चलना सिखा दिया है, गलना सिखा दिया है, घनघोर आंधियो में जलना सिखा दिया है...गीत
ग्राम-कुटेला, ब्लाक-चारामा, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से गीतेश्वर पटेल और विंग कुमार पटेल एक गीत सुना रहे है:
चलना सिखा दिया है, गलना सिखा दिया है-
घनघोर आंधियो में जलना सिखा दिया है-
हमको मिला हुआ है देव का महाबल-
माँ ने हमे दिया है अपना उमित आंचल-
इसे क्या देखे सारे ढलना सिखा दिया है-
सुख दुःख यहाँ है दोनों मैदान और दल-दल...
Posted on: Feb 16, 2018. Tags: GEETESHWAR PATELAND VING KUMAR PATEL SONG VICTIMS REGISTER
दर्द आखिर तक छिपाया तुम करो, हौसले भी आजमाया तुम करो...गजल गीत
जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) मालीघाट से सुनील कुमार एक गजल सुना रहे हैं:
दर्द आखिर तक छिपाया तुम करो, हौसले भी आजमाया तुम करो-
जिन्दगी की रौनक बदल जाएगी यु कभी खुद को हंसाया तुम करो-
गम जदा को यू लुभाना पलक में मुस्कान दिल का खुदाया तुम करो-
चाँद जैसे यू डुबो दे इश्क में दिलों को सजाया तुम करो-
राहें गुजर जाएगी बगल से राज नीशा यू डिहाया तुम करो...
Posted on: Feb 16, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
अरे हीरा हस दहियां गंवाया हो...नशा विरोधी गीत
मध्यप्रदेश के जिला-सीधी, पोस्ट-लुरघुटी, ग्राम-ददरी से मनोज कुमार एक नशा विरोधी गीत सुना रहे हैं:
अरे हीरा हस दहियां गंवाया हो-
दारू गांजा पीके-
लड़का-लड़की बिहावन को हो गई-
रो-रो करी घरवाली हो-दारु गांजा पीके...
Posted on: Feb 16, 2018. Tags: MANOJ KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य में अब दोगुने, 24 की जगह 50 लघु वन उत्पाद आदिवासी से खरीदेगी...
सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य में अब दोगुने वन उत्पाद खरीदेगी। इस कदम से भारत भर में 5 करोड़ आदिवासियों को लाभ पहुंच सकता है, यदि बाजार मूल्य नीचे से गिरता है, तो राज्य सरकारें गांव के हाट और मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए आगे बढ़ेगी। इसके बाद उन्हें बाजार में कीमतों में वृद्धि होने पर बेच दिया जाता है। राज्य सरकारों द्वारा किसी भी हानि के मामले में 75% भुगतान केंद्र सरकार और 25% हानि राज्य सरकार वहन करेगा:
https://economictimes.indiatimes.com/news/economy/policy/centre-to-double-minor-forest-produce-numbers-for-a-guaranteed-msp/articleshow/62781811.cms
Posted on: Feb 15, 2018. Tags: RAKESH KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
दोस्त अब थकने लगे हैं, किसी का पेट निकल आया है, किसी के बाल पकने लगे हैं...कविता
मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
दोस्त अब थकने लगे हैं किसी का पेट निकल आया है किसी के बाल पकने लगे हैं-
सब पर भारी जिम्मेदारी है सबको छोटी-मोटी कोई बीमारी है-
दिन भर जो भागते दौड़ते थे वो अब चलते-चलते रुकने लगे हैं-
पर ये हकीकत है सब दोस्त थकने लगे हैं-
किसी को लोन की फ़िक्र है किसी को हेल्थ टेस्ट का जिक्र है-
फुर्सत की सबको कमी है आँखों में अजीब सी नमी है-
कल प्यार के ख़त लिखते थे आज बीमें के फार्म भरने लगे है...


