सीजीनेट के नंबर माँ हमन बोलबो संगी ना...छत्तीसगढ़ी गीत

साथी गोकरण सिंह वर्मा जी एक छत्तीसगढ़ी गीत गा रहे हैं. गीत गाँव के मजदूरों-किसानों के ऊपर है, जिनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है. वेकहते हैं सीजीनेट उनकी आवाज़ उठाने के लिए आया है. हम सब मिलकर कैसे गाँव को समस्या मुक्त बना सकते हैं, इसी सन्दर्भ में ये गीत है. गीत कर्मा की तर्ज पर है...
काबर मार डारे रे बैरी हमला
गरीबी भुखमरी माँ मार डारे
मनरेगा मा करे हन काम,पैसा मिलत नई ये
कउनो नेता भी हमार दुखड़ा, सुनत नई ए
ये सुनत नईयेगा मोर भइया
गरीबी भुखमरी मा मार डारे
कबर मार डारे रे.......
गरीबा मजदूर साथीमन, सब आगे आवा
सीजीनेट कहत है संगी, अधिकार पावा
ये अधिकार पावेगा मोर भइया
गरीबी भुखमरी मा मार डारे
काबर मार डारे.......
सीजीनेट के धरे हन, पाछू जी
एमा हमन बोलबो संगी रइबोगा, आगो जी
रइबोगा आगो जी बाबू, मोर भइया
गरीबी भुखमरी मा मार डारे
कबर मार डारे रे.....
सीजीनेट के नंबर माँ हमन बोलबो संगी ना
अधिकारी कर्मचारी मनला सुनाबो संगी ना
ये सुनाबो ना, मोर भइया
गरीबी भुखमरी मा मार डारे
काबर मार डारे रे.....
ये सीजीनेट कहाथेगा कहना मानो जी
औ कौन घूसखोरी करथे संगी, तेला पहिचानो संगी
तेला पहिचानोगा, मोर भइया
गरीबी भुखमरी मा, मार डारे
कबर मार डारे रे बैरी हमला,
गरीबी भुखमरी मा, मार डारे.
काबर मार डारे रे.....

Posted on: Jun 19, 2014. Tags: Gokaran Verma SONG VICTIMS REGISTER

बेड़ा कइसे पार होहि रे, जिनगी के...एक छत्तीसगढ़ी गीत

साथी गोकरण सिंह वर्मा एक छत्तीसगढ़ी गीत गा रहे हैं. गीत का सन्दर्भ ये है कि आज समाज से अच्छे लोग गायब हो रहे हैं. ऐसे में समाज कैसे आगे बढेगा. अंतिम आदमी की सुध कौन लेगा, कौन इसे रास्ता दिखाएगा...
बेड़ा कइसे पार होहि रे, जिनगी के
बेड़ा कइसे पार होहि ना
नइया मझधार मा, नहीं है खेवइया
जेल पतवार संउपे, अपने देखइया
अउकोनो सवार होहि रे
बेड़ा कइसे.......
जाति-पाति, भाषा में, बंट गे सबो जन
बन गे हे भाई हा, भाई के दुश्मन
एमा कब सुधार होहि रे
बेड़ा कइसे........
संझा अउ बिहनिया चले गोली-आंधी
हँसत दुश्मन, रोवत गांधी
कइसे संसार होहि रे
बेड़ा कइसे........
सच के बोलइया हा हाट माँ बेचावत है
छल के करइया हा हवा में उड़ावत हे
कइसे उजियार होहि रे
बेड़ा कइसे.......

Posted on: Jun 17, 2014. Tags: Gokaran Verma SONG VICTIMS REGISTER

मांझी रे...मांझी रे...एक ओड़िया गीत

गोकरण सिंह वर्मा, ग्राम- बडब्राम्हणी वाया विजयपुर, जिला-बरगढ़, उड़ीसा के अजीत कुमार का एक ओडिया गीत रिकार्ड करवा रहे हैं।साथी ने बताया कि ये गीत विकास के नाम पर हो रहे जमीन अधिग्रहण,विस्थापन इत्यादि के संदर्भ में आम आदमी कैसे अधीर है इस बारे में है:
मांझी रे...मांझी रे...
जनम मतिरा चउदी गेया जी
बहेओड़ो चसबा हो बहेओड़ो चसबा
विकास वोता को माडिया तिलाड़ी
किये जा अच्छी रे सा
हइया हइया हो, हइया हइया हो
नदीरा आछी रे नताकर धारा
पहाड़ छाती रे नीया हो
किए बा शहर,किए बा हो
विकास करे के निया
कांदे खोंडा धारा हो कांदे नागा बोरी
कांदे मोहनदी नियम गीरी
कोटी कोटी जीव कोटीये जीविका
विकास बोल्दी से काहा हो
हइया हइया हो, हइया हइया हो

Posted on: Jun 16, 2014. Tags: Gokaran Verma SONG VICTIMS REGISTER

बोल-बोल-बोल भइया, मोबाइल पर बोल...एक गीत

ज़न पत्रकारिता यात्रा से गोकरण सिंह वर्मा जी सीजीनेट पर आधारित एक गीत गा रहे हैं, गीत के बोल हैं – बोल-बोल-बोल भइया, मोबाइल पर बोल
मोबाइल पर बोल भइया, सीजीनेट पर बोल
मोबाइल पर बोल भइया, सीजी स्वर पर बोल
बोल-बोल-बोल.........
नया संदेशा आया है, सीजीनेट आया है
जागो-उठो-देखो भइया समय है अनमोल
बोल-बोल-बोल .........
आदिवासी स्वर में, समस्या बताना है
देश दुनिया वालों को, अपनी आवाज़ सुनाना है
मोबाइल वाले एक होकर, गांव की बातें बोल-2
बोल-बोल-बोल .........
स्वास्थ्य स्वर के नंबर से, अपनी बीमारी बताना है
जड़ी-बूटी के माध्यम से, रोगों का इलाज कराना है
युवा शक्ति एक होकर, स्वास्थ्य स्वर में बोल-2
बोल-बोल-बोल .........
जल-जंगल भइ और ज़मीन, ये हो जनता के अधीन
एक तो मालामाल न होगा, एक न होगा नौकर दीन
महिला शक्ति एक होकर ज़िंदाबाद बोल
जागो-उठो-देखो भइया, समय है अनमोल
बोल-बोल-बोल .........
कमाने वाला खाएगा, लूटने वाला जाएगा
नया ज़माना आएगा, गांव की आवाज़ उठाएगा
गाँव की शक्ति एक होकर, मोबाइल पर बोल
बोल-बोल-बोल.........

Posted on: Jun 14, 2014. Tags: Gokaran Verma SONG VICTIMS REGISTER

दारू झन पीबे रे संगवारी...छत्तीसगढ़ी नशामुक्ति गीत

इस गीत में दारू नहीं पीने का सन्देश दिया है क्योंकि दारू पीने से आदमी जवानी में बूढा दिखता है और बीमारी लग जाती है, बाल बच्चे भूखे मरते हैं और पूरी सम्पत्ति बिक जाती है फिर भी कोई सुख नहीं मिलता है:
लोग लइका के छेबहू नइखे
दारू झन पीबे रे संगवारी
भरी जवानी माँ बुढवा दीखता
तन म लागे बीमारी
लागे हा बतोला रे बीमारी
लोगाई लइका तोरा भूखा मरे है
खेती खार बिचागे दहेज़ के रूपया पैसा
सब गहना जेवर खागे
होगे तू जिंदगी भर भिखारी
जिन्हा खेत म लात मारे
और रखे सो खेती के
बड़ी मुश्किल माँ पाव तुमना
तहां जिन्दगी भर लाचारी

Posted on: May 30, 2014. Tags: Gokaran Verma SONG VICTIMS REGISTER

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