सादरी गीत : पापा मोके प्यार करी लों मम्मी दुलार करीलों...
ग्राम-अलका, पोस्ट-चलगली, तहसील-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से सुरेश कुमार एक सादरी गीत सुना रहें है:
पापा मोके प्यार करी लों मम्मी दुलार करीलों-
हायरे सुन्दर झरिया में जीवन जल मोके पियाला-
हायरे सुन्दर डहर में ज्योति मोके दिखा ला-
जंगल पहाड़ सुनसान डहर में भूलाये जाहों ना-
स्वर्ग कर डहर छेड़ के नर्क के डहर में जाओ ना-
पापा मोके प्यार करी लों मम्मी दुलार करीलों...
Posted on: Nov 15, 2019. Tags: BALRAMPUR CG SONG SURESH KUMAR VICTIMS REGISTER
बघेली कविता : एक बिना हम चले जात रहीं, संग में पकड़े ढर्रा...
तहसील-सिरमोर, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रमेश प्रसाद यादव एक बघेली कविता सुना रहे है. जिसका शिर्षक “आवारा नाती” है:-
एक बिना हम चले जात रहीं, संग में पकड़े ढर्रा-
रही प्यासी ख़ूब दुपहरी, घाम जेठ के कर्रा-
दो नीं से गोहराई ना हमखा, बढ़ गईयाँ बैसाखि-
बैठ रहे चौरा में अपने, पणवत चैन तम्बाखू-
वहीं से बैठे-बैठे, ओखर नाती धूल उड़ावे-
बंद करिन अखबार पढ़ो, लागी वो नाती को हाल सुनावे...
Posted on: Nov 14, 2019. Tags: RAMESH PARSAD YADAV REWA MP SONG VICTIMS REGISTER
वीणा बजा दे तू माँ एक बार...सरस्वतीं वंदना-
ग्राम-मडमा,पोस्ट-कृष्णा नगर, धामनी, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से मीना यादव एक गीत सुना रही हैं :
हाथों में लेकर माँ वीणा के तार-
वीणा बजा दे तू माँ एक बार-
माँ मै तुझे एक पल भूल ना पाऊं-
तेरे चरणों में सदा शीश झुकाऊं-
आंचल में लेलो माँ मुझे एक बार-
वीणा बजा दे तू माँ एक बार...
Posted on: Nov 13, 2019. Tags: BALRAMPUR CG MEENA YADAV SONG VICTIMS REGISTER
पिंजरे के पंछी रे, तेरा दर्द ना जाने कोय...गीत-
ग्राम-कोलियारी, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से हीरामनी नाग एक गीत सुना रही हैं :
पिंजरे के पंछी रे, तेरा दर्द ना जाने कोय-
बाहर से खामोश रहे तू, भीतर-भीतर रोये रे-
कह ना सके तू अपनी कहानी-
तेरी भी पंछी क्या जिंदगानी रे-
विधि ने तेरी कथा लिखी है, आंसू में कलम तू बोर-
तेरा दर्द ना जाने कौय...
Posted on: Nov 11, 2019. Tags: CG HIRAMANI NAG NARAYANPUR SONG VICTIMS REGISTER
बघेली कविता : हमरे देश मा पुंजनिय है, चिंता और तवा...
ग्राम-पड़वी, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रमेश प्रसाद यादव एक बघेली कविता सुना रहे है जिसका शिर्षक “तवा और चिंता है:
हमरे देश मा पुंजनिय है, चिंता और तवा-
एक दिन कहिस, तवा चिंता से हम दुई जरत रहिथ है-
हम चूल्हा के मोड़ में बैठे, दिन भर पकत रहीथ है-
कोळ रोटी बेलकर पटके, हमरे गरम् कपारे में-
अब चिंता से पकड़-पकड़, हिट आवे रोटी खड़ीं द्वारे में-
हमरे तुमरे बिच में भाई, कछु नहीं अंतर है-
एक दिन कहिस, तवा चिंता से हम दुई जरत रहिथ है...
