भूख लगने पर जो भी खाने को मिले अच्छी लगती है...कहानी-

एक दस वर्ष का बच्चा बीमार पड़ा तो उसके पिता ने उसे चिकित्सालय में भर्ती कराया, तब वो फल के अलावा कुछ भी नही खाता था, एक दिन उसे गांव जाना पड़ा तो उसने पड़ोसी को फल और कुछ पैसे देकर बच्चे का देख-रेख करने को कहा और चला गया, पडोसी ने सोचा इसे दूसरा भोजन देंगे तो कैसे नही खाएगा और दाल चावल खाने में दिया, बच्चे ने नही खाया, शाम के समय उसने चिकित्सक से कहा बच्चा तो कुछ भी नही खा रहा, चिकित्सक ने कहा ठीक हो जाएगा, उसके बाद रात को बच्चे को भूख लगी, जिस पर पडोसी ने खाने को कुछ नही दिया, तो बच्चे ने वही दाल चावल खाया, फिर वह भूख लगने पर जो भी मिले खा लेता, इससे सीख मिलती है, भूख लगने पर जो भी खाने को मिले अच्छी लगती है |
कन्हैयालाल पडियारी@ 9522110855.

Posted on: Aug 19, 2018. Tags: CHHATTISGARH KANHIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER

नेताओं की गोद में खेल रहा भारत महान...व्यंग्य कविता

कन्हैयालाल पड़ीयारी, ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से एक राजनैतिक व्यंग्य कविता सुना रहे हैं :
नेताओं की गोद में खेल रहा भारत महान-
जनता मूर्ख देख कर भी कर रहा उनका सम्मान-
खून की होली खेल रहे हो रहा कत्लेआम-
चीर हरण हो रहे यहाँ देखो खुले आम ....

Posted on: Aug 19, 2018. Tags: HINDI POEM KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH CG SONG VICTIMS REGISTER

किसीम-किसीम के नवा-नवा धान आगे, ओला खाके गवाबो प्राण...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक कविता सुना रहे है:
किसीन-किसीन के नवा-नवा धान आगे ओला खाके गवाबो प्राण-
सचाई गुरमटिया बाशा भोर कि जमो ला लागिस रोग-
दुबराज भाढा दुबराज लक्ष्मी येमन ला छोड़ीन आज के लोग-
सफरी भाढा सफरी जो फुल ओला हम गहन भूल-
तुलसी फुल तुलसी मंजरी गुरमटिया ओहर कहा चल गिस यार-
बुढा बूढी कूड़ा खीरा साग ओला होगिस मलेरिया बुखार-
किसीन-किसीन के नवा-नवा धान आगे ओला खाके गवाबो प्राण...

Posted on: Aug 18, 2018. Tags: CHHATTISGARHI POEM KANHAIYALAL PADHIYARI RAIGARH CG SONG VICTIMS REGISTER

चल पुटू बिने जाबो गोया किसिम-किसिम के पुटू फुटथे...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक छत्तीसगढ़ कविता सुना रहे हैं :
चल पुटू बिने जाबो गोया किसिम-किसिम के पुटू फुटथे-
खोजी बिनी ले आबो गोया चल पुटू बिने जाबो-
गिरे हवे पानी भीगे हवे टिकरा फुटत हवे पुटू-
खोजी बिनी ले आबो चल पुटू बिने जबों-
गोहिया पुटू चिरकों पुटू सुवा मुंडा पटियारी-
चल पुटू बिने जाबो गोया किसिम-किसिम के पुटू फुटथे...

Posted on: Aug 17, 2018. Tags: CHHATTISGARHI POEM KANHAIYALAL PADIHAYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

किसिम किसिम के नवा-नवा धान, वोला खाके गवाबो प्राण...छत्तीसगढ़ी कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
किसिम किसिम के नवा-नवा धान, वोला खाके गवाबो प्राण-
लुचाई गुरमटिया बछा भोग, ये जम्मो ला लागिस रोग-
भाठा दुबराज लक्ष्मिभोग, येमन ला छोड़ेन आज के लोग-
सफरी, भाठा सफरी, जौफूल ओला हमन गए हन भूल-
तुलसी फूल, तुलसी गुरमंजरी गुरमटिया
बुडहा, बूढी, कोड़ा सिराकार, वोला ले गईस पलरिया बुखार...

Posted on: Aug 16, 2018. Tags: CHHATTISGARHI KANHIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH CHHATTISGARH SONG VICTIMS REGISTER

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