नाना सुडुना,नाना सुडुना खुल रहिना नाना ढगुराना...गोंडी में वर्षा पर कविता
कुमरम मोहन और आतरम विटल ग्राम-गुंजाला, जिला-आदिलाबाद (तेलंगाना) से गोंडी भाषा में बरसात के सम्बन्ध में एक कविता सुना रहे है:
नाना सुडुना,नाना सुडुना खुल रहिना नाना ढगुराना-
गुसुर से गुसुर से ढगुर आतोन आनी नावा तक्वाल-
नावा तक्वाल नावा तक्वाल ताड्स ना मोडियता नाना-
वितवाके रेल दून मोडिई वितोना...
Posted on: Aug 07, 2018. Tags: ADILABAD TELANGANA ATRAM VITHAL GONDI POEM KUMRAM MOHAN
मेरा इंदिरा आवास का पैसा सचिव नहीं दे रहा, आज मिलेगा कल मिलेगा बोल-बोलकर टाल रहा है...
पंडोपारा, ग्राम पंचायत-सफर, ब्लाक-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से हेमन्त बता रहे है इंदिरा आवास योजना के तहत उनके मकान बनने का रकम सचिव के पास है जो दे नहीं रहे है पिछले एक साल से घर बनने वाला था जो अभी तक सचिव के कारण नही बना है और कहने पर कहते हैं कि आज-कल में ईट गिरवा देंगे लेकिन आज तक नहीं गिरा है उनको घर की बड़ी समस्या हो रही है | इसलिए सीजीनेट के साथियों मदद की मांग कर रही है कि इन नम्बरों में बात कर इंदिरा आवास बनवाने में मदद करें: सचिव@8223917618, सरपंच@9826183092, C.E.O.@9926192534 कलेक्टर@9826443377. सम्पर्क नरेश पंडो@8889542136.
Posted on: Aug 06, 2018. Tags: HEMANT PROBLEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
जगा रे आदिवासी भाई बहिन भाई सगा-सगा...जागरूकता गीत
ग्राम-बरटोली, पंचायत+प्रखंड-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखंड) से संध्या कुजूर और एलसी खुशबू कुजूर एक जागरूकता गीत सुना रहे है:
जगा रे आदिवासी भाई बहिन भाई सगा-सगा-
गांव जगा टोला जगा जगा-जगा-
जगा रे आदिवासी भाई बहिन भाई सगा-सगा-
जंगल के बचायक लागिन जगा-जगा-
जमीन के बचायक लागिन जगा-जगा-
जगा रे आदिवासी भाई बहिन भाई सगा-सगा...
Posted on: Aug 06, 2018. Tags: GUMLA HINDI SONG LE KHUSHBU KUJUR SANDHYA KUJUR SONG VICTIMS REGISTER
हम जैसा व्यवहार करते है आगे हमें वैसा ही मिलता है...कहानी-
एक बार की बात है मोहन की मम्मी उसकी दादी माँ को मिट्टी के बर्तन में खाना दे रही थी, जिसे मोहन कई दिनो से देख रहा था, एक दिन उसने अपने दादी माँ से पूछा मेरी माँ आपको मिट्टी के बर्तन में खाना क्यों देती है, दादी ने जवाब दिया बेटा मै बूढी हो गई हूँ इसलिए, जिस पर बच्चे ने कहा, दादी माँ कल आप खाना हांथ में लेके छोड़ देना, फिर मै आपको डाटूंगा, आप बुरा मत मानना, अगले दिन दादी ऐसा ही करती है, जिस पर बच्चे ने दादी को डांटते हुए कहा आप मिट्टी के बर्तन को तोड़ दिए, अब मै बुढ़ापे में अपने मम्मी-पापा को खाना किसमे दूंगा, सारी बात बच्चे की माँ सुन रही थी, इससे सीख मिलती है हम जैसा व्यवहार करेंगे हमें भी वैसा ही व्यवहार मिलेगा|
Posted on: Aug 06, 2018. Tags: BALRAMPUR CHHATTISGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER VIJAY MARAVI
मोरे गंवई के माटी हा, मोला सरस सही लागे गा...छत्तीसगढ़ी गीत-
ग्राम-लामकन्हार, तहसील-अंतागढ़, जिला-कांकेर उत्तर बस्तर (छत्तीसगढ़) से कुमारी प्रीति गावड़े और कुमारी निन्देश्वरी गावड़े एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
मोरे गंवई के माटी हा, मोला सरस सही लागे गा-
तरिया नदिया अउ अमरैया जग सुहावन लागे पुरवैया-
कोयलिया हा करे गुटुर गू, मैना ताल सुनावे गा-
आमा अउ इमली के सुघ्घर छैंया, बड़े मन मोला भावे गा-
मोरे गंवई के माटी हा मोला सरस सही लागे गा...
