आज जनकपुर में माँ बड सुहावन लागे...भोजपुरी विवाह लोकगीत
जिला पूर्वी चम्पारण बिहार से कुंदन कुमार एक भोजपुरी विवाह लोकगीत सुना रहे हैं:-
आज जनकपुर में माँ बड सुहावन लागे-
हरे-हरे बसवा के मडवा छ्वया चाचा-
छ्हू मुख दिया न जा रे ला बड सुहावन लागे...
Posted on: Mar 15, 2018. Tags: SONG Sunil Kumar VICTIMS REGISTER
किदा रूप कितने तनिक सजी अ रूप देले बा...नशा मुक्ति गीत
जिला मुजफ्फरपुर (बिहार) से राजीव कुमार राय एक नशा मुक्ति गीत सुना रहे हैं:-
किदा रूप कितने तनिक सजी अ रूप देले बा-
दारू बिकत नहीं नित सजी अ रूप देले बा-
पूरा बदलल बिहार पियल रोक देले बा-
चार चौथा फाइल पढल रहनिया कगार में...
Posted on: Mar 14, 2018. Tags: SONG Sunil Kumar VICTIMS REGISTER
अय्यो रे अय्यो रे मोरा घर अय्यो रे...शिक्षा गीत
ग्राम-जामपानी,पोस्ट-लिलासी, तह्सील-दुद्धी,जिला-सोनभद्र (उ.प्र.) से रामजीत भारती एक शिक्षा गीत सुना रहे हैं:-
अय्यो रे अय्यो रे मोरा घर अय्यो रे-
सेवा भारत के द्वारा शिक्षा घर-घर अय्यो रे-
मैं तो पढ़ना लिखना जानू-
मैं तो किसी से न शर्माऊ-
मैंने सा साफ सफाई अक्षर और ज्ञान-
मैंने सीखा पैसे कमाना जीवन में सम्मान-
भैया जीवन में सम्मान भैया जीवन में सम्मान...
Posted on: Mar 14, 2018. Tags: RAMJEET BHARTI SONG VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर : शुगर बीमारी का घरेलू उपचार और उपयोग-
प्रयाग विहार, मोतीनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच डी गांधी शुगर जिसे मधुमेश और डायबिटीज के नाम से जाना जाता है का घरेलू उपचार बता रहे हैं, बरगद की छाल 100 ग्राम, सदाबहार की पत्ती 100 ग्राम, बंजिरा 100 ग्राम, जामुन की गुठली 100 ग्राम, करेला के बीज 100 ग्राम, बेल पत्ती 100 ग्राम, बबूल की पत्ती 100 ग्राम सभी को साफ कर पीस कर चूर्ण बना लें और सुरक्षित रख लें, एक-एक चम्मच चूर्ण दिन में दो बार खाली पेट पानी के सांथ सेवन करें, इससे लाभ हो सकता है, भोजन में मीठी चीजों का प्रयोग न करें चावल, आलू, मीठे फलों का प्रयोग न करें, दिन में थोड़ा-थोड़ा भोजन लें, अंकुरित अनाज और कोदो चावल का प्रयोग करें, नियमित व्यायाम करें : एच डी गाँधी@9111061399.
Posted on: Mar 14, 2018. Tags: CG HD GANDHI RAIPUR SONG SWASTHYA SWARA VICTIMS REGISTER
पहले हमारी स्थिती बहोत ख़राब थी, अब कुछ सुधार हो रहा है...कहानी-
शांतिनगर, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से लालसाय कावडे बता रहे हैं, उनकी गाँव की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी और आर्थिक स्थिती भी खराब थी, इस कारण वे शहर में आकर बस गये और वहां काम कर अपना जीवन जीने लगे | अभी वे झोपड़ी बनाकर रहते है और मजदूरी कर अपना घर चलाते हैं, उन्हें सरकार की किसी योजना के बारे में पता नहीं चलता, वे नये लोगो से बात करने से घबराते हैं, आज वो मध्यप्रदेश के सीजीनेट के सांथियो से मिले उनके काम के बारे में जाने तो बहुत अच्छा लगा उनका कहना है कि वे भी लोगो की मदद करने की कोशिश करेंगे | वे लोग 2003-04 से शहर में रह रहे हैं, अभी स्थिति में कुछ सुधार हो गया है |
