हमारे हैंडपंप से गन्दा पानी निकलता है, महक आती है, खाना बनाने पर काला हो जाता है...
ग्राम-तेलियापानी लेदरा, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से ननकी, दुर्सियाबाई बता रहें हैं, कि गाँव के हमारे पारा में जो हैंडपंप है उससे गंदा पानी निकलता हैं, खाना बनाते है तो काला हो जाता है, यहाँ का पानी कोई नही पीते है, हैंडपंप के पानी से गन्दी महक भी आती है| अभी दूर से पानी लाते हैं, इस समस्या के समाधान के लिए कई बार संचिव सरपंच को शिकायत किये, लेकिन कोई ध्यान नही दे रहें हैं| इसीलिए सीजीनेट के साथियों से मदद की अपील कर रहे है कृपया नलकूप लगाने में मदद करे. कृपया इन नम्बरों पर फोन कर के मदद करे: P.H.E@9893883154, सरपंच@ 9109560519. सम्पर्क@9617496624.
Posted on: May 25, 2018. Tags: MITHILESH MANIKPURI SONG VICTIMS REGISTER
जंगल घूमा चाचा जी ने, दूरबीन ले साथ में, दूर-दूर की चिड़िया दिखती, उनको अपने पास में...बाल कविता
ग्राम-मेंढारी, पोस्ट-कर्मडीहा, तहसील-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से ओमप्रकाश मरकाम जंगल के बारे में एक बाल कविता सुना रहें हैं:
जंगल घूमा चाचा जी ने, दूरबीन ले साथ में-
दूर-दूर की चिड़िया दिखती, उनको अपने पास में-
ऊचें पेड़ पर चढ़कर देखा, एक तेंदुआ नीचें-
तभी अचानक देखा बंदर, दौड़ा उसके पीछें-
चाचाजी ने जंगल में जो कुछ भी देखा, उसको अपनी डायरी में नोट कर लिया...
Posted on: May 25, 2018. Tags: OMPARKASH MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
जंगल मोर के बिना, कि दारू कोर के बिना, और सुनी है बाराते दारू...बुन्देलखंडी लोकगीत
ग्राम-गोण, पोस्ट-थनरा, थाना-दिनारा, जिला-शिवपुरी (छत्तीसगढ़) से अखिलेश कुमार पारश एक बुन्देलखंडी लोकगीत सुना रहे है:
जंगल मोर के बिना, कि दारू कोर के बिना-
और सुनी है बाराते दारू, कोर के बिना-
न्याव्ह कोट बिन, चुनर गोट बिन, दूल्हा कोट बिना-
कि मझली काकी वोट न डाले, 100 के नोट बिना-
बिन चोर के बिना, दारू होर के बिना-
और सुनी है बाराते दारू, कोर के बिना-
जंगल मोर के बिना, कि दारू कोर के बिना...
Posted on: May 25, 2018. Tags: AKHILESH KUMAR PARAS SONG VICTIMS REGISTER
हवा हूँ हवा मैं, बसंत की हवा हूँ, सुनो बात मेरी अनोखी हवा हूँ...गीत
ग्राम-धुमाडाड, पोस्ट-गोबिंदपुर, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से सतीश कुमार आयाम एक गीत सुना रहे हैं:
हवा हूँ हवा मैं, बसंत की हवा हूँ, सुनो बात मेरी अनोखी हवा हूँ-
बड़ी बावली हूँ, बड़ी मस्त मोला, नही कुछ फ़िक्र है बड़ी ही नीड़र हूँ-
जिधर घूमती हूँ, मुसाफिर अजब हूँ, न घर बार मेरा, न उद्देश्य मेरा-
नशे में ना दुश्मन, जिधर चाहती हूँ, उधर घूमती हूँ-
हवा हूँ हवा मैं बसंत की हवा हूँ, सुनो बात मेरे अनोखी हवा हूँ...
Posted on: May 25, 2018. Tags: SATHISH KUMAR AAYAM SONG VICTIMS REGISTER
हाय रे मांझी, ले चल नदियाँ के पार, नदियाँ तेज़ बहे धार...सरगुजिया गीत
ओड़गी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से जयंती आयाम के साथ है सीतारानी नेटी जो एक गीत सुना रही है:
हाय रे मांझी, ले चल नदियाँ के पार-
ढंगा तोरा हिले ला, डोले ला, नदियाँ तेज़ बहे धार-
हाय रे मांझी, हो हो हो रे, ले चल नदियाँ के पार-
नदियाँ के पानी मारे ला हिल्लोर, छूट ना जाए कही नय्या की डोर-
धीरे चला रे, छूट ना जाए कही पतवार-
ढंगा तोरा हिले ला, डोले ला, नदियाँ तेज़ बहे धार...

