पान ला खाए मुह ला करे लाल...कर्मा गीत -

ग्राम-बरबसपुर, पंचायत-बारबी, ब्लाक-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से सुखवती एक कर्मा गीत सुना रही हैं :
पान ला खाए मुह ला करे लाल – जादा माया मत करबे मोरो भईया जीव के काल – अब तो डब्बा में रोना रो – तोला क्या दुःख धरे हे ड्रावल डीजल में रोना रो – पान रे खाए कचर कचर – चाय पत्ती के जवैया जातर कतर...

Posted on: Dec 29, 2017. Tags: KANHIYALAL KEWAT SONG VICTIMS REGISTER

पंछी जपईया हरिनाम बिरिछ पर...बज्जिका भाषा में पराती गीत-

मालीघाट मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सुबह के समय बुजुर्गों के द्वारा गाया जाने वाला बज्जिका भाषा में पराती गीत सुना रहे हैं जो अब विलुप्त होने के कगार पर है :
पंछी जपईया हरिनाम बिरिछ पर – पंछी जपईय हरिनाम – नीचे से ब्याधा सर-नर ताने, ऊपर उडईय बाझ बिरिछ पर – ब्याधा के डसलक काली नगिनिया, बझबा के लागल गले फांस
पंछी जपईया हरिनाम बिरिछ पर...

Posted on: Dec 29, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

खूब नक़ल के करे प्रचार, दर मा लड़का चार हजार...नक़ल पर बघेली में हास्य कविता

ऋषभ मिश्र ग्राम-ओझापुरवा, जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से परीक्षाओं में हो रही नक़ल पर एक बघेलखंडी बोली में एक हास्य कविता सुना रहे हैं:
खूब नक़ल के करे प्रचार-
दर मा लड़का चार हजार-
कहिन कि तुहका पास कराउब-
चाहे कउनऊ विधि अपनाउब-
इत्ते मा तू पास न होवे-
पुनः मूल्यांकन फॉर्म भराउब-
अगर चेकर जो आवे पईहें-
तुरतये फॉर्म भराईन लेइहैं-
सौ-सौ के नोट सबै का दीन्हे – भरके पेट नक़ल कई लीन्हें – कहीं कि नातिन भरी आई-
एक सरहज एक सारी आहिं – तुहो लिखें ददुआ का दीन्हें – पहिले सेट मिलाइन लीन्हें -2
अथवा वथवा सब कई आय-
खूब नक़ल के करे...
चपरासी से पानी मंगावे-
चपरासी चुटका धई लावे-
खूब नक़ल के करे...

Posted on: Dec 28, 2017. Tags: Rishabh Mishra SONG VICTIMS REGISTER

मात-पिता हवें भगवान...आदिवासी गीत

रोहित कुमार धुर्वे ग्राम-नैगवां रैयत, तहसील-बिछिया, विकासखंड-मवई, जिला-मंडला, मध्यप्रदेश से एक आदिवासी गीत सुना रहे हैं:
मात-पिता हवें भगवान्-
ते तोवान-
जाते-जाते जात मानेला-
पातें पारण के-
जाते गुरू के मान लागाके-
जाते देव गावं मान लगा-
जाए नीचे बड़ी-
सब तोहा दाह बोला-
मात-पिता भगवान...

Posted on: Dec 28, 2017. Tags: Rohit Kumar Dhurve SONG VICTIMS REGISTER

हमर छत्तीसगढ़िया भईया सबले बढ़िया रे...छतीसगढ़ी गीत

शिवलाल उसेंडी ग्राम-मेंडू, तहसील-दुर्गकोंदल, जिला- कांकेर, छत्तीसगढ़ से एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
हमर छत्तीसगढ़िया भईया सबले बढ़िया रे-
मेहनत करईया हमन ईकर लरका रे हो-
सरज बराबर भईया इहाँ के माटी रे-
ये माटी मा हवे भईया डिगा सोना-चांदी रे-
महानदी अरपा पैरी शिवनाथ नदिया रे-
इद्रावती छत्तीसगढ़ दाई के धोथे पैयाँ रे-
इहाँ नाचो संगी कर्मा,रेला सुआ रे-
बस्तर गुइंया छत्तीसगढ़ के लागों पइयां रे-
हमर कुअंर उचुआ के कूबर उचर बोली-
सुआ बोले चुटुर-चुटुर मिट्ठू के बोली रे-
हाते के बारी-बकरी लागे फुलवारी रे-
हमर पाले में पागे रे भईया चिन्हारी रे-
जंगल-जड़ी छत्तीसगढ़ के हवे गहना रे – धान का कटोरा मोरे सोनो बैया रे-
ई धरती हवे भईया वीर बलिदान के-
वीर नारायण गुंडाधुर गेंद सिंह यार के-
हमर छत्तीसगढ़िया भईया...

Posted on: Dec 28, 2017. Tags: SHIVLAL USENDI SONG VICTIMS REGISTER

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