पीड़ितों का रजिस्टर: हम परिवार में 5 सदस्य हैं,नक्सलियों के आतंक से परेशान थे गाँव छोड़कर भागे हैं
ग्राम-गर्दा, जिला-ककेंर, तहसील-अंतागढ़ जिला-कांकेर, (छत्तीसगढ़) से प्रकाश कुमेटी बता रहें हैं कि सन 2005 में मेरे पिताजी को नक्सलियों ने रात में घर में घुसकर जान से मार दिए| मेरे परिवार में पांच लोग रहतें हैं, नक्सलियों के डर के वजह से हम अपने गाँव को छोड़कर अभी अंतागढ़ में रहते हैं, शासन से अभी तक कोई भी मदद नही मिली हैं, बन्नी मजदूरी करके अपना जीवन यापन कर रहें हैं, सम्पर्क नम्बर@7999612211. (184025)
Posted on: Feb 11, 2021. Tags: KANKER CG SONG VICTIMS REGISTER VICTIM REGISTER
पीड़ितों का रजिस्टर: मेरा भाई नक्सली था आत्मसमर्पण किया, सरकार ने पैसे दिया नौकरी नही है...
श्यामनगर ब्लॉक-अंतागढ़, जिला-कांकेर, (छत्तीसगढ़) से रजमन कचलाम बता रहे हैं की उनके बड़े भाई पहले नक्सली संगठन में थे, और बाद में उसने अपने आप को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया | उसके बाद नक्सलियों ने सन 2016 में घर में आकर जान से मार दिए | पीड़ित परिवार को शासन के तरफ से आठ लाख रूपये मिला था | और नौकरी देंगे कहे थे लेकिन अब तक नौकरी नही दिया गया है| नक्सलियों के डर ले कारण वे अब अंतागढ़ में अपने पूरे परिवार के साथ आकर रहा रहे हैं और मजदूरी करके अपना जीवन चला रहे हैं|
Posted on: Feb 11, 2021. Tags: KANKER CG SONG VICTIMS REGISTER VICTIM REGISTER
वनांचल स्वर:वनवासी और उनके देवता
ग्राम-धनेली कनार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) व्यास साहू बताते हैं कि बस्तर आदिवासी क्षेत्र में वनवासी वनों की रक्षा करते हैं| वनवासी मूर्ती पूजा नहीं करते बल्कि वो जंगल से मिलने वाली लकड़ी से झूलानुमा ढांचा तैयार करके उसी की पूजा करते हैं| वनवासीयों की मौसमी जिंदगी वन उपज पर ही आधरित है| आदिवासी भाई वनों के बिना अधुरे हैं| समिति का कार्य वनों की रक्षा करना है| समिति अधिकारीयों के साथ बैठकर उनसे बातचीत करके नियम बनाती हैं| जनसँख्या बढ़ने के कारण वन के पेड़ो की कटाई करनी पड़ती है, पेड़ काटने से बचने क लिए बंजर जमीनों पर लोगों को बसाया जा रहा है| आदिवासी भाई महुआ से प्राप्त होने वाले रस को देवी देवताओं को चढ़ाकर त्यौहार मनाते हैं| बरसात कम होने की स्तिथि में शीतला माता कि पूजा करते हैं| बुढ़ा देव को वनवासी पूजते हैं| वनवासी प्राकृति की पूजा करते हैं| मेहमान आने पर वो उसको महुआ का रस पिने के लिये देते हैं| वन कानूनों के बारें में लोगो को जानकारी हो इसके लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं| बाहरी ठेकेदारों पर कारवाई की जा रही हैं| वनवासी महुआ का फल, रस और अन्य वन्य उपज बेचकर अपना गुजारा करते हैं| वृक्षरोपण कार्यकर्मो को बढ़ाया जा रहा हैं|(RM)
Posted on: Feb 11, 2021. Tags: CG KANKER VANANCHAL SWARA VYAS SAHU
वनांचल स्वर: चाहचढ़ नाम पड़ने का इतिहास...
ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से सन्तु सलाम बताते हैं, हमारे पूर्वजों ने कई बार चाहचढ़ नाम के पीछे की कहानी हमें बताई है जो काफ़ी दिलचस्प है| यहाँ पर एक झरना है जिसका नाम चाह्चिहुढ़ और उस झरने के आस पास चाहची नाम का पक्षी रहता था जिससे यहाँ का नाम चाहचढ़ पड़ा| बड़े बुजुर्ग बतातें हैं कि वन में फल, फूल और जानवर खूब थे| औषधियाँ भी मिलती थी जिनसे मलेरिया और कई बीमारियाँ ठीक होती है| लेकिन अब यह सब बहुत तेज़ी से खत्म हो रहा है खनन की वजह से| सम्पर्क@7647070617. (185513) GT
Posted on: Feb 10, 2021. Tags: CG KANKER SANTU SALAM VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: घटते जंगलों के कारण जानवर भू घट रहे हैं और प्रदुषण भी बढ़ा है ...
ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लखराम सलाम 1960-1965 की बात बतातें हैं उस समय जंगल बड़े हुआ करते थे| जंगले में बाघ, हिरण, सांभर, वनभैंसा, मयूर, बरहा(जंगली सुवर), खरगोश, गिलहरी और गैंडा हुआ करते थे| पेड़ों की बाते करें तो बांस के पेड़ थे| मैं उस समय 5 साल का था| जब 20-25 वर्ष का हुआ तो चीता, बरहा, खरगोश और पक्षी समय के साथ गायब होने लगे| हम लोग शिकार पर भी जाते थे| जानवरों के गायब होने का मुख्य कारण खनन है| खुदाई होते हुए 7-8 साल हो गया है, वहां से कई तरह क जहरीले पदार्थ निकलते हैं और रही बात फायदे की तो वह बाहरियों का ही हो रहा| (185556) GT
