हांथो में लेकर माँ वीणा के तार, वीणा बजा दे तू माँ एक बार...गीत-
ग्राम-केछ्वारी, पंचायत-रामपुर, विकासखण्ड-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से सुरीला सिंह एक भजन सुना रही हैं :
हांथो में लेकर माँ वीणा के तार-
वीणा बजा दे तू माँ एक बार-
सरस्वती मईया तू वीणा के तार-
वीणा बजा दे तू माँ एक बार-
माँ मै तुझे एक भी पल भूल न पाऊं-
माँ मै चरणों में तेरे शीश झुकाऊं...
Posted on: Feb 26, 2019. Tags: CG ODGI SHURILA SINGH SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
कभी राम बन के कभी श्याम बन के चले आना...भजन गीत-
ग्राम पंचायत-करोटी, विकासखण्ड-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से ऋतू सिंह और सुमित्रा एक समूह गीत सुना रही हैं:
कभी राम बन के कभी श्याम बन के चले आना-
प्रभु जी चले आना-
तुम राम रूप में आना-
सीता सांथ लेकर धनुष हांथ लेकर चले आना-
प्रभु जी चले आना...
Posted on: Feb 26, 2019. Tags: CG OGDI RITU SINGH SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
बड़े सबेरे मुर्गा बोला, चिडियों ने अपना मुंह खोला...कविता -
जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अमित साहू बोल रहे है कि सुबह होते ही मनुष्य को कैसे काम करना चाहिए उसके सम्बन्ध में एक कविता सुना रहे है:
बड़े सबेरे मुर्गा बोला-
चिडियों ने अपना मुंह खोला-
आसमान पर लगा चमकने-
लाल-लाल सोने का गोला-
सब बोलो दिन निकला भाई...
Posted on: Feb 26, 2019. Tags: AMIT SAHU SONG VICTIMS REGISTER
मन में दीप जला दे, हे प्रभु दिल में ज्योत जला दे...भक्ति गीत -
ग्राम-करकेटा, पोस्ट-जोंगा, थाना-उटार रोड, जिला-पलामू, (झारखण्ड) से अंजनी कुमारी एक भक्ति गीत सुना रही है :
मन में दीप जला दे, हे प्रभु दिल में ज्योत जला दे-
शांति की ज्योति मेरे मन में, मन में दीप जला दे-
प्रेम की ज्योति मेरे मन में, मन में दीप जला दे-
दया की ज्योति मेरे मन में, मन में दीप जला दे-
मन में दीप जला दे, हे प्रभु दिल में ज्योत जला दे...
Posted on: Feb 26, 2019. Tags: ANJNI KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
वक्त का ये परिंदा रुका है कहाँ, मै था पागल जो इसको बुलाता रहा...गजल
ग्राम-भेड़ाघाट, जिला-जबलपुर (मध्यप्रदेश) से सतीष कुमार एक गज़ल गीत सुना रहे है :
वक्त का ये परिंदा रुका है कहाँ, मै था पागल जो इसको बुलाता रहा-
चार पैसे कमाने मै आया शहर, गाँव मेरा मुझे याद आता रहा-
एक दिन में बनूँगा बड़ा आदमी, ये तस्बुर मुझे गुनगुनाता रहा-
पाठशाला से मै जब लौटता घर, अपने हाथों से रोटी खिलाती थी माँ-
वक्त का ये परिंदा रुका है कहाँ, मै था पागल जो उसको बुलाता रहा-
चार पैसे कमाने मै आया शहर, गाँव मेरा मुझे याद आता रहा...
