We worked on erecting poles 3 years ago, neither electricity came nor wages...
Rakesh Rai is visiting Pampapur village in Ambikapur block of Surguja district in Chhattisgarh where he meets Budhram who is deputy sarpanch of the village and also a Pahadi Korwa primitive tribal. He says electricity officials made them work 3 years ago to erect poles but neither the electricity arrived nor they got any wages. You are requested to call the officer@9424254751 to help these primitive tribals. For more Rakesh bhai can be reached at 9826515792
Posted on: Apr 07, 2016. Tags: ELECTRICITY RAKESH RAI
We have lost all hope that our Anganwadi will ever improve, Please help us...
Shravan Rai is calling from Dhaid village under Vishanpur Abhi in Khanpur block of Samastipur district in Bihar and says children are not getting mid-day meal and dress in their village Anganawadi center. Anganawadi worker is not teaching well and attends rarely. Officers are not paying attention to their complaints and they have become hopeless. He is requesting us to call Collector@9473191332 and BDO@9431818232 to help them.For more you can reach Shravan@7503882351.
Posted on: Jan 10, 2016. Tags: SHRAVAN RAI SONG VICTIMS REGISTER
बचपन में माहि काहे करदय सगाई...बाल विवाह विरोधी गीत
जिला-दतिया (मप्र) से रामजी राय एक गीत सुना रहे हैं जो बाल विवाह को रोकने से सम्बंधित हैं :
बचपन में माहि काहे करदय सगाई-
मेरी सुनले दुहाई मेरी माहि रे-
ओढ़ी हुई सयानी इन्हीं हाथो की गुडिया-
क्यों की सगाई आग किसने लगाई-
मोहे आगई रुलाई मेरी माहि रे-
बचपन में माहि काहे...
छोटा भैया पढने जाए मैं मन-मन रोहूँ-
उमर पढाई की हैं फिर भी घर में बर्तन धोहूँ-
चौके तो माहि लक्ष्मण रेखा बनाई-
कैसे लाहुं दिखाई मेरी माहि रे-
बचपन में माहि काहे...
करदी अगर सगाई तो जल्दी शादी मत करयो-
बच्ची हो माँ सिर को जिम्मदारी मत धरियो-
गईया कहाई तोरी कुटी की-
माहि बनना कसाई मेरी माहि रे-
बचपन में माहि काहे...
Posted on: May 26, 2015. Tags: RAMJI RAI SONG VICTIMS REGISTER
पानी नइये गांव में, चलें नीम की छांव में...पानी पर गीत
स्वदेश संस्था, दतिया,मध्य प्रदेश से रामजी राय पानी के संरक्षण पर एक जागरूकता गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
पानी नइये गांव में, चलें नीम की छांव में-
बाकी है सब लाचारी, बेडी नइये पांव में-
पानी रोको, पानी रोको, पानी रोको भाई रे-
इसी से जुड़ी है भइया सबकी समाई रे-
भले हो अकाल आज पानी का-
कल तो रहेगा राज पानी का-
पानी नइये खेत में, अब क्या होगा जेठ में-
सावन में पपीहा रोए, आंसू टपके रेत में-
पानी देगा रूखे-सूखे पेरों को तराई रे-
पानीदार आंखे कभी रोई नहीं भाई रे-
डूबे न जहाज कभी पानी का-
पानी का रहेगा राज पानी का-
पानी सूखा ताल का, रोना है हर साल का-
गोरी धनिया तपे धूप में, रंग बदल गया खाल का-
पानी से ही ठंडी आग-छाया मिलती है भाई रे-
पानी ने पेड़ों की डोली कांधों पे उठाई रे-
पानी संत पानी पीर पानी है पयम्बर-
पानी नदी पानी बहाव पानी है समंदर-
राजा धरती की राजधानी का, पानी का रहेगा राज पानी का-
बैठेंगे सब छांव में, ठंडक होगी गांव में-
पानी-पानी जुड़ते-जुड़ते नदी बहेगी गांव में-
पानी से बढेगी सारी भूमि में तराई रे-
घास-पेड़-पौधे भी बढ़ेंगे खूब भाई रे-
काट न पाएगा धार मिट्टी पानी का बरसात में-
काम और रोजी-रोटी होगी अपने ही हांथ में-
खिलेगा रूप जिंदगानी का,पानी का रहेगा राज पानी का.
Posted on: May 13, 2015. Tags: Ramji Rai SONG VICTIMS REGISTER
हम मेहनतकश जग वालों से जब अपना हिस्सा मांगेंगे...
जिला दतिया (म.प्र.) से रामजी राय मजदूरों को समर्पित एक गीत सुना रहे हैं:
हम मेहनतकश जग वालों से जब अपना हिस्सा मांगेगे-
एक खेत नहीं, एक देश नहीं, हम सारी दुनिया मांगेंगे-
हम मेहनतकश जग वालों से...
यहाँ पर्वत-पर्वत हीरे हैं, यहाँ सागर-सागर मोती हैं-
ये सारा माल हमारा हैं, हम सारा खजाना मांगेंगे-
हम मेहनतकश जग वालों से...
वो सेठ-व्यापारी-रजवाड़े, 10 लाख तो हैं हम सवा सौ करोड़-
ये कब तक अमरिका से, यूँ जीने का सहारा मांगेंगे-
हम मेहनतकश जग वालों से...
जो खून बहा, जो बाग उजड़े, जो गीत दिलों में क़त्ल हुए-
हर कतरे का हर गुन्चे का, हर गीत का बदला मांगेंगे-
हम मेहनतकश जग वालों से...
जब सब सीधा हो जायेगा, जब सब झगड़े मिट जायेंगे-
हम मेहनत से उपजायेगे, और सब बांट बराबर खायेंगे-
हम मेहनतकश जग वालों से...
