Impact : बिजली का पोल गिरने से तार टूट गया था, अब ठीक कर दिया गया है...
ग्राम-खुर्सीपार, पंचायत-बांदरबारी, तहसील-बिछिया, ब्लाक-मवई, जिला-मंडला (मध्यप्रदेश) से त्रिलोक पर्ते बता रहे हैं, तूफान के कारण उनके गाँव में बिजली का पोल गिर गया था जिसके कारण बिजली का तार टूट गया था और गाँव में बिजली की समस्या हो रही थी, जिस समस्या को उन्होंने सीजीनेट पर रिकॉर्ड किया था, जिसके दूसरे दिन कर्मचारी आकर ठीक कर दिये हैं, समस्या हल हो चुकी है इसलिये वे मदद करने वाले सभी सीजीनेट साथियों और बिजली विभाग के अधिकारियो को धन्यवाद दे रहे हैं: संपर्क नंबर@9098426768.
Posted on: Apr 11, 2020. Tags: ELECTRICITY IMPACT STORY MANDLA MP SONG TRILOK PARTE VICTIMS REGISTER
11 अप्रैल को जन्मे गीतकार और अभिनेता की कहानी...
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र गंधर्व गायक कुंदन दास सैगल के बारे में बता रहे हैं, आज के दिन 11 अप्रैल 1904 को जालंधर में गायक कुंदन दास सैगल का जन्म हुआ था, वे अपने समय में गायक और अभिनेता रहे, उन्होंने कई फिल्मो में काम किया और गीत गाये| उनकी फिल्मो में माई सिस्टर, साह्जहाँ, देवदास जैसी फिल्मे शामिल हैं, उनके गाने आज भी सुने जाते हैं, सैजल नशे के अदि थे इस कारण वे अधिक समय तक दुनिया में नहीं रह पाये, और 42 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया|
Posted on: Apr 11, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG STORY VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
न मै देख लो मोर इसु के...मसीह गीत-
जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से संध्या खलको एक गीत सुना रही हैं:
न मै देख लो मोर इसु के-
न मै नीद लों मोर मसी से-
का हो गलेच मोके-
याद आबे इसु बार बार-
डूब डोंक में तोर याद आबे ला-
निराषा में भी तै आशा देबेच ला-
का हो गलेच मोके-
याद आबे इसु बार बार...
Posted on: Apr 11, 2020. Tags: BALRAMPUR CG SANDHYA KHALKO SONG VICTIMS REGISTER
दया दृष्टि होगी तो मुझको बचा लो...गीत-
कमल विहार, रायपुर (छत्तीसगढ़) से टिकई दास धार एक गीत सुना रहे हैं:
कोई माता होंगे तो दूध पिला दो-
दया दृष्टी होगी तो मुझको बचा लो-
एक माँ ने मुझको जनम दिये हैं-
दो दिन न हुये मुझे फेंक दिये हैं-
उस माँ को मै मै नहीं जानती-
इसीलिये उसे माँ नहीं मानती-
ऐसे कुकरमी माँ को जेल में सडा दो-
दया दृष्टी होगी तो मुझको बचा लो...
Posted on: Apr 10, 2020. Tags: CG HD GANDHI RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
न ये तोप के गोले रखते न बंदूक की गोलियां...कोरोना पर कविता-
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
न ये तोप के गोले रखते न बंदूक की गोलियां-
यत्र तत्र सर्वत्र बिखरते स्वास्थ्य कर्मियों की टोलियाँ-
स्वास्थ्य कर्मी यदि पुरुष है तो वो वीर है-
यदि महिला है तो वीरांगना-
रोगी को निरोगी करने के लिये नींद भी पड़ा है त्यागना-
सैनिक रहते मैदानों में ये रहते अस्पतालों में-
न ये तोप के गोले रखते न बंदूक की गोलियां...
