हमारे गाँव में गंदा पानी इकट्ठा होता है जो घरों में घुसता है, अधिकारी कोई मदद नहीं करते...
ग्राम-धुलेटा, तहसील-पलोर, जिला-जालंधर (पंजाब) से जगदीश बता रहे है, गाँव में एक टंकी है यहाँ पर पूरे गाँव का गन्दा पानी एकत्रित होता है, जो पिछले 2-3 सालो से ओवर फ्लो होता है जिसका गन्दा पानी लोगो के घर में घुसता है. छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कते होती है.गन्दगी और कीचड़ के कारण फ़िसलन भी होती है, रात में निकलने वालो को गिर जाने का डर भी बना रहता है, कई लोग तो गिरकर चोटिल भी हो चुके है. इस समस्या के समाधान के लिए सम्बन्धित विभाग को कई बार शिकायत की है परन्तु कोई हल नही हो रहा है| कृपया मदद करे. जिम्मेदार अधिकारी का नम्बर@9464369408. जगदीश@9417794890.
Posted on: May 01, 2018. Tags: JAGDISH SONG VICTIMS REGISTER
आहा करोंदा ला, कोन बनी भेटों रे...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-कोट्या, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे है:
आहा करोंदा ला, कोन बनी भेटों रे-
पूछत हवे मुरेरत हवे, छूटत हवे प्राण-
आहा करोंदा ला, कोन बनी भेटों रे-
इक दिन खोंजो दुई दिन खोंजो, ख़ोज दारो दिन चार-
खोजत-खोजत लोरी छोला गई, आँखे हो गई अंधियार-
आहा करोंदा ला, कोन बनी भेटों रे...
Posted on: May 01, 2018. Tags: MEVALAL DEVANGAN SONG VICTIMS REGISTER
मेरी मणि मेरे अच्छे विचार है, इन्ही विचारों के कारण मै हमेशा प्रसन्न रहता हूँ: संत...कहानी
एक संत थे वह हमेशा प्रसन्न रहते थे| चारो ओर चर्चा थी, उनके पास कोई मणि है. एक बार चोर उन्हें पकड़ कर जंगल ले गये और बोले बताओ मणि कहा है, जिसके कारण हमेशा मुस्कुराते रहते हो. संत मुस्कुराते हुए बोले मेरे पीछे आते जाओ और जहा-जहा पेड़ दिखे गड्डा खोदते जाओ मणि मिल जायेगी, संत ने जैसे बोला वैसे ही चोरों ने किया, रात होने को आई परन्तु चोरों को मणि नही मिली, फिर संत ने चोरो को पास बुलाकर कहा मेरे पास कोई मणि नही है, मेरी मणि मेरे मष्तिक में रहने वाले अच्छे विचार है| इन्ही विचारों के कारण मै हमेशा प्रसन्न रहता हूँ. संत की बात सुन चोरो को अपराधबोध हुआ और चोरी छोड़ ईमानदारी से जीवन बिताना शुरु कर दिया.
Posted on: May 01, 2018. Tags: SONG USHA SINGH VICTIMS REGISTER
गाँव गवाई हर शहर मा, बदल जाहि का रे संगवारी...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी छत्तीसगढ़ी में एक कविता सुना रहे है:
गाँव गवाई हर शहर मा, बदल जाहि का रे संगवारी-
खेत खार मा बुता करय्या, नौकरी करे बर जाबो-
धान, चावल कहा ले पाबो, काला खा के प्राण ला बचाबो-
आनी बानी के कम्पनिया आवत है, उर्रा धुर्रा म खेत खार बेचावत है-
इत्ती उत्ती रेल पटरी, बिछावत है-
गाँव गवाई हर शहर मा, बदल जाहि का रे संगवारी...
Posted on: May 01, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER
मड़वा बइठले पापा जंघिया अंजन पापा थरथर कांपल हे... सरगुजिया विवाह गीत
ग्राम-बलोर, जिला-बलरामपुर, छत्तीसगढ़ से एक ग्रामीण महिला सरगुजिया भाषा में एक गीत प्रस्तुत कर रही हैं, यह गीत विवाह के समय गाया जाता है:
मड़वा बइठले पापा जंघिया अंजन पापा थरथर कांपल हे-
हथवा लगावल दुलहा अनजान दुलहा अवदा निहामण हे-
धीरे रहु हे बाबू धीरे रहु और गम्भीरे रहु ना-
जब पापा कुशल संकल जन करिहें तब गनिराउर हे-
मड़वा बइठले पापा जंघिया अंजन बेटी थरथर कांपल हे...
