आदिवासी समुदाय महुआ के फूल को अपना राष्ट्रीय फूल मानते हैं, यह उनके जीवन से जुड़ा हुआ है...
वीरेंद्र सिंह मरावी महुआ के पेड़ से मिलने वाले लाभ के बारे में बता रहे है, वे बता रहे हैं कि महुआ के फूल को आदिवासी अपना राष्ट्रीय फूल मानते है इसकी खुशबू सालो साल तक यथावत बनी रहती है इसके फूल को दो मिनिट पानी में भिगोने पर यह ऐसे दिखाई देता है जैसा ताज़ा फूल हो.आदिवासियों के जीवन और जीविका से यह सीधा जुड़ा है, आदिवासी समुदाय प्रकृति पर निर्भर है जल जंगल जमीन से उनका सीधा जुड़ाव है, वे आगे कह रहे हैं कि अगर जंगल से या वनोपज से आदिवासी समुदाय को दूर कर दिया जाए तो आदिवासी समुदाय का जिन्दा रहना मुश्किल हो जायेगा, महुआ से लोग खाने में लाटा, हलुआ, और बिस्किट भी बनाते है है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत लाभदायक है.
Posted on: Apr 03, 2017. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA SINGH MARAVI
पुनः नकल करे खूब प्रचार दरपर लड़का चाहे जाए...बघेली हास्य कविता
जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से अनिल तिवारी बघेली भाषा में एक हास्य कविता सुना रहे हैं :
पुनः नकल करे खूब प्रचार दरपर लड़का चाहे जाए-
काहे के तोरी पास कराऊँ चाहे कोनो विधि अपनाऊँ
यह नकल हम खूब कराऊँ कुछ ले देके कापी बनवाऊं-
और इता में जो पास न होवे पुनः मूल्यांकन फॉर्म भरवाऊँ-
लड़का कुछ तो रहे है सीधी कुछ रहे सपना-
और कुछ रहे बिहार और पटना-
कुछ तो रहे बिना ददुवा के दादा...
Posted on: Jan 15, 2017. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA KUMAR
एक साथ सब मिलकर बोलो-भारत जोड़ो, भारत जोड़ो...कविता
वीरेन्द्र गन्धर्व राजनांदगांव छत्तीसगढ़ से एक कविता सुना रहे हैं:
गोरो ने किया प्रस्थान-
चल सफल अभियान हुआ-
भारत छोड़ो-
अब सुनो श्रीमान-
कहो अब भारत जोड़ो-
आपस में क्यों अनबन है-
हम एक दूजे के दुश्मन है-
नशे से दूषित हुआ समाज-
माँ बहनो की लूटती लाज-
बच्चे क्यों नहीं सुरक्षित आज-
खतरे में हैं दलितो की जान-
सब का बनेगा हिन्दूस्तान-
भेद भाव के जंज़ीरो को सब मिल के तोड़ो-
एक साथ सब मिलकर बोलो-
भारत जोड़ो, भारत जोड़ो...
Posted on: Nov 06, 2016. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
जाके पूछ अपने बाप से, क्या मिलता है शराब से... नशाविरोधी गीत
जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र गन्धर्व एक नशा विरोधी गीत सुना रहे हैं:
जाके पूछ अपने बाप से-
क्या मिलता है शराब से-
जितना कमाते हो रोज तुम-
कर देते हो इसमें रोज गुम-
तुने दूर किया मुझको किताब से-
क्या मिलता हैं...
खाने के लाले पड़े हैं-
सामने कर्ज वाले खड़े हैं-
सवाल कभी पूछ अपने आप से-
क्या मिलता हैं...
Posted on: Aug 26, 2016. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
हिन्दू मांगे आजादी ,मुस्लिम मांगे आजादी... आजादी दिवस गीत
वीरेन्द्र गन्धर्व जिला-राजनंदगांव (छत्तीसगढ़) से आजादी दिवस पर गीत सुना रहें हैं:
हिन्दू मांगे आजादी, मुस्लिम मांगे आजादी-
सिख मांगे आजादी ईसाई माँगे आजादी-
आजादी आजादी...
सबने माँगी आजादी तभी मिली आजादी-
बचपन की थी कुर्बानी-
संघर्षो से डरे नहीं दे दी अपनी जिन्दगानी-
लो सम्हालों आजादी देखो भालो आजादी-
सबके मन में जीवन में मिलकर डालो आजादी...
