1965 तक 1 लाख 10 हजार प्रकार में से आज देश में धान की 3-4 हज़ार प्रजातियां ही बची हैं...

मंडला (मध्यप्रदेश) से जगदीश बीज बचाओ, कृषि बचाओ यात्रा से बोल रहे हैं यह यात्रा ५५ दिवसीय है और मध्यप्रदेश के ३५ जिलो में जाएगी। यात्रा का मकसद पारम्परिक बीजो को बचाना है उनके साथी बाबूलाल दहिया बता रहे हैं कि १९६५ तक देश में १ लाख १० हजार धान के बीजो के प्रकार थे उसमे से अभी देश में मात्र ३ से ४ हजार किस्मे ही बची है अगर इन्हें जल्द ही नही बचाया गया तो कुछ सालों में यह भी खत्म हो जाएगी. इस यात्रा का मकसद यही है कि जो देसी बीज बचे है उन्हें बचाया जाए जैसे लाल धान, कोदो, कुटकी, सवा, रागी, धान, कंगनी, कुटकी, मकई, ज्वार, बाजरा. बाबूलाल दहिया जी ने एक सौ दस किस्म की धान बचाकर रखी है, इस काम को आगे बढ़ाने की ज़रुरत है जगदीश@7697448583

Posted on: May 14, 2017. Tags: JAGDISH SONG VICTIMS REGISTER

मातृ देवो भव : माताओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए मदर्स डे 1908 से मनाया जा रहा है...

मातृ देवो भव : मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार मातृत्व दिवस पर बात कर रहे है वह बता रहे है कि माँ का क़र्ज़ कभी भी संतान नही चुका सकती है, इस दिवस से जुड़े पहलुओं पर बताने चाहते है, छात्रा केथरीन द्वारा शोध करते हुए एक माँ ऐना के बारे में जाना कि अपनी माँ के त्यागपूर्ण जीवन को अहसास बनाए रखने के लिए ऐना ने मदर्स डे मनाने की अवधारणा को जन्म दिया उन्होंने गवर्नर आदि कई प्रमुखों को पत्र लिखा कि माताएं अपने बच्चों को जन्म देते समय जो कष्ट झेलती है, उन्हें सुयोग्य नागरिक बनाने के लिए प्रयतनशील रहती है और उसके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए मदर्स डे मनाना चाहिए | सुनील@9308571702

Posted on: May 14, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

अमवाँ महुअवा के झूमे डलिया...झूमर विवाह गीत

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार, झूमर विवाह गीत सुना रहे हैं :
अमवाँ महुअवा के झूमे डलिया-
तनी ताक न बलम वा हमार ओरिया-
अमवा मोजर गईले महुआ कोचाई गईले-
रसवा से भरी गईले फूल डरिया-
तनी ताक न बलमुआ हमार ओरिया-
महुआ बिनन हम गईली महुआ बगिया-
रहिया जे छेकले देवर पपिया-
तनी ताक न बलमुआ हमार ओरिया-
कोयली के बोली सुनी मन बऊराई गईले-
नाही अईले हमरो बलम रसिया-
तनी ताक न बलमुआ हमार ओरिया...

Posted on: May 14, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

चला गौरी तोहका, बजरिया घुमाय दे...बघेली गीत

ग्राम-पाली, पोस्ट-जामुह, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से शिव कुमार द्विवेदी बघेलखंडी भाषा में एक गीत सुना रहे है :
चला गौरी तोहका, बजरिया घुमाय दे-
घुमत बनिना तो, घुमत बताई दे-
हार बनवाई दे, चेन दिलवाई दे-
पहिनत बनिना तो, पहिन के बताई दे-
चला गौरी तोहका, बजरिया घुमाय दे-
होटल देखाई दे, बजरिया घुमाय दे-
चुनरी देवाई दे, साड़ी देवाई दे...

Posted on: May 14, 2017. Tags: SHIVKUMAR DWIVEDI SONG VICTIMS REGISTER

ये खवाहूँ रे बड़ादेव दोना-दोना महुआ लाटा...पारंपरिक गीत

ग्राम-टांकी, पोस्ट-मलगा, तहसील-कोतमा, जिला-अनूपपुर (म.प्र.) से नरेश सिंह छत्तीसगढ़ी भाषा में एक पारम्परिक गीत सुना रहे हैं :
ये खवाहूँ रे बड़ा देव दोना-दोना महुआ लाटा-
भक्ति मोर ले-ले शक्ति तोर दे-दे हाथों मैंहौं छाटा-
मादर,टिमकी,गोदमा बड़ादेव नगारा बजाहौं – झुमर-झुमर,उचट-उचट बड़ादेव नाचा दिखाहौं-
दिखाऊ रे बड़ादेव कोया कोय्तूरण के नाचा-
सुआ,करमा,ददरिया बड़ादेव रीना सुनाहौं-
सरसेट्टी,लहकी,उचट्टा बड़ादेव में गाना सुनाहौं – कोया मुरीद में बड़ादेव नावला जगा दे मोर-
ज्ञान-बुद्धि के पिटारा ले बड़ादेव मन्त्र ला दे-दे तोर-
ये बनाहूँ रे बड़ादेव कोया कोयांतूरण के गाथा-
ये खवाहूँ रे बड़ादेव दोना-दोना महुआ लाटा...

Posted on: May 14, 2017. Tags: NARESH SINGH SONG VICTIMS REGISTER

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