स्वास्थ्य स्वर : अडुषा के पौधे का औषधीय गुण..

जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेंद्र सिंह राय अडुषा के पौधे का औषधीय गुण बता रहे हैं, अणुषा (बाशा) को उदर कृमि (पेट में कीड़े) रोग को ठीक करने में उपयोग किया जा सकता है| अणुषा के पत्तो के रस में मधु या शहद मिलाकर सेवन करने से पेट के कृमि नष्ट हो जाती है और वह बाहर निकल जाते है चर्म रोग जैसे-दाद खाज खुजली में इसके 20 पत्तो में 10 ग्राम हल्दी चूर्ण और गौमूत्र में पीसकर दाद, खाज, खुजली के स्थान पर लेप लगाने से दाद, खाज, खुजली की समस्या में लाभ होता है अगर किसी को बमन या उल्टी होती है तो अणुषा के पत्तो के रस में मधु अथवा नीबू का रस मिलाकर सेवन करने से लाभ हो सकता है| संपर्क नंबर@9424759941.

Posted on: Mar 04, 2019. Tags: HELTH MP RAGHVENDRA SINGH RAI SONG TIKAMGARH VICTIMS REGISTER

स्वास्थ्य स्वर: पेट में कीड़े होने पर आडूसा से घरेलू उपचार...

जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेन्द्र सिंह राय आडूसा के पौधे से घरेलू उपचार बता रहे हैं: आडूसा हमारे आस-पास ही पाया जाने वाला औषधीय पौधा है, ये उदर कृमि (पेट में कीड़े) हों तो आडूसा के पत्तों के रस में मधु (शहद) मिलाकर सेवन करने से कृमि नष्ट होकर बाहर निकल जाते हैं, जिससे पीड़ित को आराम मिलता है, किसी व्यक्ति को चर्म रोग दाद,खाज-खुजली हो तो इसके 20 पत्ती को 10ग्राम हल्दी के चूर्ण गौ मूत्र में मिलाकर लेप करने से तत्काल आराम मिलता है, इसके अतिरिक्त अधिक उल्टी (वमन) होने पर इसके पत्तियों के रस में शहद के नीबू का रस मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है| यह सभी अपने घर में भी कर सकते हैं:
वैद्य राघवेन्द्र सिंह राय@9424759941.

Posted on: Sep 11, 2018. Tags: MP RAGHVENDRASINGH RAI SONG SWASTHYA SWARA TIAKMGARH VICTIMS REGISTER

स्वास्थ्य स्वर : तालमखाना या अश्वगंधा के पौधे का औषधीय गुण-

जिला-टीकमगढ़, (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेन्द्र सिंह राय आज हमें तालमखाना या अश्वगंधा के पौधे का औषधीय गुण बता रहे है कि तालमखाना के पत्तो को पीसकर के लेप करने से संधि शूल (जोड़ो के दर्द) में लाभ होता है ताकत बढ़ाने के लिए तालमखाना के बीज और कौंच के बीज दोनों को पीसकर के चूर्ण बना ले और 1 चम्मच चूर्ण 1 चम्मच मिश्री के साथ मिला करके सुबह शाम सेवन करे चूर्ण खाने के बाद ऊपर से 1 गिलास दूध पी ले इससे बल पाप्त होगा लेकिन कौंच का बीज मिलाने से पहले उसको गाय के दूध में उबाल ले और बीज का छिलका निकाल कर पीसकर मिलाएं | राघवेन्द्र सिंह राय@9424759941.

Posted on: Sep 08, 2018. Tags: HEALTH MP RAGHVENDRA SINGH RAI SONG SWASTHYA SWARA TIKAMGARH VICTIMS REGISTER

स्वास्थ्य स्वर: बेल के पत्ते से मधुमेह (शुगर) का घरेलू उपचार...

जिला-टीकमगढ़, (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेन्द्र सिंह राय आज हमें लगभग आजकल हर घर में पाए जाने वाले मधुमेह या शुगर की बीमारी के एक घरेलू उपचार के बारे में बता रहे हैं, वे कह रहे हैं कि मधुमेह होने पर बेल के 5-7 पत्तों को चबाकर नियमित खायें और ऊपर से पानी पीने पर शुगर या डायबिटीज़ की बीमारी कम हो सकती है, इसके अतिरिक्त बेल गूदा (अंदर वाला भाग) और तिल को दोनों बराबर मात्रा में दही में मिलाकर कल्क (चटनी) बनाकर सेवन करने से आराम मिलता है| पसीना आने के बाद शरीर से बदबू आने पर उसके पत्तियों के रस को पूरे शरीर में लगाने से आराम मिलता है| यह प्रयोग सभी घर में आसानी से कर सकते हैं: वैद्य: राघवेन्द्र सिंह राय@9424759941.

Posted on: Sep 05, 2018. Tags: MP RAGHVENDRA SINGH RAI SONG SWASTHYA SWARA TIKAMGARH VICTIMS REGISTER

स्वास्थ्य स्वर: कैथ (कबिट) औषधीय वृक्ष के गुण ...

जिला-टीकमगढ़, (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेन्द्र सिंह राय कैथ (कबिट) के औषधीय गुण के बारे में बता रहे हैं:कैथ (कबिट): यह औषधि वृक्ष हमारे चारों ओर पाए जाने वाले पर्यावरण के में ही पाया जाता है, इसे स्वास्थ्य उपचार हेतु बड़े नर्सरी में लगाया जाता है, यह एक बड़े वृक्ष के रूप में होता है| पित्त समन (जलन) के लिए कैथ (कबिट) फल के मृदु (अंदर वाला भाग) में शक्कर मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है, इसके पत्तों के रस में दूध मिलाकर सेवन करने से पित्त समन में लाभ होता है, साँस लेने में दिक्कत है तो इसके फल के रस में लेंड़ी पेपर (पिपली) के चूर्ण मिलाकर शहद के साथ सुबह-शाम प्रतिदिन सेवन करने से अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है| ये सभी अपने-अपने घरों में आसानी से कर सकते हैं.राघवेन्द्र सिंह राय@9424759941.

Posted on: Sep 04, 2018. Tags: HEALTH MP RAGHVENDRASINGH RAI SONG TIKAMGARH VICTIMS REGISTER

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