वनांचल स्वर: उस सम्मेलन में अनुभव से भरे बुजुर्ग, ऊर्जा से भरे युवा...
ग्राम-धनेली (कन्हार), तहसील- कोरर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र कुमार 15 मार्च को होने वाले महासम्मेलन के बारे में बता रहे हैं। उस दिन 15 मार्च को विधिवत ढंग से ग्राम गायता का चुनाव होना है। जिस प्रकार मुखिया और विधायक का चुनाव होता है, उसी प्रकार से गांव नीति का भी चुनाव होता है। उस सम्मेलन में अनुभव से भरे बुजुर्ग, ऊर्जा से भरे युवा, ममता से भरी माताएं उपस्थित रहेंगी। सम्पर्क@8839492918.(185588) GT
Posted on: Feb 14, 2021. Tags: CG KANKER VANANCHAL SWARA VIRENDRA KUMAR
वनांचल स्वर: जंगल देते स्वाद और स्वास्थय साथ साथ...
ग्राम-धनेली कनार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) प्रेमलाल कोमरा बताते हैं कि इमली के बीज को आग में भूंजकर उसमें महुए के फूल को डालकर पकाते हैं| तैयार हो जाने पर खाते हैं और बाज़ार ले जाकर बेच देते हैं| सरई के फूल को भी इमली के बीज की तरह भूंजकर उसमें महुइ के फूल को डाला जाता है, इसे मैंने भी खाया है| कांदा जो जंगल में पाया जाता है, इसे घर में नहीं रखा जाता है| कांदा स्वाद में बहुत कड़वा होता है, इसे भी पकाया जाता है, कांदा को अभी भी खाया जाता है| प्रेम लाल महुए के लड्डू के भी बारे में बताते हैं, महुए को सिलबट्टे या मिक्सी से पीसकर बनाया जाता है| ये सभी स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं जैसे इमली भूने हुए बीजों को खाने से पेट का मल साफ़ होता है|(RM)
Posted on: Feb 13, 2021. Tags: CG KANKER PREMLAL KOMRA VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: कोरोनकाल में जड़ी बूटी देकर की लोगों की मदद...
ग्राम-कराठी, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) वीरसिंह पड्डा बताते है की कोरोना महामारी में शहरों में उत्पन्न हुआ और लोगो में फैला। मैने सुबह शाम गिलोय, उषा और तुलसी पत्ती से जड़ी बूटी बनाकर पिया। मैने गांव के लोगो को मुफ्त गिलोय भी दिया। जंगल की हवा और पानी साफ है, शहर का प्रदूषित इस वजह से शहरों में ज्यादा फैला। गांव का हवा पानी जलवायु साफ है। जिस कारण यहां रहने वाले लोगो कि प्रतिरक्षा शक्ति अच्छी है। हम लोगों ने जड़ी बूटियों का संभाल कर इस्तेमाल किया। कई जड़ी बूटियां विलुप्त होने के कगार पर भी हैं जिसको बचाना मेरे अकेले के लिए मुश्किल है। जो लोग शहर से आए थे उनको भी इन जड़ी बूटियों से फायदा हुआ।(RM)
Posted on: Feb 13, 2021. Tags: CG KANKER VANANCHAL SWARA VIRSING PADDA
वनांचल स्वर:वनवासी और उनके देवता
ग्राम-धनेली कनार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) व्यास साहू बताते हैं कि बस्तर आदिवासी क्षेत्र में वनवासी वनों की रक्षा करते हैं| वनवासी मूर्ती पूजा नहीं करते बल्कि वो जंगल से मिलने वाली लकड़ी से झूलानुमा ढांचा तैयार करके उसी की पूजा करते हैं| वनवासीयों की मौसमी जिंदगी वन उपज पर ही आधरित है| आदिवासी भाई वनों के बिना अधुरे हैं| समिति का कार्य वनों की रक्षा करना है| समिति अधिकारीयों के साथ बैठकर उनसे बातचीत करके नियम बनाती हैं| जनसँख्या बढ़ने के कारण वन के पेड़ो की कटाई करनी पड़ती है, पेड़ काटने से बचने क लिए बंजर जमीनों पर लोगों को बसाया जा रहा है| आदिवासी भाई महुआ से प्राप्त होने वाले रस को देवी देवताओं को चढ़ाकर त्यौहार मनाते हैं| बरसात कम होने की स्तिथि में शीतला माता कि पूजा करते हैं| बुढ़ा देव को वनवासी पूजते हैं| वनवासी प्राकृति की पूजा करते हैं| मेहमान आने पर वो उसको महुआ का रस पिने के लिये देते हैं| वन कानूनों के बारें में लोगो को जानकारी हो इसके लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं| बाहरी ठेकेदारों पर कारवाई की जा रही हैं| वनवासी महुआ का फल, रस और अन्य वन्य उपज बेचकर अपना गुजारा करते हैं| वृक्षरोपण कार्यकर्मो को बढ़ाया जा रहा हैं|(RM)
Posted on: Feb 11, 2021. Tags: CG KANKER VANANCHAL SWARA VYAS SAHU
वनांचल स्वर: चाहचढ़ नाम पड़ने का इतिहास...
ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से सन्तु सलाम बताते हैं, हमारे पूर्वजों ने कई बार चाहचढ़ नाम के पीछे की कहानी हमें बताई है जो काफ़ी दिलचस्प है| यहाँ पर एक झरना है जिसका नाम चाह्चिहुढ़ और उस झरने के आस पास चाहची नाम का पक्षी रहता था जिससे यहाँ का नाम चाहचढ़ पड़ा| बड़े बुजुर्ग बतातें हैं कि वन में फल, फूल और जानवर खूब थे| औषधियाँ भी मिलती थी जिनसे मलेरिया और कई बीमारियाँ ठीक होती है| लेकिन अब यह सब बहुत तेज़ी से खत्म हो रहा है खनन की वजह से| सम्पर्क@7647070617. (185513) GT
