हरे भरे खेतो में देखो, कैसा तनकर खड़ा बिज्जुका...कविता
ग्राम-करकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड़, जिला-पलामू (झारखंड) से अखिलेश कुशवाह एक कविता सुना रहे हैं:
हरे भरे खेतो में देखो कैसा तनकर खड़ा बिज्जुका-
सिर पर काली वाली हाड़ी है चुने का टिक्का-
कुर्ता टीला फटा चिथडा तनिक ना इसे सलीका-
हांथ पांव लकड़ी के इसके पर मन का है कड़ा बिज्जुका-
देख बिज्जुकी मिल गाए भैस और साड़ भड़कते – पास ना फटे कोई पक्षी सूरत देख हडकते...
Posted on: Feb 11, 2018. Tags: AKHILESH KUSWAHA SONG VICTIMS REGISTER
आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : दोतो कांदा से जानवरों के घाव का उपचार
ग्राम-बिरोल, जिला-गरियाबंद (छत्तीसगढ़) से महादेव मरकाम जानवरों को जब घाव हो जाता है तब उनका इलाज कैसे किया जाता है उसके बारे में बता रहे है कि वे लोग जंगल में रहते है और जानवर के शरीर में घाव हो जाता है तो वे लोग अस्पताल नहीं ले जाते है बल्कि खुद से इलाज करते है उनके क्षेत्र में एक बेल होता है उसको पुन्गार कहते है और उनके क्षेत्र में उसको दोतो कांदा कहते है उसको जानवर को खिला देते है और पतला कटा हुआ को गला में रस्सी के साथ बाँध देते है और जो कीड़े मकोड़े होते है वो कट कटकर गिर जाते है और घाव सूख जाते है उससे जानवर को आराम मिल जाता है. भान साहू@8602007333.
Posted on: Feb 11, 2018. Tags: MAHADEV MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
जिन्दगी का एक और वर्ष कम हो चला...रचना
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार नए वर्ष की बधाई देते हुए संतोना भारती की एक रचना सुना रहे हैं:
जिन्दगी का एक और वर्ष कम हो चला-
कुछ पुरानी यादें पीछे छोड़ चला-
कुछ ख्वाइशें दिल में रह जाती है-
कुछ बिन मांगे मिल जाती हैं-
कुछ छोड़ कर चले गये-
कुछ नये जुड़ेंगे इस सफर में-
कुछ मुझसे बहुत खफा हैं-
कुछ मुझसे बहुत खुश हैं-
कुछ मुझे मिल के भूल गये-
कुछ मुझे आज भी याद करते हैं-
कुछ शायद अनजान हैं-
कुछ बहुत परेशान हैं-
कुछ को मेरा इंतजार हैं-
कुछ का मुझे इंतजार है-
कुछ सही है कुछ गलत भी है-
कोई गलती तो माफ कीजिये-
कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिये...
Posted on: Feb 10, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
सावन बर्षा मा वो मोर जानू ऐती कोती हो जाथस वो...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-दुर्लापुर, थाना-पंडरिया, जिला-कबीरधाम से लक्ष्मी चंदेल एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
सावन बर्षा मा वो मोर जानू ऐती कोती हो जाथस वो
गर्मी के दिन मा तेहा वो टूरी तड़फ-तड़फ मर जाथस वो
सावन महिना मा रानू वो ऐती तेती हो जाथस वो
खोजथो मै वो मोर जानू ते कहा लुका गे न
जंगल खोजे झाडी खोजे, खोजे पहाड़ी ला वो
पायों रानी मै टोला वो रानी आपन घर के दुवारी मा वो
Posted on: Feb 09, 2018. Tags: LAXMI CHANDEL SONG VICTIMS REGISTER
धरती ला काट-काट चंउरा छहवाबे नी रे...दोम्कच लोकगीत
ग्राम पंचायत-परमेश्वरपुर, पोस्ट केंवरा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर से हरिश्चंद्र एक दोम्कच लोकगीत सुना रहे हैं:
धरती ला काट-काट चंउरा छहवाबे नी रे-
झाले रे खूटा दैहा हमर मढवा तनाय-
मढवा तनत घनी झन रोबे दुल्हिन नोनी-
छतिया म दैहा रे पखाना खेल देबे-
तेल पियत घनी झन रोबे दुल्हिन नोनी-
छतिया मा लोलो रे पखाना खेल देबे...
