दर्द आखिर तक छिपाया तुम करो, हौसले भी आजमाया तुम करो...गजल गीत
जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) मालीघाट से सुनील कुमार एक गजल सुना रहे हैं:
दर्द आखिर तक छिपाया तुम करो, हौसले भी आजमाया तुम करो-
जिन्दगी की रौनक बदल जाएगी यु कभी खुद को हंसाया तुम करो-
गम जदा को यू लुभाना पलक में मुस्कान दिल का खुदाया तुम करो-
चाँद जैसे यू डुबो दे इश्क में दिलों को सजाया तुम करो-
राहें गुजर जाएगी बगल से राज नीशा यू डिहाया तुम करो...
Posted on: Feb 16, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
अधिकारी बोलते हैं खुले में शौच मत करो, पर हैण्डपम्प दूर होने से पानी लाने में बहुत दिक्कत है...
हटका चारामा, पंचायत-श्रीगोहान, ब्लाक-नरहरपुर, जिला-कांकेर, छत्तीसगढ़ से कला नेताम, सन्तेश्वरी, बिमला सोडी, मीरा नेताम, इंद्रावती बता रहे हैं कि उनके गाँव के लगभग 1172 की जनसँख्या है और रोज शौचालय एवं घर के लिए पानी लाने में परेशानी होती है सरपंच का कहना है कि बाहर खुले में शौच नही जाना है पर हैण्डपम्प दूर होने से काफी दिक्कत होती है तो उनके गाँव में नलजल योजना हो तो अच्छा होता इसके लिए उन्होंने कई बार ग्राम सभा में आवेदन दिया है पर अधिकारी ध्यान नही दे रहे हैं इसलिए साथी सीजीनेट सुनने वाले साथियों से मदद की मांग कर रहे है इन नम्बरों में बात कर नल जल योजना लगवाने में मदद करें: सरपंच@7879567764, CEO@9424299510. संपर्क@7354077552.
Posted on: Feb 16, 2018. Tags: KALA NETAM BIMLA SODI SONG VICTIMS REGISTER
फूलों से नित हँसना सीखो...कविता
जिला-कांकेर, ब्लाक-भानुप्रतापपुर, ग्राम-पंचायत, तेलम्मा से करिश्मा पटेल, शीतल पटेल और रितु पटेल एक कविता सुना रहे हैं:
फूलों से नित हँसना सीखो-
भंवरों से नित गाना-
तरु की झुकी डालियों से सीखो-
सीखो शीश झुकाना-
सूरज की किरणों से-
जगना और जगाना...
Posted on: Feb 16, 2018. Tags: KARISHMA PATEL SHEETAL PATEL SONG VICTIMS REGISTER
आदिवासी लोग अपनी फसलों और स्वयं की रक्षा के लिए धनुष, गुलेल गोटी का उपयोग करते है...
सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज ग्राम-बाकरे, पंचायत-गोरडंड, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां से बाबूलाल नेटी गाँव के सुखलाल सोडी और सुनील सोरी से बात कर रहे हैं जो उनको गोंडी और हिंदी में बता रहे हैं वे वनों में जानवरों से अपनी सुरक्षा करने के लिए कुछ विशेष प्रकार के हथियार हमेशा साथ में रखते है जैसे तीर धनुष, गुलेल गोटी और टंगिया, इसका उपयोग वे अपने पूर्वजो के समय से भोजन तलाशने और अपनी सुरक्षा के लिए करते आ रहे हैं | आज के समय में वनों में रहने वाले अदिवासी समुदाय इनका प्रयोग फसलो की सुरक्षा के लिए भी करते हैं जिससे जंगली जानवर उनकी फसल को बर्बाद न कर दे और ये हथियार हर घर में रखा जाता है. बाबूलाल नेटी@7682852502.
Posted on: Feb 16, 2018. Tags: BABULAL NETI SONG VICTIMS REGISTER
महुआ कर फूल आमा भाजी कन्हैया सुग्घर लागथे रे...लोक गीत
जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) थाना-चंदोरा, ग्राम-देवरी से कैलाश सिंह पोया एक लोक गीत सुना रहे हैं:
महुआ कर फूल आमा भाजी कन्हैया सुगर लागथे रे-
महुआ कर कूची आमा फूल मुनगा कर सुन्दर लगाथे रे-
बादल घडर-घडर घुडकाये मुनगा कर फूल झर जाये रे-
फागुन के महीना फका-फाके महुआ हर हमर गिरथे रे...

