किसिम किसिम के नवा-नवा धान, वोला खाके गवाबो प्राण...छत्तीसगढ़ी कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
किसिम किसिम के नवा-नवा धान, वोला खाके गवाबो प्राण-
लुचाई गुरमटिया बछा भोग, ये जम्मो ला लागिस रोग-
भाठा दुबराज लक्ष्मिभोग, येमन ला छोड़ेन आज के लोग-
सफरी, भाठा सफरी, जौफूल ओला हमन गए हन भूल-
तुलसी फूल, तुलसी गुरमंजरी गुरमटिया
बुडहा, बूढी, कोड़ा सिराकार, वोला ले गईस पलरिया बुखार...
Posted on: Aug 16, 2018. Tags: CHHATTISGARHI KANHIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH CHHATTISGARH SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : नेत्र ज्योति बढ़ाने का घरेलू नुस्खा-
सेत गंगा, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से वैद्य रमाकांत सोनी नेत्र ज्योति वर्धक एक घरेलू नुस्खा बता रहे हैं, जिन व्यक्तियों के आँखों में कमजोरी आ रही हो, कम दिखाई देता हो वे आधा चम्मच पिसी काली मिर्च, आधा चम्मच पिसी मिश्री और एक चम्मच शुद्ध पिसी गो घृत मिलाकर सुबह खाली पेट सेवन करें, उसके बाद दूध पी लें, ऐसा 6 माह तक लगातार करने से नेत्र ज्योति बढ़ाने में लाभ मिल सकता है, अधिक जानकारी के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते है. हमारे आसपास पाए जाने वाले वनस्पतियों की मदद से हम स्वस्थ रह सकते हैं, इसके बारे में हमें यदि जानकारी हो तो हम दूकान की दवा पर लगने वाला धन भी बचा सकते हैं : संपर्क नंबर@9165400513.
Posted on: Aug 16, 2018. Tags: HEALTH MUNGELI CHHATTISGARH RAMAKANT SONI SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
मन मोहनी कहां गए रे मोर जिवरा तरस गए ना...छत्तीसगढ़ी गीत-
ग्राम-बगडा, थाना, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से देवानंद एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं :
मन मोहनी कहां गए रे मोर जिवरा तरस गए ना-
अरे तोरे संगे लाटा फांदा खेल रखहूँ-
आज छाती भीतरी लुकाए राखहूँ-
अरे इते देखो रे, उते देखों न गांव गली जमोना-
अरे खोजत खोजत जम्मो डहर ला, दोनों गोड मा फोरा परगे रे-
अरे तोरे असन माया दार कहां भेटहूँ...
Posted on: Aug 16, 2018. Tags: CHHATTISGARHIA DEWANAND SONG SURGUJA CHHATTISGARH VICTIMS REGISTER
पहले कहती है बहू, मै तुमसे एक बात कहूं, मै जब तक घर में रहूं...कविता-
ग्राम सिवनी, ब्लाक-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कामता प्रसाद शर्मा एक कविता “घर की बात” सुना रहे है:
पहले कहती है बहू, मै तुमसे एक बात कहूं, मै जब तक घर में रहूं-
तुम एक काम किया करो, मेरे सामने अपनी सास से मत लड़ा करो-
जब तुम लोग लड़ती हो, एक दूसरे को भला बुरा कहती हो-
मै घबरा जाता हूँ, रोकना चाहता हूँ पर रोक नही पाता हूँ-
वो तुम्हारी सास है लड़ाई में पास है-
ये जब से आई है इसका काम लड़ाई है...
Posted on: Aug 16, 2018. Tags: BILASPUR CHHATTISGARH KAMATA PRASAD SHARMA POEM SONG VICTIMS REGISTER
मै उपजाऊ हूँ पर तुम्ही बंजर बना रहे हो...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
मै उपजाऊ हूँ पर तुम्ही बंजर बना रहे हो-
अनेको प्रकार के रासायनिक खाद डालकर, मेरे सीने को छलनी किए जा रहे हो-
मै समतल हूँ मुझे खोदकर, उबड़ खाबड़ दुर्गम किए जा रहे हो-
मेरे भीतर रासायनिक पदार्थ निकालकर मेरे पेट फाड़े जा रहे हो-
मेरे ऊँचे-ऊँचे पेड़ पौधो को काटकर, मुझे विनाश किए जा रहे हो-
मै निर्जीव नही हूँ मै तो सजीव हूँ-
इसीलिए तो मै भिन्न-भिन्न वस्तुएं अन्न पैदा करती हूँ...
