सुनो-सुनो सब चतुर सुजान...गीत

संतोष अहिरवार ग्राम-सरईमाल, विकासखंड-समनापुर, जिला-डिंडोरी (म.प्र.) से बोल रहे है कि आज की दुनिया डिजिटल इंडिया है अपने को परिवर्तन करना और परिवर्तन लाना आज की विशेष आवश्यकता है उसी के सम्बन्ध में एक गीत सुना रहे है:
सुनो-सुनो सब चतुर सुजान-
लईका सयान लगा के ध्यान जय गंगा-
सुनो-सुनो दुनिया के हाल-
नर नारी के बिगड़े चाल जय गंगा-
कपटी हो गए सब नर नारी...

Posted on: Feb 07, 2018. Tags: SANTOSH AHIRWAR SONG VICTIMS REGISTER

सीजीनेट में मैंने गांव, पंचायत और ग्रामीण संस्कृति से जुड़े संदेश सुने, मुझे बहुत अच्छा लगा...

ग्राम पंचायत-कमतरी पंचमपुरा, पोस्ट-जग्गाकपुरा, तहसील-अम्भा, जिला-मुरैना (मध्यप्रदेश) से कालीचरण सीजीनेट स्वर मोबाइल रेडियो के साथियों के सांथ अपना अनुभव व्यक्त करते हुए कह रहे हैं, उन्होंने सीजीनेट स्वर मोबाइल रेडियो में गांव, पंचायत और संस्कृति से सम्बंधित कई संदेश सुने जो उन्हें बहुत पसंद आया, वे कह रहे हैं गाँव देहात के लिए यह एक अनूठा माध्यम है और यदि उनका संदेश भी भविष्य में प्रसारित होगा तो उन्हें खुशी होती है सांथ ही आभार व्यक्त किया और शुभकामनाएं देते हुवे कहा आगे वे आगे भी सीजीनेट परिवार के सांथ जुड़ कर नए-नए कार्यक्रम के सांथ उपस्थित होंगे |कालीचरण@9406723752.

Posted on: Feb 07, 2018. Tags: KALICHARAN MURAINA SONG VICTIMS REGISTER

रे मामा रे मामा रे रे मामा रे मामा रे...गीत

ग्राम-बेलवारा, पोस्ट-कटोतिया, तहसील-महेंद्रगढ़, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से सुकुल सिंह के साथ एक साथी एक गीत सुना रही है:
रे मामा रे मामा रे रे मामा रे मामा रे-
हम तो गए बाजार में लेने तो आलू-
आलू वालू कुछ न मिला पीछे पड़ा भालू-
हम तो गए बाजार में लेने तो रोटी-
रोटी पोटी कुछ न मिला पीछे पड़े मोती-
रे मामा रे मामा रे रे मामा रे मामा रे...

Posted on: Feb 07, 2018. Tags: SONG SUKUL SINGH VICTIMS REGISTER

मोरे मडला गढ़ माटी ला बंदो जीयत मरत के साथी...गीत

ग्राम-सालीवाडा, तहसील-नैनपुर, जिला-मंडला (मध्यप्रदेश) से कलीराम धुर्वे
एक गीत सुना रहें है:
मोरे मडला गढ़ माटी ला बंदो जीयत मरत के साथी-
जीयत मरत साथी है धरती जीयत मरत के साथी-
माटी के चोला माटी में मिलबे अमर बने है कहानी-
अमर बने कहानी वों दाई अमर बने है कहानी-
मोरे मडला गढ़ माटी ला बंदो जीयत मारत के...

Posted on: Feb 07, 2018. Tags: KALIRAM DHURWEY SONG VICTIMS REGISTER

अपना गावं भी अब तो नहीं लगता अपना...झारखंड से कविता

बीरेंद्र कुमार महतो जिला-रांची (झारखंड) से एक स्वरचित कविता सुना रहे हैं जिसका शीर्षक है चाह :
अपना गावं भी अब तो नहीं लगता अपना-
उजाड़ औार वीरान हर तरफ-
सिर्फ बंजर पड़े हैं सारे के सारे खेत-
बूढी दादी भी अब तो नहीं सिझाति धान-
हुआ करती थी कभी वो सूने खलिहानो की शान-
खाली ढन-ढन पड़े हैं सारे के सारे बासन बर्तन-
चूल्हे पर भी नहीं दिखते ताव...

Posted on: Feb 07, 2018. Tags: Birendra Mahto SONG VICTIMS REGISTER

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