जोंढ़री मा बुनले मकई...गीत-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास पोया एक गीत सुना रहे हैं:
जोंढ़री मा बुनले मकई-
पुटू खुखड़ी कर खाई-
बारी मा बुनाथे मकई-
जंगल कर पुटू खुखड़ी कर खाई-
दांस होहो होहो करें-
भुसडी कर चबाई...(AR)
Posted on: Jul 05, 2020. Tags: CG KAILASH POYA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
हम सब बच्चे भारत वासी, अपना भारत बड़ा महान-कविता सुना रहें है...
संदीप कुमार कुशवाहा जिला सतना मध्यप्रदेश से कविता सुना रहें है |
हम सब बच्चे भारत वासी, अपना भारत बड़ा महान |
इच्छा है बस मन में इतनी, हो भारत की ऊँची शान ||
मात पिता और गूरुओ का ,करते राहें सादा सामान |
सच्चाई को कभी ना छोड़ो, ऐसा वर दो हे भगवान ||
जय हिंद जय भारत ...
Posted on: Jul 05, 2020. Tags: (NRAYNPUR) KUMAR KUUSWAHA POEM SANDEEP SATNA SONG VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर : बेल का सरबद बनाकर पीने से पेट से सम्बंधित रोग में लाभ होता है...उपयोग करें-
प्रयाग बिहार कादरिया मज्जिद के पीछे मोती नगर रायपुर (छत्तीसगढ़) से बैद्य एच डी गाँधी बेल का सरबद बनाने का घरेलु नुस्खा बता रहे हैं : 2 नग बड़े बेल लेलेवे और उसे तोड़कर उसके अन्दर का पल्प-गूदा निकालकर किसी बर्तन में 2 गिलास पानी डालकर रख देवे 1 घंटे बाद हाथ से अच्छी तरह मसल करके छान करके स्वाद अनुसार यदि मीठा पीना है तो गुड या शक्कर डाल लें यदि नमकीन पीना है तो काला नमक और जीरा मिलाकर स्वाद अनुसार 1 गिलास दिन में दो बार खाली पेट सेवन करने से गर्मी के दिनों में दस्त या हाजमा,पाचन तंत्र कमजोर होने से दूर होता है और भी कई तरह कि बीमरियों का दवा सम्पर्क करके प्राप्त कर सकते हैं:संपर्क नंबर @9111061399 (170306) CS
Posted on: Jul 05, 2020. Tags: HD GANDHI RAIPUR CG HEALTH SONG VICTIMS REGISTER
कलयुग में नाम कमायो,कलयुग में कला दिखायो....भक्ति गीत-
सुनील कुमार ग्राम-मालीघाट जिला-मुज्जफरपुर (बिहार) से हमारे सीजीनेट सुनने वाले श्रोताओं को एक देवी भक्ति गीत सुना रहे हैं:
कलयुग में नाम कमायो-
कलयुग में कला दिखायो-
प्रति हंश राम के कला सिवाय-
कलयुग में नाम कमायो-
सतिअन्सुइय के कथा सुनाये-
कलयुग में नाम कमायो CS
Posted on: Jul 05, 2020. Tags: BHAKTISONG MUJJAFARPUR BH SONG SUNILKUMAR VICTIMS REGISTER
ऐ मेरी जमी अफ़सोस नहीं...गीत-
ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से दिव्या एक गीत सुना रही हैं:
ऐ मेरी जमी अफ़सोस नहीं-
जो मेरे लिये सौ दर्द सहे-
मह्फूस रहे मेरी आन सदा-
चाहे जान ये मेरी रहे न रहे-
ऐ मेरी जमी अफ़सोस नहीं-
जो मेरे लिये सौ दर्द सहे... (AR)
