तय आ जाबे मैना उड़ते-उड़ते तय आ जाबे...छत्तीसगढ़ी गीत

ग्राम-कोटया, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे है:
तय आ जाबे मैना उड़ते-उड़ते तय आ जाबे-
कुआँ पार में रे संगी साँझा के बेरा कुआँ पार में-
एक पेड़ आमा छतीस पेड़ जाम-
मधुबन के चीरईया बोलत राम-राम-
धान ला लूवे उड़ेला कनसी, सावन के मंदिर में सुनावे बनसी कुआँ पार में-
कुआँ पार में रे संगी साँझा के बेरा कुआँ पार में...

Posted on: Aug 05, 2018. Tags: CHHATTISGARHI MEWALAL DEWANGN SONG VICTIMS REGISTER

मोही ले चलो अपने नगरिया अवध बिहारी सावरिया...भजन गीत-

ग्राम-कोल्हुआ, विकासखण्ड-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से हरीसिंह मरावी एक भजन गीत सुना रहे हैं :
मोही ले चलो अपने नगरिया अवध बिहारी सावरिया-
ओके अवध बिहारी ये सावरिया-
प्रभु राहो कुआँ खोदवा देना-
जलवा भरुगी अकेले जरा आ जाना-
प्रभु राहो में मंदिर बनवा देना पूजा करुगी अकेले जरा आ जाना-
मोही ले चलो नगरिया आवध बिहारी सावरिया...

Posted on: Aug 05, 2018. Tags: BALRAMPUR HARISINGH MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

वनांचल स्वर : गांव की परंपरा के अनुसार बांस जीवन से अंत तक किसी रूप में हमारे सांथ रहता है-

ग्राम-आरंडी, कुरखेरा, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) के निवासी इजमसाय कटंगे बता रहे हैं, उनके इलाके में कई प्रकार के बांस पाए जाते हैं जिसमे मानवाल प्रजाति का बांस अधिक पाया जाता है जिसको यहाँ के निवासी सबसे ज्यादा उपयोग में लाते हैं, यहाँ की परम्परा के अनुसार बांस या बाम्बू एक साथी की तरह होता है जो जन्म से मृत्यु तक अगल-अलग रूप में आदिवासी मनुष्य के साथ रहता है जैसे जन्म के समय उससे नाड काटते हैं, थोडा बड़ा होने पर झूला के रूप में, शादी में पारी के रूप में, बुढ़ापे में सहारे के रूप में और अंतिम अवस्था अर्थात मरने पर श्मशान भूमि पहुंचाने तक साथ रहता है, इस तरह से बांस या बाम्बू का आदिवासी जीवन से मृत्यु तक साथ रहता है...

Posted on: Aug 05, 2018. Tags: GADCHIROLI SAGGAN SHAH IJAMSAAY SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

चम-चम बिजली चमके, काले-काले बदल छाया...सावन कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी वर्षा ऋतु पर एक कविता सुना रहे हैं :
चम-चम बिजली चमके काले-काले बादल छाया-
उमड़-घुमड़कर बादल गरजा, सुहानी वर्षा ऋतु आया-
मोतियाँ टपके पानी बनकर, टप-टपाकर धरती माँ को नहलाया-
हरित हुआ नवपल्लव से, विविध जीव जंतु जनम पाया-
दूल्हन जैसी कर नवश्रंगार सबके मन को पुलक कर निभाया-
चले किसान हल बैला लेकर, धरती माँ को खूब उकसाया...

Posted on: Aug 04, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

वनांचल स्वर : मुनगा वृक्ष के औषधीय गुण-

जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से राघवेन्द्र सिंह राय सहजना जिसे मुनगा भी कहते है, के औषधीय गुण बता रहे हैं, मुनगा को सब्जी के रूप में भी उपयोग करते हैं,
1- जिन व्यक्ति के कान में स्राव होता है, बहता है, वे सहजन के फूल को सुखाकर चूर्ण बना लें, और ग्रषित कान में एक चुटकी डाले इससे आराम मिल सकता है,
2- संधीबात, गठियावात, आमवात रोगो में इसके बीजो के तेल से मालिश करने से लाभ मिल सकता है, इसके अलावा क्वाक अर्थात काढा बना कर भी सेवन कर सकते हैं, यह स्वास्थ्य के लिए लाभ दायक है अधिक जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हैं :
संपर्क नम्बर@9424759941.

Posted on: Aug 04, 2018. Tags: HEALTH MP RAGHVENDRA SINGH RAI SONG TIKAMGARH VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

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