हम बंधुआ मज़दूर हैं पर एहसान करके हमें छुड़ाओ मत, कम से कम अभी खाना तो मिल जाता है...
चित्तोड़गढ़ (राजस्थान) से खेमराज चौधरी बता रहे हैं कि आज वे शेरगढ़ गाँव गए इस गाँव में 35 घर है और उनमे से 8 बंधुवा मजदूर और और सब राजपूतो के यहाँ बंधुवा मजदूरी करते है पास में स्कूल है लेकिन कोई भी पढना नहीं चाहते है तीन लोग टीबी के मरीज है और गाँव में पूरे बच्चे कुपोषित है और महिलाये एनीमिक है, सब भूमिहीन है और लोगो के घरो में खाने के लिए राशन नहीं है और उस गाँव में छह बाल बंधुवा मजदूर है| मैंने कहा मैं आप लोगो को छुड़ा लूँ तो उन्होंने कहा नहीं साहब फिर हम लोगो को कोई रखेगा नहीं अभी हम लोगो को कम से कम रोटी तो मिल रही है| आप बाल मजदुरो को किसी को मत छुडाओ हमारी जिन्दगी ठीक है तो वे मायूस हो गए की ये खुद छूटना नहीं चाहते है| चौधरी@9460057394.
Posted on: Feb 26, 2018. Tags: KHEMRAJ CHOUDHARY SONG VICTIMS REGISTER
बांसुरी के इतिहास में उन कीड़ों का कोई जिक्र नही...कविता
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार नरेश सक्सेना की एक कविता बांसुरी सुना रहे हैं:
बांसुरी के इतिहास में उन कीड़ों का कोई जिक्र नही-
जिन्होंने भूख मिटाने लिए बांसों मे छेद कर दिए थे-
और जब-जब उन हवा छेदों से गुजरती तो बांसों का रोना सुनाई देता-
कीड़ो को तो पता ही नही था कि वे संगीत के इतिहास में हस्तक्षेप कर रहे हैं-
और एक ऐसे वाद्य का आविष्कार जिसमे बजाने वाले की सांसे बजती है-
मैंने कभी लिखा था बांसुरी में बांस नही बजती साँस नही बजता-
बजाने वाला बजता है अब जब-जब बजता हूँ बांसुरी तो राग चाहे जो हो-
उसमे तोड़ो की भूख और बांसों का रोना भी सुनाई देता है...
Posted on: Feb 26, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
ज्योत जलत है दाई तोर फुलवारी मा...जस गीत
ग्राम-लूढूटोला, पंचायत-दमगढ, थाना-कुकदुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से राजेश पंदराम एक जस गीत सुना रहें हैं :
ज्योत जलत है दाई तोर फुलवारी मा – दुःख ला धर के आये हों दाई, मै हा तोर दुवारी मा – लक, लक, लक रूप करत है कुई के चंडी माई – दुःख ला हर ले मोरे तै लुढूटोला के महा माई-
ज्योत जलते है दाई तोर फुलवारी मा...
Posted on: Feb 26, 2018. Tags: RAJESH PANDRAM SONG VICTIMS REGISTER
यूही कट जाएगा सफर सांथ चलने से...गीत
शासकीय पूर्व माद्यमिक शाला गोटुलमुंडा, ब्लाक-दुर्गुकोंदल, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मान सिंह उसेंडी एक गीत सुना रहे हैं :
यूही कट जाएगा सफर सांथ चलने से-
कि मंजिल आयेगा नजर सांथ चलने से-
हम है राही प्यार के चलाना अपना काम-
पल भर में हो जाएगी हर मुस्किल नाकाम-
हौसला ना हारेंगे हम तो बाजी मरेंगे-
कहते हैं ये वादियां बदलेगा मौसम...
Posted on: Feb 26, 2018. Tags: MAN SINGH USENDI SONG VICTIMS REGISTER
हसन्त भुदीन बंदु हरी करण रहित दयाल...दोहा गीत
ग्राम-बरसीकला, पोस्ट-अन्दवा, थाना-पनवार, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से दयासागर कुशवाहा एक दोहा सुना रहें है:
हसन्त भुदीन बंदु हरी कारण रहित दयाल-
तुलसीदास सक्त भजन क्षाण कपट जंजाल-
चले राम लक्ष्मण मुनी संधा-
गयें जहा जग पावन गंगा-
गांधी सुन सब कथा या सुनाये-
जही प्रकार सुर सरीमही आये...


