स्वास्थ्य स्वर: सूखी खांसी की घरेलू उपचार विधियां...
ग्राम-भोरमदेव, वनांचल, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अमित साहू सूखी खांसी के घरेलू उपचार के नुस्ख़े बता रहे है: मुलेठी का चूर्ण एक चम्मच, मिश्री आधा चम्मच, काली मिर्च 5 दाने, सबको बारीक़ पीस लेवे, अब एक चम्मच फ़क्की मारकर सेवन करे, इसके बाद आधा कप पानी पी लेंवे, लगातार सेवन करने से चार पांच दिनों में राहत मिलता है. दूसरा नुस्खा : हर्रा फल (हरड़) को हल्का सा आग में भून लेवे, उसका छोटा टुकड़ा चूसने से खांसी से राहत मिलती है. तीसरा नुस्खा: अमरुद (बिही) कच्चा अमरुद को हल्का सा आग में भून लेंवे भूनने के बाद उसके बीजों को निकालकर अमरुद को खावें, इससे भी खांसी में लाभ मिलेगा. अधिक जानकारी के लिए: अमित साहू@8964931287.
Posted on: Apr 06, 2018. Tags: AMIT SAHU SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : महुए को हम आदिवासी कोदो कुटकी के साथ पीसकर दलिया बनाकर भी पीते है...
ग्राम-भुरियालदंड, तालुका-कोरची, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से दशरू कुमरे महुए का उपयोग किस-किस काम के लिए किया जाता है, उसके बारे में जानकारी दे रहे है वे बता रहे हैं कि मध्य भारत के आदिवासी इलाकों में महुआ का उपयोग खाने के साथ में भी किया जाता है और इसे कोदो कुटकी के साथ पीसकर दलिया बनाकर भी पीते है| इसको कंडे के साथ भुन्जकर भी खाया जाता है| महुआ का दारू भी बनाया जाता है इससे हमारा रोजगार भी चलता है| महुआ को गाय बैलो को भी खिलाते है उससे उनका शरीर तंदुरुस्त रहता है| इस तरह हमारे लिए और हमारे पशुओं के लिए बहुत उपयोगी है, यह हमारे संस्कृति का भी हिस्सा है | रानेश कोर्चा@8459328717.
Posted on: Apr 05, 2018. Tags: DASHRU KUMRE GONDI SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
मन में है विश्वास, हम होंगे क़ामयाब एक दिन...गीत
उटनूर, जिला-आदिलाबद (तेलंगाना) से भीमराव हम होंगे कामयाब गीत व्यंकटेश से सुन रहे है:
हम होंगे क़ामयाब, हम होंगे क़ामयाब एक दिन-
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास, हम होंगे क़ामयाब एक दिन-
होगी शांति चारों और, एक दिन हो हो, मन में है विश्वास-
हम होंगे क़ामयाब, एक दिन-
हम चलेंगे साथ साथ, डाल हाथों में हाथ, एक दिन हो हो-
हम होंगे क़ामयाब, एक दिन-
नहीं डर किसी का आज, एक दिन हो हो, मन है विश्वास-
पुरा है विश्वास, हम होंगे क़ामयाब, एक दिन...
Posted on: Apr 05, 2018. Tags: BHIMARAO SHEDMAKE SONG VICTIMS REGISTER
भुरु पानी गाँव हमर, बड़ा सुंदर गाँव हे रे, बड़ा सुंदर गाँव...गीत
ग्राम-नीलकंठपुर, पंचायत-गोरगी, थाना-चंदोरा, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से जगदेव प्रसाद पोया अपने गाँव के बारे में गीत के माध्यम से बता रहे है:
भुरु पानी गाँव हमर बड़ा सुंदर गाँव हे रे, बड़ा सुंदर गाँव-
आदिवासी जन हवे, भय्या हो, आदिवासी जन हवे-
चले फिरे बढ़ रास्ता कठिन है, पानी नल कुआं के भी परेशानी है-
भय्या हो पानी पिये बर परेशानी है, दादा हो आये जाए बर परेशानी है-
लेकिन भुरु पानी गाँव हमर, बड़ा सुंदर गाँव हे रे, बड़ा सुंदर गाँव-
यहाँ कोया आदिवासी जन हवे...
Posted on: Apr 05, 2018. Tags: JAGDEV POYA SONG VICTIMS REGISTER
उड़िया कसन टगत हे जोन, हर बनते हमर सरकार...छत्तीसगढ़ी कविता -
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है:
उड़िया कसन टग हे-
जोन हर बनते हमर सरकार-
निकता-निकता ला ओमन खाते-
कमइया के जिन्दगी बेकार-
बैला कमाये घोड़वा खाए-
बैला के जीना हवे बेकार-
दिनभर नहना तोड़े बैला हर-
पावे रुका सुखा पहेरा खाए भर-
घोडा खाए दाना चबेना-
खड़े-खड़े मंजा ले पोगराय-
वैसन हमर देश में हवे-
टगवा निकता-निकता ला खाए...
