आ गईले दशमी के दिन : भक्ति गीत...
ग्राम-भवानीपुर जिला-बलरामपुर छत्तीसगढ़ से डी एस बबलू सिंह जी एक देवी भक्ति विदाई गीत सुना रहे है :
आई गईले दसमी के दिन-
त माई जाली गंगा तीरे माई जाली गंगा तीरे-
सेवका के मुखवा म लीन-
त मन नाही धीरज धरे अंखिया से लोरा गिरे-
आई गईले दसमी के दिन-
त माई जाली गंगा तीरे माई जाली गंगा तीरे-
ह्रदया कठोर करके मूर्ति उठायिके-
चला दिहिले माई के सेवका कन्धा प बैठाके-
सिसकी सिसकी बिदाई करे आइहो जल्दी बेटा घरे...
Posted on: Feb 02, 2017. Tags: D S BABLU SINGH SONG VICTIMS REGISTER
राई गायो ना जाए, राई गायो ना जाए...राई गीत
ग्राम-ताराडांड, जिला-अनुपपुर (मध्यप्रदेश) से बाबूलाल सिंह एक राई गीत सुना रहे हैं:
राइ गायो ना जाए, राई गायो ना जाए-
राइ गायों ना जाए, राई गायों ना जाए-
मारे शर्म के मारे आरा रा रा हो-
ढोलकी मांग ले ढोलकी मांग ले-
टिमकी में बैठे माँ शारदा-
Posted on: Feb 02, 2017. Tags: BABULAL SINGH NETI SONG VICTIMS REGISTER
दल दला-दला भटूराई मन पाठ म काह करूँ आई...कर्मा गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कर्मा गीत सुना रहे है:
दल दला दला भटूराई मन पाठ म काह करूँ आई-
का केला बाघ दरे कहा केला चिता-
येका केला गवर दातियाई-
मेंन पाठला आका करूँ आई...
Posted on: Feb 02, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
नरेगा आदि का पैसा लेने बैंक जाने के लिए नाला पार करना पड़ता है अधिकारी पुल नहीं बनवा रहे हैं...
हमारा मनरेगा का पैसा ग्रामीण बैंक भैंसामुंडा में मिलता है जहां जाने के लिए हम लोगों को एक नाला पर करना पड़ता है जिसमे पुल नहीं है इसलिए हम लोगों को बहुत दिक्कत होती है बता रहे हैं ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया। वे बता रहे हैं कि देवरी और दभोरा गाँव के बीच में एक नाला है उसमे पुलिया बनवाने के लिए सरपंच के पास मौखिक रूप से कई बार ग्राम सभा में आवेदन लगाए लेकिन आज तक पुलिया नहीं बनवाये है. वे सीजीनेट सुनने वाले साथियों से अनुरोध कर रहे हैं कि सरपंच@7772911742, उपसरपंच@9174990120, कलेक्टर@9425585298, S.D.M@09424166557, कृपया इन अधिकारियो से बात कर इनकी मदद करें. कैलाश@9575922217
Posted on: Feb 01, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
जमीदार का टेक्टर...कविता
लखन सिंह मरावी ग्राम पटनी तहसील परतापुर जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ से एक कविता सुना रहे हैं :
जमीदार का टेक्टर दौड़े भैयाजी की राज में-
भईया रोवे छोवा रोवे रानीजी की राज में-
हमरे बुजुर्ग जब आये जंगल थे इस गाँव में-
काट-काट के पेड़-पेड़ को खेत बनाया गाँव में-
मालिक भी हम नौकर हो गये भैयाजी की राज में-
भईया रोवे छोवा रोवे रानीजी की राज में-
बड़की बिटिया की शादी में खेत रहा था रेन में – बर्तन,बैला,चानी बिक गए व्याज बकाया मोल में – सूदखोर की परवा है ये भैयाजी की राज में – भईया रोवे छोवा रोवे रानीजी की राज में – रात अंधेरी बरखा बारी गए निकाली धाम से-
पेड़ तले परिवार बसाए हुए पराए गाँव से-
गाँव की घटिया भुगढ़ी घुमे रानीजी की राज में-
कब तक अत्याचार सहेंगें आजादी के नाम पे-
जल्दी रोको फेंक उतारो इन्कलाबजी के नाम पे-
जंजीरों को फेंक उतारो इन्कलाबजी के नाम पे-
जीना है तो एक हो जाओ दादा हीरा मरकाम की राज में...
