहद पर शहीद होने वालो के नाम-
हर रोज एक दीप जलाना-
शहीदों के नाम पर जो भला लगे-
एक गीत दिल से गुनगुना लेना-
भूल न जाना उन शहीदों को-
देश के खातिर जो दी बलिदानी-
हंस-हंसकर इन्होने तुफानो में भी-
जान को कुर्बान कर फहरा दी-
चट्टान बनकर सब कुछ झेले-
देश के खातिर अपना बलिदानी दी-
मरते दम तक अपना साहस न छोड़े-
अपना तन मन सब कुछ लूटा दी...
Posted on: Jan 05, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
शुसुलतानी हिरोंदी मुंदी हो डारा पाना में सुधारों...ददरिया गीत -
ग्राम-रानी डोंगरी, ब्लाक-चारामा, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से केजई बाई एक ददरिया गीत सुना रही है:
शुसुलतानी हिरोंदी मुंदी हो-
डारा पाना में सुधारों-
जवानी चुन्दी हो रचा-
सांस गारी देते ससुरा सन्याती-
नन्द मुंहजोरी देवर बाबु मोर-
सैयामा रेलाती लाठी ला-
कौना झोके परोसनी यारो लेते...
Posted on: Jan 05, 2018. Tags: KEJAI BAI SONG VICTIMS REGISTER
सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस पर: विधवा-विवाह, फुले दम्पति और डा. यशवंत की सेवा, शहादत...
सुबह-सुबह एक सुन्दर युवती नदी में कूद पड़ी. फुले तट पर टहल रहे थे. नदी की तेज धारा में डूबती-उतराती उस युवती को फुले ने देख लिया बचाने के लिए फ़ौरन नदी में कूदकर उसे किनारे पर ले आये. सर मुड़ाई उस युवती को देखकर फुले समझ चुके थे कि वह विधवा है. पूछने पर पता चला कि वह पास ही के गांव की एक ब्राह्मणी है, उसके पेट में छ: महीने का बच्चा पल रहा है. लोग उसे मार देना चाहते हैं, इसलिए वह अब जीना नहीं चाहती. फुले ने उसे समझाया, ढाढस दिया और जबरन घर ले आए. रोती हुई उस स्त्री को सावित्रीबाई ने गले लगा लिया. फुले दम्पति ने उसी समय निर्णय ले लिया कि वे न केवल विधवा आश्रम खोलेंगे, बल्कि गर्भवती विधवाओं के प्रसव भी कराएँगे. जिस पर पूरे महाराष्ट्र में उनका विरोध हुआ, मगर कम्पनी सरकार की मदद से फुले का बाल बांका नहीं हुआ. उसी युवती की देख-रेख में फुले ने देश का पहला विधवा आश्रम खोला, जिसमें आस-पास की पीड़ित बाल-विधवाएं रहने लगीं. फिर पूणे सहित पूरे महाराष्ट्र में अनेक विधवा आश्रम खुले. अन्यों सहित ब्राह्मणों का भी साथ मिलने लगा.
कुछ दिनों बाद उस विधवा युवती से एक प्यारा-सा बच्चा पैदा हुआ. जिसे फुले दम्पती ने बड़े प्यार से पाला-पोसा. उसे पढ़ा-लिखाकर डाक्टर बनाया. संयोग से फुले दम्पती को कोई संतान नहीं हुई. इसलिए फुले ने उसी लड़के को अपना धर्म-पुत्र माना. यही बालक प्रसिद्ध चिकित्सक डा. यशवंत बना, जिसे फुले दम्पती ने अपनी पूरी सम्पति दे दी, सावित्रीबाई फुले के बाद फुले ट्रस्ट के मालिक डा. यशवंत ही हुए. फुले के भतीजों की एक न चली. ब्रिटिश सरकार में डा. यशवंत की बड़ी इज्जत थी. यशवंत प्लेग रोगियों की सेवा करते-करते चल बसे |


