भैया-भैया सुना-सुना साहब जी...छत्तीसगढ़ी में सीजीनेट गीत
विष्णु कुमार भैना ग्राम-नेवरी नवापारा, थाना-गौरेला, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से सीजीनेट के बारे में चातीसगढ़ी भाषा में एक गीत सुना रहे हैं:
भैया-भैया सुना-सुना साहब जी-
देखा न कोन आये है नेवारी गांव मा-
और बतावथे सीजीनेट के बारे मा-
अरें आ गए है सीजीनेट देखा-
करा तुम शिकायत गा...
Posted on: Feb 09, 2018. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VISHNU KUMAR BHAINA
मन मोर गाए हो श्यामा बजावत वीड़ा...गीत
संजय कुमार कुशवाहा ग्राम-करौंदिहा, धरम सुरलीपारा, तहसील-वाड्रफ नगर,
जिला-बलरामपुर, रामानुजगंज (छत्तीसगढ़) से एक गीत सुना रहे हैं :
मन मोर गाए हो श्यामा बजावत वीड़ा – हरे कृष्णा बजावत बीड़ा – मन मोर गाए हो श्यामा बजावत वीड़ा – हरे कृष्णा बजावत बीड़ा...
Posted on: Feb 07, 2018. Tags: SANJAY KUMAR KUSWAHA SONG VICTIMS REGISTER
सीजीनेट में रिकार्ड करने के बाद अधिकारी आए पर हमारा दिव्यांग पेंशन अब तक नहीं मिला...
ग्राम-करजाव्, पोस्ट-करजी, थाना-चयनपुर, जिला-कैमूर (बिहार) से राकेश कुमार बता रहे है कि उन्होंने 2017 में पेंशन नहीं मिलने के सम्बन्ध में समस्या रिकॉर्ड किया था और रिकॉर्ड होने के बाद कार्यवाही तो की गई कई-कई दिन बैंक का पासबुक मंगवाया गया है और बोलते है काम हो गया है जबकि उनका पेंशन अभी तक नहीं मिला है इसलिए साथी सीजीनेट सुनने वाले साथियों से मदद की अपील कर रहे है कि इन अधिकरियो से बात करके उनका पेंशन दिलवाने में मदद करें: DM@9431031500, SDM@9473191229, पेंशन अधिकारी@9472038520, BDO@9431818060, मैडम@7739591656. राकेश कुमार@9871639769.
Posted on: Feb 07, 2018. Tags: RAKESH KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
गोल-गोल लाल पियर पात के ऊपर बड़ा रसदार... मुजफ्फरपुर के लीची पर गीत
सुनील कुमार मुजफ्फरपुर (बिहार) से लीची फल पर एक गीत गए रहे हैं:
गोल-गोल लाल पियर पात के ऊपर बड़ा रसदार-
मुजफ्फरपुर के लीचिया खिलहिया मोरे यार-
बैशाख जेठ में मिले गूदा के ऊपर छिलके पतले खाए ये रसदार-
मुजफ्फरपुर के...
शाही के बा आया माजा चैना नियन कोई न दूजा-
थोही के डिंड के लाहो फल रसदार-
मुजफ्फरपुर के...
Posted on: Feb 07, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
सूर्य कहां एक तारा टूटा, क्या जाने वह किसने लूटा...कविता
ग्रामसभा, मोहल्लासभा, अभियानसभा, सांस्कृतिक मंच, मुजफ्फरपुर (बिहार) से रौशनी कुमारी एक कविता सुना रही हैं :
सूर्य कहां एक तारा टूटा, क्या जाने वह किसने लूटा – छत पे कहीं नही था भाई, नही सड़क पे दिया दिखाई – कास अगर मिल जाता तो आलमारी उसे सजाता – सुबह साम मै देख करता जगमग जगमग करता रहता...
