पैसा पास होता तो चार चने लाते...बाल कविता
केंद्रीय विद्यालय जिला-डिंडोरी,(मध्यप्रदेश) से योगेश वरमे एक कविता सुना रहे हैं :
पैसा पास होता तो चार चने लाते-
चार में से एक चना तोते को खिलाते-
तोते को खिलाते तो वो टाँय-टाँय टिक करता-
टाँय-टाँय करता तो बड़ा मजा आता-
पैसा पास होता तो चार चने लाते
चार में से एक चना घोड़े को खिलाते-
घोड़े को खिलाते तो वो पीठ में बैठाता-
पीठ में बैठाता तो बड़ा मजा आता-
पैसा पास होता तो चार चने लाते-
चार में से एक चना चूहे को खिलाते-
चूहे को खिलाते तो दांत टूट जाता-
दांत टूट जाता तो बड़ा मजा आता...
Posted on: Feb 07, 2018. Tags: SONG VICTIMS REGISTER YOGESH VARME
गोल-गोल लाल पियर पात के ऊपर बड़ा रसदार... मुजफ्फरपुर के लीची पर गीत
सुनील कुमार मुजफ्फरपुर (बिहार) से लीची फल पर एक गीत गए रहे हैं:
गोल-गोल लाल पियर पात के ऊपर बड़ा रसदार-
मुजफ्फरपुर के लीचिया खिलहिया मोरे यार-
बैशाख जेठ में मिले गूदा के ऊपर छिलके पतले खाए ये रसदार-
मुजफ्फरपुर के...
शाही के बा आया माजा चैना नियन कोई न दूजा-
थोही के डिंड के लाहो फल रसदार-
मुजफ्फरपुर के...
Posted on: Feb 07, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
सूर्य कहां एक तारा टूटा, क्या जाने वह किसने लूटा...कविता
ग्रामसभा, मोहल्लासभा, अभियानसभा, सांस्कृतिक मंच, मुजफ्फरपुर (बिहार) से रौशनी कुमारी एक कविता सुना रही हैं :
सूर्य कहां एक तारा टूटा, क्या जाने वह किसने लूटा – छत पे कहीं नही था भाई, नही सड़क पे दिया दिखाई – कास अगर मिल जाता तो आलमारी उसे सजाता – सुबह साम मै देख करता जगमग जगमग करता रहता...
Posted on: Feb 07, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
नदी के धारी पीपर के तरी रहय एक कुटिया रे कुटिया मा...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-भेलकच्छ, थाना-रमकोला, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से हीरामन एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं :
नदी के धारी पीपर के तरी रहय एक कुटिया रे कुटिया मा – कुटिया मा रोवय दाई बुढ़िया – मोला कैसन लईका देहे रे दादा बड़ा गजब के बुढ़िया – रेडियो लगा के सुनत रहिथे वो दिन रात कुटिया मा – नदी के धारी पीपर के तरी रहय एक कुटिया रे कुटिया मा...
Posted on: Feb 07, 2018. Tags: HIRAMAN BHELKACHH SONG VICTIMS REGISTER
कुदरगढ़ी-कुदरगढ़ी अंबिकापुर महा माई...भजन गीत
ग्राम-परमेश्वरपुर, पोस्ट-केवरा, थाना-चंदोरा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से हरिश्चंद एक भजन गीत सुना रहे है:
कुदरगढ़ी-कुदरगढ़ी अंबिकापुर महा माई-
चौराकर सती माई सारा सुरक धाम विराजे भवानी-
सतलोकिन दाई सतबहनी सतलोकिन दाई सतबहनी-
बड़ा सुन्दर देखे वो चारो पहाड़-
दाई के मंदिर बने नदिया किनार-
कुदरगढ़ी-कुदरगढ़ी अंबिकापुर महा माई...
