हमारे पारे का हैण्डपम्प 2 साल से ख़राब है हम आधे किलोमीटर से पानी लाते हैं कृपया मदद करें...
वार्ड 10 ग्राम-गौरा, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रामसाय, प्रेमकुमार, कौश्लिया, सुखमन बता रहे है कि उनके गाँव का नलकूप 2 साल से ख़राब है उसके कारण वे लोग आधा किलोमीटर दूर से पानी लाकर पीते है और उनके मोहल्ले में 10 घर की बस्ती है | हैण्डपम्प को सुधरवाने के लिए उन्होंने कई बार सरपंच सचिव के पास शिकायत किये है तो कहते है बन जायेगा लेकिन अभी तक नहीं बना है इसलिए साथी सीजीनेट सुनने वाले साथियों से मदद के लिए निवेदन कर रहे है कि इन नम्बरों में बात कर हैण्डपम्प सुधरवाने में मदद करें: PHE विभाग@8120171919, कलेक्टर@07775266117, इंजीनियर@9425934247. अधिक जानकारी के लिए संपर्क@8463028724. धनसाय मरावी@7354620356.
Posted on: Feb 12, 2018. Tags: RAMSAAY PREMKUMAR SONG VICTIMS REGISTER
तोता दिया हुंकारा अमर कथा न सुनी हुमाऊ सोच रहे हुंकारा...गीत
मनोज कुमार कुशवाहा, ग्राम-राजापुर, पोस्ट-लड़वारी, जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से एक गीत सुना रहे हैं :
तोता दिया हुंकारा अमर कथा न सुनी हुमाऊ सोच रहे हुंकारा – अविनाशी कैलाशी काशी अपनी अलग बसाई थी – बैठ गुफा में गौर जी को अमर कथा सुनाई थी – आज यहाँ पर कोन तीसरा गोंगा जी जन आया है – चीरा करोली से शंकर जी को कर त्रिशूल उठाया है – आगे तोता पीछे शिवजी तीन लोक में बागे है...
Posted on: Feb 11, 2018. Tags: MANOJ KUMAR KUSWAHA SONG VICTIMS REGISTER
जगमग दीया जल उठे द्वार-द्वार चमकी दिवाली...गीत
विवेक कुमार अहिरवार, ग्राम सरईमाल, पोस्ट-चांदवानी, जिला-डिंडोरी (म.प्र.) से एक गीत सुना रहे है:
जगमग दीया जल उठे-
द्वार-द्वार चमकी दिवाली-
खीर बतासा बांट रहे है-
अम्मा सबको भर-भर थाली-
झूम-झूम के हँसते गाते-
दौड़-दौडकर दीप जलाते-
सबको फुलजड़ी खिलौने-
बच्चे बाजारों से लाते...
Posted on: Feb 11, 2018. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VIVEK KUMAR AHIRWAR
जिन्दगी का एक और वर्ष कम हो चला...रचना
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार नए वर्ष की बधाई देते हुए संतोना भारती की एक रचना सुना रहे हैं:
जिन्दगी का एक और वर्ष कम हो चला-
कुछ पुरानी यादें पीछे छोड़ चला-
कुछ ख्वाइशें दिल में रह जाती है-
कुछ बिन मांगे मिल जाती हैं-
कुछ छोड़ कर चले गये-
कुछ नये जुड़ेंगे इस सफर में-
कुछ मुझसे बहुत खफा हैं-
कुछ मुझसे बहुत खुश हैं-
कुछ मुझे मिल के भूल गये-
कुछ मुझे आज भी याद करते हैं-
कुछ शायद अनजान हैं-
कुछ बहुत परेशान हैं-
कुछ को मेरा इंतजार हैं-
कुछ का मुझे इंतजार है-
कुछ सही है कुछ गलत भी है-
कोई गलती तो माफ कीजिये-
कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिये...
Posted on: Feb 10, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी...कविता
जिला डिंडोरी मध्यप्रदेश से संतोष कुमार अहिरवार एक कविता सुना रहे हैं :
सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी – बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी – गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी – दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी – चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी – बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी – खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी...
