वे लतीफों पर हँसेंगे, व्यंग्य मत करना...रचना

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर, (बिहार) से सुनील कुमार, गीरीश पंकज की रचना को सुना रहे है :
वे लतीफों पर हँसेंगे, व्यंग्य मत करना-
आप सम्मानित रहेंगे, व्यंग्य मत करना-
ये सियासी और खा-पी कर अघाए लोग-
चुटकुले इनको पचेंगे, व्यंग्य मत करना-
अब यहाँ हर सिम्त झूठे लोग हिट होंगे-
आप जाने क्या कहेंगे, व्यंग्य मत करना-
किसको लगती है भला कड़वी दवा अच्छी-
लोग बस मीठा चखेंगे, व्यंग्य मत करना-
कान लोगों के यहाँ अब सच नहीं सुनते-
आप पर पत्थर चलेंगे, व्यंग्य मत करना...

Posted on: Feb 22, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

स्वामी विवेकान्द उनको अकाल में म्रत्यु लोगो के बारे में सोच रो रोकर बताते जाते...किस्सा

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार स्वामी विवेकान्द जी से सम्बन्धित किस्सा सुना रहे है, बहुत समय पहले की बात है बंगाल में जबदस्त अकाल पड़ा उस समय इंसान से लेकर जानवर सब परेशान हुए यह देखकर विवेकानन्द अपने अनुयायियो समेत सेवा में लग गए, लोगो की तकलीफ़ देख विवेकानन्द अन्दर ही अन्दर बहुत दुखी हो जाते, एक दिन ब्राह्मणों का एक दल मिलने आया वह दल अध्यातम में ख़ुद को बहुत समझता था, विवेकानन्द उनको अकाल में म्रत्यु लोगो के बारे में सोच रो रोकर बताते जाते और सिसक सिसक कर रोते जाते आँखों के आंसू गर्दन तक आ रहे थे, यह देख दल में शामिल सभी ब्राह्मण चुपके चुपके हसने लगे विवेकानन्द ने उनसे पूछा क्यों हस रहे है तो दल में से एक सदस्य उठकर बोला एक सन्त को कष्ट में रोना नही चाहिए, तभी स्वामी जी उठे और एक पौधे की बड़े वहा से एक हरी छड़ी लाकर दल के सभी लोगो को पीठ पर छड़ी बरसाने लगे तभी सब चीखने चिल्लाने लगे तभी विवेकानन्द ने कहा यह मक्कारी नही चलेगी तुम सब तो दर्द पर विजय पा चुके हो फिर चीख क्यों आंसू क्यों, जो इन्सान की तकलीफ़ पर नही रोए वह सन्त हो ही नही सकता |

Posted on: Feb 21, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

दर्द का भी अजीब किस्सा है...रचना

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार देवेन्द्र आर्य की एक रचना सुना रहे हैं :
दर्द का भी अजीब किस्सा है-
हाल पूछो तभी उभरता है-
वह बेचारी तो बोलती भी नहीं-
पेड़ झुट्ठे हवा से लड़ता है-
कब हमें कर दे वक़्त के बाहर-
वक़्त का यूं भी क्या भरोसा है-
तैरती थी नदी मछलियों सी-
मैंने तो वह भी दौर देखा है-
ले के रख लो, चढ़ेंगे दाम आगे-
उस तरफ़ धूप कितने बिस्वा है-
जाने क्या गड़ता रहता आँखों में-
मुझको लगता है ख्वाब गड़ता है-
यूं तो शामिल हैं हम भी इसमें मगर-
भीड़ तो भीड़ का ही हिस्सा है-
फिर ये कर्मण्ये वाधिकारस्ते-
आदमी तो ख़ुदा का मोहरा है-
कौन पूरा है पूरी दुनिया में-
रात आधी है, दिन भी आधा है-
अपने और ग़ैर से निभाने में-
कुछ न कुछ फ़र्क पड़ ही जाता है-
सब से पहला सवाल पैसे का-
सबसे अन्तिम सवाल पैसा है-
दर्द का भी अजीब किस्सा है...

Posted on: Feb 20, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

गर्भ अवस्था में महिलायें लिपिस्टिक और परफ्यूम का इस्तेमाल न करें...

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार बता रहे है कि गर्भ अवस्था में महिलाओ को लिपिस्टिक और परफ्यूम का इस्तेमाल न करें नहीं तो बच्चे की जिन्दगी को खतरा हो सकता है क्योंकि इसमें हानिकारक B.P.S. केमिकल का प्रयोग किया जाता है B.P.S. एक तरह जेन्डर वेडिंग केमिकल है ये माँ के व्यवहार और बच्चे के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है इससे माँ खुद का और बच्चे की जरूरतों का ख्याल नहीं रख पाती है| इसके माँ के गर्भ में पल रहे शिशु के मौत में इजाफा होता है| क्योंकि प्लास्टिक के संपर्क में आने के बाद इन्सान के स्वास्थ के लिए खतरनाक होता है| इसलिए इसे प्रतिबंधित किया गया है| सुनील कुमार@7274026391

Posted on: Feb 19, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

उनको मालुम न गर, सताने की हद...गजल

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सुजीत कुमार सिंह ‘समर’ की गजल को सुना रहे है :
उनको मालुम न गर, सताने की हद-
आप भी रखिये इक निभाने की हद-
इससे पहले कि कोई रुसवाई हो-
जानिये इश्क़ को जताने की हद-
अश्क़ बह जाना भी कभी जरुरी है-
ज़हर बन’-न जाए, मुस्कुराने की हद-
कल कहीं तनहा ,खुद न कर दे उन्हें-
आज अपनों को आजमाने की हद...

Posted on: Feb 19, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

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