मोला ले चल सईया रंगीला तै हर देवी झरिया के धाम...भजन
ग्राम-भेलकच्छ, थाना-रमकोला, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से अजय एक भजन गीत सुना रहे हैं :
मोला ले चल सईया रंगीला तै हर देवी झरिया के धाम – तोला ले जाहूं संगवारी मै हर देवी झरिया के धाम – रास्ता ला मै देखे नई हो कैसे मै हर जाहूं – रास्ता ला मै देखे हवों चल ना तोला ले जाहूं – देवी शहर में हो दाई करनी परत हो मै तोर पाँव – बोंगा बडवार घुई रमकोला फिर हवे देवी झरिया...
Posted on: Feb 07, 2018. Tags: AJAY BHELKACH SONG VICTIMS REGISTER
रामनाम अनमोल है जी डोंगन बिना निषाद...भजन गीत
ग्राम-रक्सा, पोस्ट-फुनगा, विकासखंड-जेतहरी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से गणेश सिंह अय्याम सामूहिक संगीतमय गीत सुना रहे हैं :
रामनाम अनमोल है जी डोंगन बिना निषाद – तुलसी ऐसे दास हैं ग्राहक नाटेरा – करथन खेती किसानी – धरती के बेटा किसान रे मै करथों खेती किसानी –
गीता रामायण के वानी मोर गंगा जमुन के पानी –
मोर धरती के बेटा किसान रे मै करथो...
Posted on: Feb 07, 2018. Tags: GANESH SINGH AYAAM SONG VICTIMS REGISTER
मध्यप्रदेश में विनियमिति प्रक्रिया के कारण स्थाई सरकारी कर्मचारी परेशान, मदद की अपील...
रीवा (मध्यप्रदेश) से केशव प्रसाद पाण्डेय बता रहे हैं कि 7 अक्टूबर 2016 को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारियों को विनियमित करने का एक आदेश जारी किया गया था उसी आदेश के दूसरे भाग में नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी लिखा है विनियमित तो कर दिया गया है लेकिन इसमें वेतन में विसंगति को अभी तक सही नहीं किया गया है सांथ ही सुविधा से वंचित रखा जा रहा है इसलिए वे सीजीनेट के सभी सुनने वाले सांथियो से निवेदन कर रहे हैं कि दिए गए नंबरो पर बात कर निवेदन करे जिससे इन कर्मचारियों को शासन की सुविधाओं का लाभ मिल सके| कार्यपालन अधिकारी@9424922624 अधीक्षण अभियंता@9425109993.केशव पांडे@9685649001.
Posted on: Feb 07, 2018. Tags: KESHAV PRASAD PANDEY SONG VICTIMS REGISTER
माता मई हर वाली सजे हवे लाली चुनरी...देवी गीत
ग्राम-झुजावल, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से सीता रानी नेटी एक देवी गीत सुना रहें है:
माता मई हर वाली सजे हवे लाली चुनरी-
सोने के हार दाई रे-
काने बाली दाई बर ला-
देहु अ दाई बर ला देहु – सर्हो सिगार दाई रे...
Posted on: Feb 07, 2018. Tags: SEETA RANI NETI SONG VICTIMS REGISTER
अगर पेड़ भी चलते होते कितने मजे हमारे होते...बाल कविता
ग्राम-तेलम्मा, पंचायत-भेजा, जिला-उत्तर बस्तर, कांकेर (छत्तीसगढ़) से नरोत्तम नुरेटी, ऋचा नेताम और शैलेन्द्र कुमार यादव एक कविता सुना रहे हैं :
अगर पेड़ भी चलते होते कितने मजे हमारे होते – बांध तने ने उसकी रस्सी जहाँ कहीं भी हम चल जाते – अगर अचानक धूप सताती उसके नीचे हम छिप जाते – अगर अचानक भूख सताती तोड़ मधुर फल उसके खाते – अगर अचानक बाढ़ कहीं तो कीचड आती झट ऊपर हम चढ़ जाते...

