चलू गा अझलुवा कन्हैया धरे आचार, आचार दुसर लागल लारे झालर मचिया...गीत
जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से हरमन कुमारी एक गीत सुना रही हैं :
चलू गा अझलुवा कन्हैया धरे आचार-
आचार दुसर लागल लारे झालर मचिया-
ओ राधा रानी काहे बताना मोर कती आना-
छोटा के कमाल मै रखे हो परान जोड़ी रे-
ओ राधा रानी काहे बताना मोर कती आना-
छोटा के कमाल मै रखे हो परान जोड़ी रे...
Posted on: Jul 16, 2018. Tags: CULTURE HARAMAN KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
हो होरे जिया हो रे का, काया बिता रे बीतरे जियान...शादी गीत-
ग्राम-तिगावल, प्रखण्ड-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से पासो देवी और सुमती देवी एक विवाह गीत सुना रहे हैं :
हो होरे जिया हो रे का-
काया बिता रे बीतरे जियान-
होले बिता रे बीतरे काया नोली-
यों हो रे जीजिया, हो होरे का-
आया बिता आय बीता रे जिया-
हाले बिता हरे बितारे काया हनो हंदी-
निपार तायो नाले नना आंजे दुनिया...
Posted on: Jul 16, 2018. Tags: PASO DEVI SONG SUMATI DEVI VICTIMS REGISTER
एक पल की जिंदगानी, एक रोज सबको जाना...गीत-
ग्राम-बरेतीकला, ब्लाक, तहसील-जवा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से दयासागर कुसवाहा एक गीत सुना रहे हैं :
एक पल की जिन्दगानी एक रोज सबको जाना-
वर्षो की तू क्यों सोचे पल नही ठिकाना-
मल-मल के तूने अपने तन को जो है निखारा-
इत्रों कि खुशबुओं से महके शरीर सारा-
तन-मन से तूने अपने तन को है जो निखारा-
काया जो सांथ होगी ये बात न भुलाना, वर्षो की तू क्यों सोचे पल नही ठिकाना...
Posted on: Jul 16, 2018. Tags: DAYASAGAR KUSWAHA HINDI HINDI SONG SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : टांसिल के बढ़ने का घरेलू उपचार-
रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच. डी. गांधी टांसिल के बढ़ जाने का घरेलू उपचार बता रहे हैं: हल्दी दरदरी पिसी 50 ग्राम, बईबडिंग मोटा दरदरा 50 ग्राम, सेंधा नमक 5O ग्राम, सभी को साफकर, पीसकर दरदरा चूर्ण बनाकर सुरक्षित रख लें, उसके बाद आधा चम्मच चूर्ण आधा लीटर पानी में तब तक उबाले जब तक कि आधा न हो जाए उसके बाद हल्का गुनगुना कर छान लें और दिन में दो बार गरारा करें, रात में सोने से पूर्व गरारा जरुर करें इससे लाभ मिल सकता है, ठण्डी चीजो से बचे, गरम पानी का उपयोग करे, मैदा, नमक, शक्कर का कम उपयोग करें नशा, तेल, मसाला, मिर्च, खटाई का प्रयोग न करें : एच. डी. गांधी@9111061399.
Posted on: Jul 16, 2018. Tags: HD GANDHI HEALTH SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
लोगो में गोंडी सीखने की ललक है, लेकिन इस भाषा में अभी तक शिक्षा का कोई साधन नही...
अंबिकापुर, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ) से कोमल सिंह नेताम बता रहे हैं कि गोड़ी भाषा अभी केवल आदिवासी ग्रामीण इलाको में ही बोले जा रहे हैं, शिक्षा के रूप में सामने नही आया है, 1990 में मध्यप्रदेश सरकार ने गोड़ी भाषा से शिक्षा देने का प्रयास किया था, उसमे कुछ पुस्तकें भी निकली गई थी, लेकिन उसमे सफलता नही मिली, गोड जाती में इस भाषा को सीखने की ललक है, लेकिन अभी तक गोड़ी लिपि में लिखाने या पढ़ाने का प्रयास किसी ने नही किया है और जो पुस्तके प्रकाशित हुई है वो देवनागरी लिपि में है, गोंडी में एक दो पुसतकें आई है, लेकिन अभी कोई भी ऐसा व्यक्ति सामने नही आया जो अच्छे से गोड़ी लिख पढ़ सके |

